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जिंदगी की आखिरी रात बन गई साल की आखिरी रात
ब्यूरो/अमर उजाला, चिनैनी/नाश्ारी
Updated Sat, 02 Jan 2016 01:54 AM IST
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चिता बनी बैरक में जलकर राख हुए लोगों ने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि साल की आखिरी रात उनकी जिंदगी की भी आखिरी रात होगी। वीरवार की रात चिनैनी-नाशरी टनल में काम करने वाले मजदूरों की ढलवास स्थित बैरक में भी जश्न मनाया गया।
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खान-पान, नाच-गाना भी हुआ। इसके बाद सब सोने चले गए। किसे खबर थी कि उनके लिए इस रात की सुबह नहीं होगी। कुछ ही घंटों बाद बैरक में मौत का तांडव होगा। आधी रात के बाद करीब साढ़े बारह बजे बैरक में भीषण आग लग चुकी थी। चारो तरफ धुआं ही धुआं था। ऊंघते, आंखें मलते, गिरते-पड़ते मजदूर बैरक से बाहर निकल आए।
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कई की हालत धुएं के कारण गंभीर हो चुकी थी। फिर भी होश संभालकर बचाव कार्य शुरू किया। कुछ ही देर बाद दमकल टीम भी पहुंची। जब आग पर काबू पाया गया तो पता चला दस मजदूर काल का ग्रास बन चुके थे। शुक्रवार की सुबह प्रशासनिक अधिकारियों, सुरक्षा बलों और लोगों का जमावड़ा लग गया।
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मजदूरों की इस बैरक में सौ से अधिक श्रमिक रात को रहते थे, लेकिन वीरवार को 31 दिसंबर और शिफ्ट चेंज होने के कारण रात की छुट्टी थी। रामबन के डीसी, एसएसपी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी देर रात को ही मौके पर पहुंच गए। फायर ब्रिगेड की टीम ने कैंप के श्रमिकों और स्थानीय लोगों की मदद से घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।