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हड़ताल का मिलाजुला रहा असर, दोपहर बाद नहीं चलीं बसें
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उधमपुर। टीएस वजीर की हत्या के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का जिले में मिलाजुला असर रहा। शहर से सुबह के समय रामनगर, पंचैरी, जम्मू व कुछ अन्य रूट के लिए बसें रवाना हुईं। लेकिन दोपहर 12 बजे के बाद बसों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई। इसके बाद यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं बस अड्डा पर बस यूनियन के सदस्यों ने टीएस वजीर को श्रद्धांजलि दी और यूनियन के लिए किए गए कार्यों को याद किया। मेटाडोर यूनियन की तरफ से हड़ताल का समर्थन नहीं किया गया। मेटाडोर की अन्य दिनों की तरह आवाजाही जारी रही।
टीएस वजीर की हत्या के विरोध में ट्रांसपोर्ट यूनियन ने वीरवार को ही हड़ताल का एलान कर दिया था और उधमपुर की बस यूनियन ने हड़ताल को समर्थन देने का एलान किया था। हालांकि शुक्रवार को सुबह के समय रामनगर, जम्मू, पंचैरी, मोंगरी व अन्य कई रूटों के लिए बसें रवाना हुई। जब इसकी जानकारी बस यूनियन को मिली, तो उन्होंने दोपहर 12 बजे के बाद बसों की आवाजाही बंद करवा दिया। इसके बाद यात्री परेशान हो गए।
काफी संख्या में यात्री सफर करने के लिए बस अड्डा पर पहुंचे, लेकिन दोपहर के समय कोई बसें बस अड्डा से नहीं चलीं। घंटों इंतजार करने के बाद यात्री वापस लौट गए। हड़ताल के कारण यात्री चार पहिया वाहनों पर ज्यादा किराया देकर सफर करने को मजबूर रहे। इसी कारण सूमो, टैंपो का काम दिन भर चलता रहा। मेटाडोर यूनियन की तरफ से हड़ताल का समर्थन नहीं दिया गया। इसी कारण मेटाडोर सभी रूट पर आवाजाही करती रही।
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मेटाडोर चलने के कारण लोगों को इतनी ज्यादा परेशानी नहीं हुई। दोपहर के समय बस यूनियन के सदस्य बस अड्डा पर जमा हुए, जहां सभी ने दो मिनट का मौन रख कर टीएस वजीर को श्रद्धांजलि अर्पित की। यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि जब ट्रांसपोर्टरों को कोई परेशानी आई, टीएस वजीर ने हल निकालने के लिए दिन भर काम किया। वह यूनियन के चेयरमैन थे।
उन्होंने कभी भी किसी यूनियन को परेशानी नहीं आने दी। उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद सभी दुखी हैं। उनकी मौत किसने की है और किस कारण से हुई है। इसका अभी तक पता नहीं चला है। इसलिए सभी की मांग है कि उनकी हत्या की सच्चाई का पता लगाया आए और आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।
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टीएस वजीर की हत्या के विरोध में ट्रांसपोर्ट यूनियन ने वीरवार को ही हड़ताल का एलान कर दिया था और उधमपुर की बस यूनियन ने हड़ताल को समर्थन देने का एलान किया था। हालांकि शुक्रवार को सुबह के समय रामनगर, जम्मू, पंचैरी, मोंगरी व अन्य कई रूटों के लिए बसें रवाना हुई। जब इसकी जानकारी बस यूनियन को मिली, तो उन्होंने दोपहर 12 बजे के बाद बसों की आवाजाही बंद करवा दिया। इसके बाद यात्री परेशान हो गए।
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काफी संख्या में यात्री सफर करने के लिए बस अड्डा पर पहुंचे, लेकिन दोपहर के समय कोई बसें बस अड्डा से नहीं चलीं। घंटों इंतजार करने के बाद यात्री वापस लौट गए। हड़ताल के कारण यात्री चार पहिया वाहनों पर ज्यादा किराया देकर सफर करने को मजबूर रहे। इसी कारण सूमो, टैंपो का काम दिन भर चलता रहा। मेटाडोर यूनियन की तरफ से हड़ताल का समर्थन नहीं दिया गया। इसी कारण मेटाडोर सभी रूट पर आवाजाही करती रही।
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मेटाडोर चलने के कारण लोगों को इतनी ज्यादा परेशानी नहीं हुई। दोपहर के समय बस यूनियन के सदस्य बस अड्डा पर जमा हुए, जहां सभी ने दो मिनट का मौन रख कर टीएस वजीर को श्रद्धांजलि अर्पित की। यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि जब ट्रांसपोर्टरों को कोई परेशानी आई, टीएस वजीर ने हल निकालने के लिए दिन भर काम किया। वह यूनियन के चेयरमैन थे।
उन्होंने कभी भी किसी यूनियन को परेशानी नहीं आने दी। उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद सभी दुखी हैं। उनकी मौत किसने की है और किस कारण से हुई है। इसका अभी तक पता नहीं चला है। इसलिए सभी की मांग है कि उनकी हत्या की सच्चाई का पता लगाया आए और आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।