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लाली-बरयोत में पहले पेड़ और पहाड़ पर चढ़ो फिर फोन पर बात करो
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उधमपुर। 21वीं सदी में जहां देश-दुनिया में 5जी नेट की बात हो रही है वहीं, उधमपुर जिले के मोंगरी तहसील के लाली और वरेयोत ऐसे इलाके हैं जहां के लोगोें के पास मोबाइल तो हैं, लेकिन सिगनल नहीं होने के कारण वह सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। लोगों को एक-दूसरे से बात करने लिए पेड़ और पहाड़ी पर चढ़ कर सिगनल खोजना पड़ता है। इससे प्रदेश में कम्यूनिकेशन सुविधा की पोल खुल रही है, जो कि चिंताजनक बात है। इसका खामियाजा मौजूदा समय में बच्चे भुगत रहे हैं। उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि 4जी और 5जी के दौर में करीब छह हजार से ज्यादा की आबादी रोजमर्रा की जानकारियों से महरूम हैं। कॉल करने के लिए मोबाइल टॉवर को जगह-जगह ढूंढना पड़ता है। ऐसे में कभी-कभी टावर को पाने के लिए पेड़ के ऊपर तो कभी पहाड़ी के ऊपर चढ़ना पड़ता है। कई बार रात को इमरजेंसी के दौरान लोगों को जंगल में सिगनल ढूंढते देखा गया है।
बरयोत, लाली, साढ़ी, थाटाकोट, रधनोत, पांरड, खलाट, सेरगली जैसे एरिया में सिगनल की समस्या है। लोगों को कॉल करने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इन क्षेत्रों की जनसंख्या छह हजार से ज्यादा है। इस मामले को लेकर कई बार उच्च स्तर पर बात की गई है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकलला है।
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- बिमला देवी, बीडीसी चेयरमैन, मोंगरी
10वीं में पढ़ता हूं। करीब 4 माह से जहां हर ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है, लेकिन सिगनल नहीं होने से शिक्षकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। पता नहीं अब क्या पढ़ाया जा रहा है। कई बार स्कूल के शिक्षकों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सरकार से अपील है कि जल्द सिगनल की समस्या को हल किया जाए।
-योगेश सिंह, निवासी लाली
तकनीक के युग में बिना मोबाइल सिगनल के अकेला महसूस कर रहे हैं। टॉवर नहीं होने से कोई भी सूचना समय पर नहीं मिल पा रही है। किसी की मौत या किसी को कोई खबर पहुंचाने का काम आवाज लगा कर ही होता है। यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। इसलिए उपराज्यपाल समस्या को दूर करने के लिए जल्द कदम उठाएं।
-जगदेव सिंह, बरेयोत निवासी
मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं होने से सबसे ज्यादा विद्यार्थी वर्ग का हो रहा है। इलाके के ज्यादातर बच्चे कोरोना वायरस के वजह से गांव में लौट आए हैं। इंटरनेट व कॉलिंग नहीं होने की वजह से न तो बच्चों को स्कूलों के अध्यापकों से पता चल पा रहा है कि क्या पढ़ाई करनी है और न ही इंटरनेट से पढ़ाई हो पा रही है।
-राजेश सिंह
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लोगों का कहना है कि 4जी और 5जी के दौर में करीब छह हजार से ज्यादा की आबादी रोजमर्रा की जानकारियों से महरूम हैं। कॉल करने के लिए मोबाइल टॉवर को जगह-जगह ढूंढना पड़ता है। ऐसे में कभी-कभी टावर को पाने के लिए पेड़ के ऊपर तो कभी पहाड़ी के ऊपर चढ़ना पड़ता है। कई बार रात को इमरजेंसी के दौरान लोगों को जंगल में सिगनल ढूंढते देखा गया है।
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बरयोत, लाली, साढ़ी, थाटाकोट, रधनोत, पांरड, खलाट, सेरगली जैसे एरिया में सिगनल की समस्या है। लोगों को कॉल करने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इन क्षेत्रों की जनसंख्या छह हजार से ज्यादा है। इस मामले को लेकर कई बार उच्च स्तर पर बात की गई है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकलला है।
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- बिमला देवी, बीडीसी चेयरमैन, मोंगरी
10वीं में पढ़ता हूं। करीब 4 माह से जहां हर ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है, लेकिन सिगनल नहीं होने से शिक्षकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। पता नहीं अब क्या पढ़ाया जा रहा है। कई बार स्कूल के शिक्षकों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सरकार से अपील है कि जल्द सिगनल की समस्या को हल किया जाए।
-योगेश सिंह, निवासी लाली
तकनीक के युग में बिना मोबाइल सिगनल के अकेला महसूस कर रहे हैं। टॉवर नहीं होने से कोई भी सूचना समय पर नहीं मिल पा रही है। किसी की मौत या किसी को कोई खबर पहुंचाने का काम आवाज लगा कर ही होता है। यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। इसलिए उपराज्यपाल समस्या को दूर करने के लिए जल्द कदम उठाएं।
-जगदेव सिंह, बरेयोत निवासी
मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं होने से सबसे ज्यादा विद्यार्थी वर्ग का हो रहा है। इलाके के ज्यादातर बच्चे कोरोना वायरस के वजह से गांव में लौट आए हैं। इंटरनेट व कॉलिंग नहीं होने की वजह से न तो बच्चों को स्कूलों के अध्यापकों से पता चल पा रहा है कि क्या पढ़ाई करनी है और न ही इंटरनेट से पढ़ाई हो पा रही है।
-राजेश सिंह