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Udhampur News: पीएचसी मौंगरी में महिला विशेषज्ञ नहीं
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उधमपुर के कस्बे मोंगरी में मौजूद पीएचसी।
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आयुर्वेदिक डाॅक्टर करवा रहे गर्भवतियों के प्रसव
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के कई दावे किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे परे है।
आलम यह है कि महिला विशेषज्ञ या एमबीबीएस डाॅक्टर न होने के कारण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) मौंगरी में भारतीय चिकित्सा पद्धति (आईएसएम/आयुष) से आयुर्वेदिक डाॅक्टर ही गर्भवतियों के प्रसव भी करवा रहे हैं।
अगर प्रसव के दौरान कोई महिला गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे फौरन जीएमसी उधमपुर रेफर कर दिया जाता है। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
मौंगरी में बने पीएचसी में एमबीबीएस डाॅक्टर के दो पद सृजित हैं लेकिन पिछले काफी लंबे समय से यह दोनों पद खाली हैं। इस कारण सेंटर में आने वाले मरीजों के स्वास्थ्य की देखभाल दो आयुर्वेदिक डाॅक्टरों के सहारे ही की जा रही है।
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विभागीय अधिकारियों का दावा है कि आयुर्वेदिक डाॅक्टरों को सुरक्षित प्रसव का भी प्रशिक्षण दिया गया है। इससे असंतुष्ट स्थानीय लोगों ने विभाग और सरकार से कई बार खाली पद भरने की मांग की है लेकिन आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला।
रोजाना होती से 50 से अधिक ओपीडी
इस पीएचसी में हर माह करीब आठ-नौ गर्भवतियों के प्रसव होते हैं। क्षेत्र के साथ लगते आसपास के इलाकों से करीब 50 लोग इलाज के लिए रोजाना ओपीडी में पहुंचते हैं। इनमें से अधिकतर महिलाएं होती हैं। वहां महिला विशेषज्ञ डाॅक्टर न होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
-कोट-
पीएचसी मौंगरी में डाॅक्टरों की तैनाती के लिए सरकार और अपने उच्च अधिकारियों को लिखित में भेजा गया है। इस सेंटर में दो एमबीबीएस और आईएसएम डाॅक्टरों के पद सृजित हैं, जिनमें से आईएसएम डाॅक्टर के पद भरे हैं जबकि एमबीबीएस का एक भी डाॅक्टर इस सेंटर में नहीं है। उम्मीद है कि जल्द ही विभाग की ओर से इस सेंटर में डाॅक्टरों की कमी को पूरा कर दिया जाएगा। - डॉ. शफाकत जरगर, बीएमओ, पंचेरी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के कई दावे किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे परे है।
आलम यह है कि महिला विशेषज्ञ या एमबीबीएस डाॅक्टर न होने के कारण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) मौंगरी में भारतीय चिकित्सा पद्धति (आईएसएम/आयुष) से आयुर्वेदिक डाॅक्टर ही गर्भवतियों के प्रसव भी करवा रहे हैं।
अगर प्रसव के दौरान कोई महिला गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे फौरन जीएमसी उधमपुर रेफर कर दिया जाता है। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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मौंगरी में बने पीएचसी में एमबीबीएस डाॅक्टर के दो पद सृजित हैं लेकिन पिछले काफी लंबे समय से यह दोनों पद खाली हैं। इस कारण सेंटर में आने वाले मरीजों के स्वास्थ्य की देखभाल दो आयुर्वेदिक डाॅक्टरों के सहारे ही की जा रही है।
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विभागीय अधिकारियों का दावा है कि आयुर्वेदिक डाॅक्टरों को सुरक्षित प्रसव का भी प्रशिक्षण दिया गया है। इससे असंतुष्ट स्थानीय लोगों ने विभाग और सरकार से कई बार खाली पद भरने की मांग की है लेकिन आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला।
रोजाना होती से 50 से अधिक ओपीडी
इस पीएचसी में हर माह करीब आठ-नौ गर्भवतियों के प्रसव होते हैं। क्षेत्र के साथ लगते आसपास के इलाकों से करीब 50 लोग इलाज के लिए रोजाना ओपीडी में पहुंचते हैं। इनमें से अधिकतर महिलाएं होती हैं। वहां महिला विशेषज्ञ डाॅक्टर न होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
-कोट-
पीएचसी मौंगरी में डाॅक्टरों की तैनाती के लिए सरकार और अपने उच्च अधिकारियों को लिखित में भेजा गया है। इस सेंटर में दो एमबीबीएस और आईएसएम डाॅक्टरों के पद सृजित हैं, जिनमें से आईएसएम डाॅक्टर के पद भरे हैं जबकि एमबीबीएस का एक भी डाॅक्टर इस सेंटर में नहीं है। उम्मीद है कि जल्द ही विभाग की ओर से इस सेंटर में डाॅक्टरों की कमी को पूरा कर दिया जाएगा। - डॉ. शफाकत जरगर, बीएमओ, पंचेरी।