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Udhampur News: लोअर संगूर में सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद होने के विरोध में प्रदर्शन
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लोअर संगूर में सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद होने पर प्रदर्शन करते स्थानीय लोग।
- लोगों ने शिक्षा विभाग के खिलाफ जताया रोष, बोले-अब हमारे छोटे-छोटे बच्चे कहां पढ़ेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। लोअर संगूर में सरकारी प्राइमरी स्कूल को बंद करने के विरोध में लोगों ने मंगलवार को शिक्षा विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने स्कूल को दोबारा खोलने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्कूल बंद होने के बाद अब उनके छोटे-छोटे बच्चे कहां पढ़ेंगे।
स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने वाली कुक दर्शना देवी ने बताया कि स्कूल की शिक्षक उन्हें बिना बताए ही सोमवार को स्कूल में पड़ा सारा सामान लेकर चले गए। 2001 में क्षेत्र में प्राइमरी स्कूल खोला गया था। लोगों के मुताबिक मौजूदा समय में 25 से 30 बच्चे स्कूल में शिक्षा हासिल कर रहे थे। स्कूल बंद होने से अब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि इस मोहल्ले में ज्यादातर आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार रहते हैं। महिलाएं लोगों के घरों में काम कर किसी तरह परिवार का पालन पोषण करती हैं। ज्यादातर महिलाएं लोगों के घरों में काम करने के लिए सुबह चली जाती हैं। इनके बच्चों को दूसरा स्कूल काफी दूर पड़ता है।
समाज सेवक गोविंद चलोत्रा का आरोप है कि कुक और एक शिक्षक में आपसी विवाद के चलते शिक्षकों ने स्कूल को बंद कर दिया है। स्कूल में बेहतरीन कमरा है और शौचालय भी बना हुआ है। क्षेत्र के लोग काफी समय से स्कूल को अपग्रेड कर मिडिल बनाने की मांग करते आ रहे हैं। जबकि इसका दर्जा बढ़ाने के बजाये स्कूल ही बंद कर दिया गया। वह विभाग से मांग करते हैं कि बंद किया गया स्कूल दोबारा खोला जाए।
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कोट...
स्कूल को बंद नहीं किया गया है। बच्चों ने अपने टीसी ले लिए हैं। अब स्कूल में पढ़ने के लिए बच्चे नहीं हैं इसलिए शिक्षकों को दूसरे स्कूल में लगाया गया है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 12 थी। टीसी लेने के बाद स्कूल में अब बच्चों की संख्या शून्य है। अगर स्कूल में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो फिर से स्कूल को खोल कर शिक्षकों को वापस भेज दिया जाएगा।
-कल्पना जसरोटिया, उप मुख्य शिक्षा अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। लोअर संगूर में सरकारी प्राइमरी स्कूल को बंद करने के विरोध में लोगों ने मंगलवार को शिक्षा विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने स्कूल को दोबारा खोलने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्कूल बंद होने के बाद अब उनके छोटे-छोटे बच्चे कहां पढ़ेंगे।
स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने वाली कुक दर्शना देवी ने बताया कि स्कूल की शिक्षक उन्हें बिना बताए ही सोमवार को स्कूल में पड़ा सारा सामान लेकर चले गए। 2001 में क्षेत्र में प्राइमरी स्कूल खोला गया था। लोगों के मुताबिक मौजूदा समय में 25 से 30 बच्चे स्कूल में शिक्षा हासिल कर रहे थे। स्कूल बंद होने से अब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि इस मोहल्ले में ज्यादातर आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार रहते हैं। महिलाएं लोगों के घरों में काम कर किसी तरह परिवार का पालन पोषण करती हैं। ज्यादातर महिलाएं लोगों के घरों में काम करने के लिए सुबह चली जाती हैं। इनके बच्चों को दूसरा स्कूल काफी दूर पड़ता है।
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समाज सेवक गोविंद चलोत्रा का आरोप है कि कुक और एक शिक्षक में आपसी विवाद के चलते शिक्षकों ने स्कूल को बंद कर दिया है। स्कूल में बेहतरीन कमरा है और शौचालय भी बना हुआ है। क्षेत्र के लोग काफी समय से स्कूल को अपग्रेड कर मिडिल बनाने की मांग करते आ रहे हैं। जबकि इसका दर्जा बढ़ाने के बजाये स्कूल ही बंद कर दिया गया। वह विभाग से मांग करते हैं कि बंद किया गया स्कूल दोबारा खोला जाए।
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स्कूल को बंद नहीं किया गया है। बच्चों ने अपने टीसी ले लिए हैं। अब स्कूल में पढ़ने के लिए बच्चे नहीं हैं इसलिए शिक्षकों को दूसरे स्कूल में लगाया गया है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 12 थी। टीसी लेने के बाद स्कूल में अब बच्चों की संख्या शून्य है। अगर स्कूल में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो फिर से स्कूल को खोल कर शिक्षकों को वापस भेज दिया जाएगा।
-कल्पना जसरोटिया, उप मुख्य शिक्षा अधिकारी