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Udhampur News: आरक्षण बिल लागू होता तो आधी आबादी की बढ़ जाती राजनीतिक भागीदारी
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उधमपुर। संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) पर चल रही चर्चा शुक्रवार को थम गई। अगर आरक्षण बिल लागू होता तो आधी आबादी की राजनीतिक भागीदारी बढ़ जाती लेकिन ऐसा नहीं हो सका। लोकसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाया गया विधेयक रद्द हो गया। सरकार बहुमत हासिल नहीं कर पाई।
इस कारण शहर की महिलाओं का उत्साह कम हो गया। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि विधेयक एक दिन जरूर पारित होगा। सामाजिक संगठनों, गृहिणियों और युवा वर्ग ने कहा कि विधेयक नारी सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। लंबे समय से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है जिस कारण उनके मुद्दों को उतनी प्राथमिकता नहीं मिल पाती थी। ऐसे में विधेयक महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने का सशक्त माध्यम बन सकता था।
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लंबे समय से महिलाएं अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। यह बिल महिलाओं को न केवल राजनीतिक पहचान देता बल्कि उन्हें समाज में अपनी आवाज को मजबूती से रखने का अवसर भी प्रदान कर सकता था। जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होंगी तो समाज के विभिन्न मुद्दों पर संवेदनशील और संतुलित निर्णय लिए जा सकेंगे।
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-राधिका भारद्वाज, गृहिणी
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देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। समय की मांग है कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया जाए और उन्हें नीति निर्माण में शामिल किया जाए। बिल के लागू होने से संसद से पंचायत स्तर तक महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
-एडवोकेट सुहानी कटोच
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ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए बिल महत्वपूर्ण था। पंचायत और ब्लॉक स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से कार्यों में पारदर्शिता आती और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाता।
-आरती शर्मा, पूर्व बीडीसी चेयरमैन, ब्लॉक घोरडी
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विधेयक पास होने से राजनीति में करियर बनाने का मौका मिलता। समाज में बदलाव लाने में महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी को विधेयक का समर्थन करना चाहिए था।
-पायल ठाकुर, छात्रा
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इस कारण शहर की महिलाओं का उत्साह कम हो गया। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि विधेयक एक दिन जरूर पारित होगा। सामाजिक संगठनों, गृहिणियों और युवा वर्ग ने कहा कि विधेयक नारी सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। लंबे समय से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है जिस कारण उनके मुद्दों को उतनी प्राथमिकता नहीं मिल पाती थी। ऐसे में विधेयक महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने का सशक्त माध्यम बन सकता था।
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लंबे समय से महिलाएं अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। यह बिल महिलाओं को न केवल राजनीतिक पहचान देता बल्कि उन्हें समाज में अपनी आवाज को मजबूती से रखने का अवसर भी प्रदान कर सकता था। जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होंगी तो समाज के विभिन्न मुद्दों पर संवेदनशील और संतुलित निर्णय लिए जा सकेंगे।
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-राधिका भारद्वाज, गृहिणी
देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। समय की मांग है कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया जाए और उन्हें नीति निर्माण में शामिल किया जाए। बिल के लागू होने से संसद से पंचायत स्तर तक महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
-एडवोकेट सुहानी कटोच
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए बिल महत्वपूर्ण था। पंचायत और ब्लॉक स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से कार्यों में पारदर्शिता आती और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाता।
-आरती शर्मा, पूर्व बीडीसी चेयरमैन, ब्लॉक घोरडी
विधेयक पास होने से राजनीति में करियर बनाने का मौका मिलता। समाज में बदलाव लाने में महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी को विधेयक का समर्थन करना चाहिए था।
-पायल ठाकुर, छात्रा