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Udhampur News: अभिभावकों का आरोप, बच्चे रोजाना स्कूल से 500 मीटर दूर से ला रहे पीने के लिए पानी
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रामनगर। स्कूल जाते समय घरों से पानी की बोतले और कंधों पर गैलन उठाए छात्र।
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- रामनगर की पंचायत बाड़ी में मौजूद सरकारी मिडिल स्कूल गुजाल में पेयजल की व्यवस्था नहीं
- ग्रामीण बोले-नल तो लगे हैं, पानी की एक बूंद नहीं आती, व्यवस्था में सुधार न हुआ तो करेंगे प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामनगर। पंचायत बाड़ी में सरकारी मिडिल स्कूल गुजाल में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। इससे विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि उनके बच्चे रोजाना पैदल चलकर स्कूल से 500 मीटर दूर स्थित बावली से पानी लाते हैं। पहाड़ी रास्ता होने के कारण आने-जाने में लगभग एक घंटा लग जाता है, उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बच्चों के अभिभावक कई बार शिक्षा विभाग, जिला आयुक्त व एसडीम रामनगर को समस्या से अवगत करवा चुके हैं, इसके बावजूद स्कूल में पेयजल आपूर्ति का प्रबंध नहीं हो पाया। पंचायत बाड़ी मोडा गुजाल में सरकारी मिडिल स्कूल 1977 में बना था। 48 वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग पीने का पानी छात्रों को उपलब्ध नहीं करवा सका। स्कूल में तैयार होने वाले मिड-डे मील में भी जो पानी इस्तेमाल होता है, वे बच्चे बावलियों से ढोकर लाते हैं। जबकि शिक्षा विभाग कुंभकरण की नींद सोया हुआ है।
बच्चों के अभिभावक संजय सिंह, ख्याल सिंह, कुलदीप सिंह, कृष्ण लाल, करतार चंद, विमला देवी, मधु रानी, सूरज सिंह, देवराज, रीता देवी आदि ने बताया कि बच्चे घरों से बोतल में पानी लेकर स्कूल जाते हैं। जब स्कूल में पीने का पानी खत्म हो जाता है तो उन्हें स्कूल से 500 मीटर दूर बनी बावलियों से पानी भरकर लाना पड़ता है। स्कूल की ओर से बावली पर बड़े छात्रों को भेजा जाता है ताकि कोई हादसा न हो। उन्होंने सवाल किया कि अगर बावली पर कोई हादसा पेश आया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
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अभिभावकों ने बताया स्कूल परिसर में जल शक्ति विभाग की ओर से 2010 में पानी की पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन 15 वर्ष बीत जाने के बाद स्कूल में लगे नल में पानी नहीं आया। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग को जल्द संज्ञान लेने की मांग की है। जल शक्ति विभाग को भी चेतावनी दी अगर जल्द से जल्द स्कूल में पानी की आपूर्ति शुरू न हुई तो विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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अभिभावक संजय सिंह ने बताया कि पानी की समस्या स्कूल में शुरू से ही है। 2003 में जब हम इस स्कूल में पढ़ते थे तो तब भी यहां पानी नहीं था। हम पीने के लिए पानी बावलियों से ढोकर लाते थे, अफसोस की बात है कि अब तक व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया। उन्होंने शिक्षा विभाग से स्कूल में जल्द पानी की समस्या दूर करने की मांग की है।
मैंने खुद जिला आयुक्त को समस्या से अवगत करवाया था : जगदीश कुमार
स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने वाले जगदीश सिंह ने बताया कि जबसे स्कूल में मिड-डे मील योजना लागू हुई, तब से लेकर आज तक पानी बावली से ही आ रहा है। नल तो लगे हैं मगर पानी की बूंद नहीं आती। खाना बनाने के लिए रोजाना बावलियों से पानी लाना पड़ रहा है। अगर बावली भी नहीं होती तो बच्चों के लिए खाना बनाना मुश्किल हो जाता। तीन माह पहले उन्होंने खुद जिला आयुक्त को पानी की समस्या से अवगत करवाया था लेकिन समस्या नहीं हो पाया।
