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सद्दल त्रासदी की सातवीं बरसी पर विस्थापितों ने परिजनों को किया याद
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उधमपुर/पंचैरी। सद्दल त्रासदी का जिक्र होते ही आज भी रौंगटे खड़े हो जाते हैं। सात साल पहले छह सितंबर, 2014 को पूरा गांव भूस्खलन की चपेट में आकर मलबे में तब्दील हो गया था। इसमें 40 लोग जिंदा दफन हो गए थे। त्रासदी की सातवीं बरसी पर सोमवार सुबह मृतकों के परिजनों ने मौके पर पहुंच कर पूजन कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उधर, सात साल बाद भी त्रासदी का दंश झेल रहे 132 विस्थापित परिवारों को आज भी आशियाना नहीं मिला है, जिसका उनमें काफी रोष है।
छह सितंबर, 2014 की सुबह भारी बारिश के बीच मोंगरी तहसील की पंजर पंचायत के सद्दल गांव का अस्तित्व भूस्खलन की जद में आकर मिट गया था। इसमें 40 लोग जिंदा दफन हो गए। अभी भी कुछ शवों की तलाश जारी है। एक पल में 132 परिवार पूरी तरह से बेघर हो गए, जिन्हें घरों से जरूरत का सामान निकालने तक का समय नहीं मिला। सरकार व प्रशासन ने प्रभावितों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक इनका पुनर्वास नहीं हो पाया है। सरकार और अदालत की तरफ से लगातार विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर आदेश जारी किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो सका है।
जल्द पुनर्वास की उठाई मांग
45 परिवार सात वर्ष से सुई इलाके में आपदा प्रबंधन की इमारत में और 87 परिवार पंजर पंचायत में सरकारी राहत का इंतजार कर रहे हैं। इनका कहना था कि सरकार को विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर जल्द काम करना चाहिए। विस्थापित परिवारों का कहना है कि छह सितंबर, 2014 की सुबह आज भी याद है जब पलक झपकते ही पूरा गांव मलबे में तब्दील हो गया था। मृतकों के परिजन सोमवार को सद्दल गांव पहुंचे और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कई लोगों की आंखें अपनों की याद में नम हो गईं।
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छह सितंबर, 2014 की सुबह भारी बारिश के बीच मोंगरी तहसील की पंजर पंचायत के सद्दल गांव का अस्तित्व भूस्खलन की जद में आकर मिट गया था। इसमें 40 लोग जिंदा दफन हो गए। अभी भी कुछ शवों की तलाश जारी है। एक पल में 132 परिवार पूरी तरह से बेघर हो गए, जिन्हें घरों से जरूरत का सामान निकालने तक का समय नहीं मिला। सरकार व प्रशासन ने प्रभावितों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक इनका पुनर्वास नहीं हो पाया है। सरकार और अदालत की तरफ से लगातार विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर आदेश जारी किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो सका है।
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जल्द पुनर्वास की उठाई मांग
45 परिवार सात वर्ष से सुई इलाके में आपदा प्रबंधन की इमारत में और 87 परिवार पंजर पंचायत में सरकारी राहत का इंतजार कर रहे हैं। इनका कहना था कि सरकार को विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर जल्द काम करना चाहिए। विस्थापित परिवारों का कहना है कि छह सितंबर, 2014 की सुबह आज भी याद है जब पलक झपकते ही पूरा गांव मलबे में तब्दील हो गया था। मृतकों के परिजन सोमवार को सद्दल गांव पहुंचे और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कई लोगों की आंखें अपनों की याद में नम हो गईं।
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