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Udhampur News: नसीब को नसीब नहीं हुई बेटी की विदाई
Mon, 01 May 2023 01:47 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Mon, 01 May 2023 01:47 AM IST
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रियासी। बीते शनिवार रात को तहसील भमाग के कोठरू में हुए सड़क हादसे में भमाग के दो गांवों में मातम पसरा रहा। दिनभर लोग दुर्घटना में मारे गए तीन लोगों के परिवारों से संवेदना जताते रहे। दुर्घटना किसी के परिवार का सहारा छीन ले गई तो किसी घर में खुशी के पलों पर गम का पहाड़ टूटा। शनिवार रात को ईको वाहन नंबर जेके20सी-0599 गहरी खाई में गिरने से वाहन में सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद दोपहर को दो मृतकों का अंतिम संस्कार काली मिट्टी और एक का कडग अंजी खडड स्थित श्मशानघाट में किया गया।
घर जाने के लिए पहचान वाले के साथ किया अंतिम सफर
होल्टीकल्चर विभाग में कार्यरत मोहन चंद पुत्र सुरम चंद निवासी देवीगढ़ शनिवार को कार्यालय से छुट्टी कर पौनी से रियासी पहुंचा और घर जाने के लिए जान पहचान के करनैल के साथ उसके ईको वाहन में बैठा, मगर किसे पता था कि घर जाने के लिए किया गया सफर उसके लिए जिंदगी का अंतिम सफर बन गया। मोहन चंद परिवार में कमाने वाला और उनका पालन पोषण करने वाला एकमात्र सदस्य था। मोहन की 6 बेटियां और उन सब से छोटा एक बेटा है, जो अब बेसहारा हो गए हैं। रविवार को पूरा परिवार बेसुध रहा। गांव के लोग कभी मृतक की पत्नी तो कभी बच्चों को संभालते रहे।
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दो दिन बाद थी बेटी की विदाई
दो-दो दिनों के बाद ही जिस घर से बेटी की डोली की विदाई की जानी थी रविवार को उसी घर से पिता की अर्थी निकली। पिछले कुछ दिनों में जिस घर में विवाह के तराने गाए जा रहे थे रविवार को उसी घर से सिर्फ रूंदन की आवाजें सुनाई दी। दुर्घटना में मारे गए नसीब सिंह पुत्र सोनमल निवासी मोडा कडग पंचायत टोट की बेटी की शादी दो दिन बाद होनी थी। बारीदार होने के कारण नसीब सिंह को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कटड़ा की तरफ से बेटी की शादी के लिए वित्तीय सहायता मिलनी थी, जिसे लेने के लिए वह कटड़ा आया था। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने से उसे चेक नहीं मिल सका। वह वापस घर जाने के लिए रियासी से ईको में बैठा दुर्घटना के बाद उस में नसीब की भी मौत हुई।
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तीन महीन पहले लिया वाहन बना काल
कोठरू में ईको के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उस का चालक करनैल पुत्र तीर्थ निवासी मोडा गुल टोट भी काल का ग्रास बन गया। बताया जाता है कि करनैल ने हाल ही में तीन महीने पहले ही ईको वाहन खरीदा था कभी कभार वह रियासी में आता जाता रहता था। कोई जान पहचान वाला मिलने पर उसे वाहन में बिठा लेता था। करनैल का अंतिम संस्कार काली मिट्टी शमशानघाट में किया गया।
नोट खबर फोटो सहित।
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घर जाने के लिए पहचान वाले के साथ किया अंतिम सफर
होल्टीकल्चर विभाग में कार्यरत मोहन चंद पुत्र सुरम चंद निवासी देवीगढ़ शनिवार को कार्यालय से छुट्टी कर पौनी से रियासी पहुंचा और घर जाने के लिए जान पहचान के करनैल के साथ उसके ईको वाहन में बैठा, मगर किसे पता था कि घर जाने के लिए किया गया सफर उसके लिए जिंदगी का अंतिम सफर बन गया। मोहन चंद परिवार में कमाने वाला और उनका पालन पोषण करने वाला एकमात्र सदस्य था। मोहन की 6 बेटियां और उन सब से छोटा एक बेटा है, जो अब बेसहारा हो गए हैं। रविवार को पूरा परिवार बेसुध रहा। गांव के लोग कभी मृतक की पत्नी तो कभी बच्चों को संभालते रहे।
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दो दिन बाद थी बेटी की विदाई
दो-दो दिनों के बाद ही जिस घर से बेटी की डोली की विदाई की जानी थी रविवार को उसी घर से पिता की अर्थी निकली। पिछले कुछ दिनों में जिस घर में विवाह के तराने गाए जा रहे थे रविवार को उसी घर से सिर्फ रूंदन की आवाजें सुनाई दी। दुर्घटना में मारे गए नसीब सिंह पुत्र सोनमल निवासी मोडा कडग पंचायत टोट की बेटी की शादी दो दिन बाद होनी थी। बारीदार होने के कारण नसीब सिंह को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कटड़ा की तरफ से बेटी की शादी के लिए वित्तीय सहायता मिलनी थी, जिसे लेने के लिए वह कटड़ा आया था। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने से उसे चेक नहीं मिल सका। वह वापस घर जाने के लिए रियासी से ईको में बैठा दुर्घटना के बाद उस में नसीब की भी मौत हुई।
तीन महीन पहले लिया वाहन बना काल
कोठरू में ईको के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उस का चालक करनैल पुत्र तीर्थ निवासी मोडा गुल टोट भी काल का ग्रास बन गया। बताया जाता है कि करनैल ने हाल ही में तीन महीने पहले ही ईको वाहन खरीदा था कभी कभार वह रियासी में आता जाता रहता था। कोई जान पहचान वाला मिलने पर उसे वाहन में बिठा लेता था। करनैल का अंतिम संस्कार काली मिट्टी शमशानघाट में किया गया।
नोट खबर फोटो सहित।