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Udhampur News: आज बंद रहेगी धर्मनगरी, थमेंगे माता वैष्णो देवी के प्राचीन मार्ग पर घोड़ों के खुर, बाणगंगा से मिल्क बार तक दुकानें न खोलने का एलान
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महासंग्राम : ताराकोट-सांझीछत रोपवे के विरोध में संघर्ष समिति की हड़ताल
कटड़ा। माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा में बुधवार को भक्ति के स्वर के साथ-साथ विरोध की गूंज भी सुनाई देगी। धर्मनगरी में प्रस्तावित ताराकोट-सांझीछत रोपवे परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोगों और व्यापारियों का गुस्सा सन्नाटे के रूप में सड़कों पर साफ दिखेगा। श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 18 फरवरी को कटड़ा बंद का आह्वान किया है।
समिति ने स्पष्ट किया है कि यह एक दिन की टोकन स्ट्राइक (सांकेतिक हड़ताल) है। यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा। इस कारण माता वैष्णो देवी के प्राचीन मार्ग पर घोड़ों के खुर थम जाएंगे। पिट्ठू और पालकी संचालक सेवाएं नहीं देंगे। इससे बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दुकानें बंद रहने से यात्रा मार्ग पर रौनक कम होने के आसार हैं।
समिति के बैनर तले मंगलवार को एकजुट हुए प्रतिनिधियों का कहना है कि यह परियोजना केवल एक आधुनिक सुविधा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के चूल्हे बुझाने का फरमान है। समिति के अध्यक्ष बलिराम राणा ने प्रेस वार्ता में तीखे तेवर अपनाते हुए कहा, दशकों से जो घोड़ा चालक, पिट्ठू और छोटे दुकानदार यात्रा मार्ग की रीढ़ रहे हैं, उन्हें इस परियोजना से हाशिए पर धकेल दिया जाएगा। हम अपनी जड़ों और आजीविका की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
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इसके लिए समिति ने व्यापारियों, घोड़ा चालकों, पिट्ठू और पालकी संचालकों से समर्थन मांगा है। शांतिपूर्ण हड़ताल के दौरान बाणगंगा से मिल्क बार तक माता वैष्णो देवी ट्रैक पर स्थित सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। साथ ही यात्रा मार्ग पर घोड़ा, पिट्ठू और पालकी की सुविधाएं ठप रहेंगी। सदस्यों का कहना है कि अगर उप राज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी बात आगे नहीं बढ़ाती है तो जल्द बड़ी रणनीति बनाई जाएगी।
व्यापार मंडल और सामाजिक संगठनों का मिला साथ
समिति का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय लोगों की आजीविका और आस्था से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उसका आरोप है कि परियोजना लागू होने से हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। वर्षों से यात्रा मार्ग पर सेवाएं दे रहे घोड़ा चालक, पिट्ठू, पालकी संचालक और छोटे व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। वहीं व्यापार मंडल और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बंद को समर्थन दे दिया है। उन्होंने प्रशासन से संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की मांग की है।
श्रद्धालुओं के लिए अग्निपरीक्षा जैसा दिन
हर दिन हजारों की संख्या में आने वाले भक्तों के लिए हड़ताल के दौरान यात्रा किसी परीक्षा से कम नहीं होगी। हालांकि, समिति ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में यात्रा मार्ग पर अव्यवस्था फैलने की आशंका है। समिति ने कहा है कि यह कदम आस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि लोगों के हितों की रक्षा के लिए है। समिति के अध्यक्ष बलिराम राणा, करण सिंह, राजेश सदोत्रा, वरुण मल्होत्रा, सोनू ठाकुर, श्याम प्रोच, अश्विनी पंडित, प्रभात सिंह मंगली, रमेश कुमार, सुरेंदर एडवोकेट सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्रवाई पर टिकी निगाहें
बंद को लेकर हलचल तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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कटड़ा। माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा में बुधवार को भक्ति के स्वर के साथ-साथ विरोध की गूंज भी सुनाई देगी। धर्मनगरी में प्रस्तावित ताराकोट-सांझीछत रोपवे परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोगों और व्यापारियों का गुस्सा सन्नाटे के रूप में सड़कों पर साफ दिखेगा। श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 18 फरवरी को कटड़ा बंद का आह्वान किया है।
समिति ने स्पष्ट किया है कि यह एक दिन की टोकन स्ट्राइक (सांकेतिक हड़ताल) है। यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा। इस कारण माता वैष्णो देवी के प्राचीन मार्ग पर घोड़ों के खुर थम जाएंगे। पिट्ठू और पालकी संचालक सेवाएं नहीं देंगे। इससे बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दुकानें बंद रहने से यात्रा मार्ग पर रौनक कम होने के आसार हैं।
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समिति के बैनर तले मंगलवार को एकजुट हुए प्रतिनिधियों का कहना है कि यह परियोजना केवल एक आधुनिक सुविधा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के चूल्हे बुझाने का फरमान है। समिति के अध्यक्ष बलिराम राणा ने प्रेस वार्ता में तीखे तेवर अपनाते हुए कहा, दशकों से जो घोड़ा चालक, पिट्ठू और छोटे दुकानदार यात्रा मार्ग की रीढ़ रहे हैं, उन्हें इस परियोजना से हाशिए पर धकेल दिया जाएगा। हम अपनी जड़ों और आजीविका की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
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इसके लिए समिति ने व्यापारियों, घोड़ा चालकों, पिट्ठू और पालकी संचालकों से समर्थन मांगा है। शांतिपूर्ण हड़ताल के दौरान बाणगंगा से मिल्क बार तक माता वैष्णो देवी ट्रैक पर स्थित सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। साथ ही यात्रा मार्ग पर घोड़ा, पिट्ठू और पालकी की सुविधाएं ठप रहेंगी। सदस्यों का कहना है कि अगर उप राज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी बात आगे नहीं बढ़ाती है तो जल्द बड़ी रणनीति बनाई जाएगी।
व्यापार मंडल और सामाजिक संगठनों का मिला साथ
समिति का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय लोगों की आजीविका और आस्था से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उसका आरोप है कि परियोजना लागू होने से हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। वर्षों से यात्रा मार्ग पर सेवाएं दे रहे घोड़ा चालक, पिट्ठू, पालकी संचालक और छोटे व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। वहीं व्यापार मंडल और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बंद को समर्थन दे दिया है। उन्होंने प्रशासन से संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की मांग की है।
श्रद्धालुओं के लिए अग्निपरीक्षा जैसा दिन
हर दिन हजारों की संख्या में आने वाले भक्तों के लिए हड़ताल के दौरान यात्रा किसी परीक्षा से कम नहीं होगी। हालांकि, समिति ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में यात्रा मार्ग पर अव्यवस्था फैलने की आशंका है। समिति ने कहा है कि यह कदम आस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि लोगों के हितों की रक्षा के लिए है। समिति के अध्यक्ष बलिराम राणा, करण सिंह, राजेश सदोत्रा, वरुण मल्होत्रा, सोनू ठाकुर, श्याम प्रोच, अश्विनी पंडित, प्रभात सिंह मंगली, रमेश कुमार, सुरेंदर एडवोकेट सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्रवाई पर टिकी निगाहें
बंद को लेकर हलचल तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।