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Udhampur News: पाश्चात्य संस्कृति को अपना कर अपनों से विमुख हो रहे लोग
Thu, 25 Apr 2024 06:35 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Thu, 25 Apr 2024 06:35 AM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से गीता भवन में श्री हरि कथा जारी
साध्वी दीक्षा भारती ने संगत को किया निहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। लोग अपनी संस्कृति को भूल कर पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पाश्चात्य संस्कृति को अपना कर अपनों से विमुख हो रहे हैं। इसलिए अभिभावक बच्चों को अपनी समृद्धि संस्कृति के प्रति जागरूक करें। यह ज्ञान गीता भवन चिनैनी में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से श्री हरि कथा के दूसरे दिन आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी दीक्षा भारती ने दिया।
उन्होंने बताया कि गुरु, माता पिता का सम्मान करना हमारी संस्कृति सिखाती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हमें प्रेरणा देते हैं कि हम अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को धारण करें, जो नैतिक मूल्य मानव के व्यक्तित्व को मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की मानिद् सुंदर बनाते हैं। लेकिन आज इस समाज का यह दुर्भाग्य है कि भारतीय होने पर भी हम अपनी सुंदर संस्कृति व संस्कारों को न अपनाकर पाश्चात्य संस्कृति के अनुसार अपनी जीवनशैली को अपना रहे हैं। इससे वृद्ध आश्रमों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। महापुरुषों द्वारा समाज को सुंदर भारतीय संस्कारों से सुसज्जित होने की प्रेरणा दी गई। आज हमारे समाज को अपने भारतीय संस्कृति के अनुसार उन नैतिक मूल्य व संस्कारों से सुसजित होने की आवश्यकता है।
मानव का जीवन एक वृक्ष की समान है। जिसके ऊपर फल फूलों रूपी नैतिक मूल्य तभी रोपित हो सकते हैं, यदि उसे जड़ से सींचा जाए और केवल मात्र अध्यात्म ही ऐसा जल है जिसके द्वारा मानव के जीवन रूपी वृक्ष को सींच करके, उसके जीवन को भारतीय संस्कृति के सुंदर संस्कारों से पोषित किया जा सकता है। आज आवश्यकता है अपनी संतानों को सुंदर संस्कारों से सुसज्जित करने के लिए अपने समाज को सुंदर बनाने के लिए हम उस ब्रह्म ज्ञान की ओर अग्रसर हों। कथा का समापन आरती के साथ किया गया। इस दौरान स्वामी सुचेतानंद, स्वामी हरिदासानंद, पंडित मदन, करनैल चंद, दीपक गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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साध्वी दीक्षा भारती ने संगत को किया निहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। लोग अपनी संस्कृति को भूल कर पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पाश्चात्य संस्कृति को अपना कर अपनों से विमुख हो रहे हैं। इसलिए अभिभावक बच्चों को अपनी समृद्धि संस्कृति के प्रति जागरूक करें। यह ज्ञान गीता भवन चिनैनी में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से श्री हरि कथा के दूसरे दिन आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी दीक्षा भारती ने दिया।
उन्होंने बताया कि गुरु, माता पिता का सम्मान करना हमारी संस्कृति सिखाती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हमें प्रेरणा देते हैं कि हम अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को धारण करें, जो नैतिक मूल्य मानव के व्यक्तित्व को मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की मानिद् सुंदर बनाते हैं। लेकिन आज इस समाज का यह दुर्भाग्य है कि भारतीय होने पर भी हम अपनी सुंदर संस्कृति व संस्कारों को न अपनाकर पाश्चात्य संस्कृति के अनुसार अपनी जीवनशैली को अपना रहे हैं। इससे वृद्ध आश्रमों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। महापुरुषों द्वारा समाज को सुंदर भारतीय संस्कारों से सुसज्जित होने की प्रेरणा दी गई। आज हमारे समाज को अपने भारतीय संस्कृति के अनुसार उन नैतिक मूल्य व संस्कारों से सुसजित होने की आवश्यकता है।
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मानव का जीवन एक वृक्ष की समान है। जिसके ऊपर फल फूलों रूपी नैतिक मूल्य तभी रोपित हो सकते हैं, यदि उसे जड़ से सींचा जाए और केवल मात्र अध्यात्म ही ऐसा जल है जिसके द्वारा मानव के जीवन रूपी वृक्ष को सींच करके, उसके जीवन को भारतीय संस्कृति के सुंदर संस्कारों से पोषित किया जा सकता है। आज आवश्यकता है अपनी संतानों को सुंदर संस्कारों से सुसज्जित करने के लिए अपने समाज को सुंदर बनाने के लिए हम उस ब्रह्म ज्ञान की ओर अग्रसर हों। कथा का समापन आरती के साथ किया गया। इस दौरान स्वामी सुचेतानंद, स्वामी हरिदासानंद, पंडित मदन, करनैल चंद, दीपक गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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