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गांव के पूर्व पंच प्रीतम पंगोत्रा ने बताया कि पानी की समस्या को लेकर वह कई बार संबंधित विभाग को बता चुके हैं लेकिन अभी तक बच्चे जान जोखिम में डालकर बावली से पानी ला रहे हैं। शिक्षा विभाग को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि बच्चों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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- ग्रामीण बोले-नल तो लगे हैं, पानी की एक बूंद नहीं आती, व्यवस्था में सुधार न हुआ तो करेंगे प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामनगर। पंचायत बाड़ी में सरकारी मिडिल स्कूल गुजाल में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। इससे विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि उनके बच्चे रोजाना पैदल चलकर स्कूल से 500 मीटर दूर स्थित बावली से पानी लाते हैं। पहाड़ी रास्ता होने के कारण आने-जाने में लगभग एक घंटा लग जाता है, उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बच्चों के अभिभावक कई बार शिक्षा विभाग, जिला आयुक्त व एसडीम रामनगर को समस्या से अवगत करवा चुके हैं, इसके बावजूद स्कूल में पेयजल आपूर्ति का प्रबंध नहीं हो पाया। पंचायत बाड़ी मोडा गुजाल में सरकारी मिडिल स्कूल 1977 में बना था। 48 वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग पीने का पानी छात्रों को उपलब्ध नहीं करवा सका। स्कूल में तैयार होने वाले मिड-डे मील में भी जो पानी इस्तेमाल होता है, वे बच्चे बावलियों से ढोकर लाते हैं। जबकि शिक्षा विभाग कुंभकरण की नींद सोया हुआ है।
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बच्चों के अभिभावक संजय सिंह, ख्याल सिंह, कुलदीप सिंह, कृष्ण लाल, करतार चंद, विमला देवी, मधु रानी, सूरज सिंह, देवराज, रीता देवी आदि ने बताया कि बच्चे घरों से बोतल में पानी लेकर स्कूल जाते हैं। जब स्कूल में पीने का पानी खत्म हो जाता है तो उन्हें स्कूल से 500 मीटर दूर बनी बावलियों से पानी भरकर लाना पड़ता है। स्कूल की ओर से बावली पर बड़े छात्रों को भेजा जाता है ताकि कोई हादसा न हो। उन्होंने सवाल किया कि अगर बावली पर कोई हादसा पेश आया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
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अभिभावकों ने बताया स्कूल परिसर में जल शक्ति विभाग की ओर से 2010 में पानी की पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन 15 वर्ष बीत जाने के बाद स्कूल में लगे नल में पानी नहीं आया। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग को जल्द संज्ञान लेने की मांग की है। जल शक्ति विभाग को भी चेतावनी दी अगर जल्द से जल्द स्कूल में पानी की आपूर्ति शुरू न हुई तो विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
अभिभावक संजय सिंह ने बताया कि पानी की समस्या स्कूल में शुरू से ही है। 2003 में जब हम इस स्कूल में पढ़ते थे तो तब भी यहां पानी नहीं था। हम पीने के लिए पानी बावलियों से ढोकर लाते थे, अफसोस की बात है कि अब तक व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया। उन्होंने शिक्षा विभाग से स्कूल में जल्द पानी की समस्या दूर करने की मांग की है।
मैंने खुद जिला आयुक्त को समस्या से अवगत करवाया था : जगदीश कुमार
स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने वाले जगदीश सिंह ने बताया कि जबसे स्कूल में मिड-डे मील योजना लागू हुई, तब से लेकर आज तक पानी बावली से ही आ रहा है। नल तो लगे हैं मगर पानी की बूंद नहीं आती। खाना बनाने के लिए रोजाना बावलियों से पानी लाना पड़ रहा है। अगर बावली भी नहीं होती तो बच्चों के लिए खाना बनाना मुश्किल हो जाता। तीन माह पहले उन्होंने खुद जिला आयुक्त को पानी की समस्या से अवगत करवाया था लेकिन समस्या नहीं हो पाया।
गांव के पूर्व पंच प्रीतम पंगोत्रा ने बताया कि पानी की समस्या को लेकर वह कई बार संबंधित विभाग को बता चुके हैं लेकिन अभी तक बच्चे जान जोखिम में डालकर बावली से पानी ला रहे हैं। शिक्षा विभाग को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि बच्चों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।