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Udhampur News: श्रद्धा व उल्लास संग मनाया तमदेह का पर्व
Mon, 16 Jun 2025 12:26 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Mon, 16 Jun 2025 12:26 AM IST
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तमदेह पर्व पर कोर्ट रोड पर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु। स्रोत : संवाद
- फोटो : udhampur
विभिन्न जगहों पर लगे लंगर, लोगों ने ग्रहण किया प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जम्मू संभाग के अन्य जिलों की तरह उधमपुर में भी डुग्गर प्रदेश में विशेष महत्व रखने वाला तमदेह पर्व रविवार को धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने छबीलें लगाकर राहगीरों को ठंडा और मीठा पानी पिलाया और शहर के विभिन्न हिस्सों में लंगर भी आयोजित किए गए, जिनमें काफी संख्या में लोगों ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया।
नगर के कोर्ट रोड, संबल रोड, आदर्श कालोनी, कल्लर, कशीराह आदि इलाकों में छबील के साथ लंगर का भी आयोजन किया गया था।इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सुबह स्नान कर अपने घरों में पूजा-अर्चना की और फिर पितरों के नाम पर खरीद कर लाए बर्तन, फल व अन्य सामान का दान किया और विवाहित बेटियों, कुल पुरोहित और ब्राह्मणों को भोजन करवाकर सुख समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और यह दिन ऋतु परिवर्तन के रूप में भी मनाया जाता है।
वहीं बुजुर्ग महिला मनोरमा देवी, संतोष कुमारी, बिमला देवी व अन्य ने बताया कि डुग्गर संस्कृति में तमदेह पर्व का खास महत्व है। इस दिन विवाहित बेटियों की मायके में विशेष आवाभगत की जाती है, पकवान बनाकर उनका आदर सत्कार किया जाता है और उन्हें घडे-बर्तन आदि देकर विदा किया जाता है। इस दिन बच्चियां व युवतियां घरों के आंगन में भाईयों और पिता के नाम पर रूह्ट, राहडे स्थापित करती हैं, यह घड़े के मुंह वाला हिस्सा होता है, जिसे जमीन में गाडा जाता है और फिर इसके अंदर मक्की, बाजारा आदि के बीच डाले जाते हैं। एक महीने तक इनकी देखभाल की जाती है। एक माह के बाद संक्रांति के दिन इनका नदी सरोवरों में विसर्जन किया जाता है और इस दिन मेला लगाकर लोग नदी सरोवरों पर एकत्रित होते हैं जिसे डुग्गर प्रदेश में मिंजरे दा मेला नाम से जाता जाता है। लेकिन वर्तमान समय से यह अपनी पहचान खो चुका है और नई पीढ़ी के बेहद कम लोगों को इसके बारे में जानकारी रह गई है।
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उधमपुर। जम्मू संभाग के अन्य जिलों की तरह उधमपुर में भी डुग्गर प्रदेश में विशेष महत्व रखने वाला तमदेह पर्व रविवार को धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने छबीलें लगाकर राहगीरों को ठंडा और मीठा पानी पिलाया और शहर के विभिन्न हिस्सों में लंगर भी आयोजित किए गए, जिनमें काफी संख्या में लोगों ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया।
नगर के कोर्ट रोड, संबल रोड, आदर्श कालोनी, कल्लर, कशीराह आदि इलाकों में छबील के साथ लंगर का भी आयोजन किया गया था।इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सुबह स्नान कर अपने घरों में पूजा-अर्चना की और फिर पितरों के नाम पर खरीद कर लाए बर्तन, फल व अन्य सामान का दान किया और विवाहित बेटियों, कुल पुरोहित और ब्राह्मणों को भोजन करवाकर सुख समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और यह दिन ऋतु परिवर्तन के रूप में भी मनाया जाता है।
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वहीं बुजुर्ग महिला मनोरमा देवी, संतोष कुमारी, बिमला देवी व अन्य ने बताया कि डुग्गर संस्कृति में तमदेह पर्व का खास महत्व है। इस दिन विवाहित बेटियों की मायके में विशेष आवाभगत की जाती है, पकवान बनाकर उनका आदर सत्कार किया जाता है और उन्हें घडे-बर्तन आदि देकर विदा किया जाता है। इस दिन बच्चियां व युवतियां घरों के आंगन में भाईयों और पिता के नाम पर रूह्ट, राहडे स्थापित करती हैं, यह घड़े के मुंह वाला हिस्सा होता है, जिसे जमीन में गाडा जाता है और फिर इसके अंदर मक्की, बाजारा आदि के बीच डाले जाते हैं। एक महीने तक इनकी देखभाल की जाती है। एक माह के बाद संक्रांति के दिन इनका नदी सरोवरों में विसर्जन किया जाता है और इस दिन मेला लगाकर लोग नदी सरोवरों पर एकत्रित होते हैं जिसे डुग्गर प्रदेश में मिंजरे दा मेला नाम से जाता जाता है। लेकिन वर्तमान समय से यह अपनी पहचान खो चुका है और नई पीढ़ी के बेहद कम लोगों को इसके बारे में जानकारी रह गई है।
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