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Udhampur News: विश्व शांति के लिए शुरू हुआ शतचंडी महायज्ञ संपन्न, हजारों ने डाली आहुति
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माता वैष्णो देवी के दर्शन करने आए भक्तों ने प्रसाद पाया
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। धर्मनगरी के दुर्गा भवन में जारी 44वां शतचंडी महायज्ञ रविवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। हर वर्ष मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाले शतचंडी महायज्ञ में हजारों स्थानीय निवासियों और देश भर से मां वैष्णो देवी के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया। मौके पर विभिन्न पार्टियों के नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी हाजिरी लगाई।
यज्ञ समिति कटड़ा के प्रधान राकेश दुबे, सदस्य जीत लाल शर्मा, राजेंद्र मेंगी,अशोक कुमार सुमोत्रा, पंडित देवदत्त, रोशनलाल सदोत्रा, नगरपालिका अध्यक्ष विमल इंदु, श्यामलाल परोच, आदि ने बताया कि विश्व में सुख शांति व माता वैष्णो देवी यात्रा में बढ़ोतरी को लेकर बुजुर्गों ने यह विशाल शतचंडी महायज्ञ शुरू किया था। पहले यह यज्ञ मां वैष्णो देवी के भवन पर आयोजित किया जाता था। समय के साथ माता की यात्रा में बढ़ोतरी होने लगी तो 80 के दशक में इसे कटड़ा में आयोजित किया जाने लगा।
बताया कि मकर संक्रांति पर इस दौरान प्रकांड पंडितों द्वारा लगातार यज्ञ और पूजा की जाती है। उधर, रविवार को पूर्ण आहुति के बाद यज्ञ का समापन हुआ। इसके बाद कन्या पूजन किया गया, और भंडारे का आयोजन हुआ। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। यज्ञ को सफल बनाने में नगरवासियों ने भी सहयोग किया।
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कटड़ा। धर्मनगरी के दुर्गा भवन में जारी 44वां शतचंडी महायज्ञ रविवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। हर वर्ष मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाले शतचंडी महायज्ञ में हजारों स्थानीय निवासियों और देश भर से मां वैष्णो देवी के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया। मौके पर विभिन्न पार्टियों के नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी हाजिरी लगाई।
यज्ञ समिति कटड़ा के प्रधान राकेश दुबे, सदस्य जीत लाल शर्मा, राजेंद्र मेंगी,अशोक कुमार सुमोत्रा, पंडित देवदत्त, रोशनलाल सदोत्रा, नगरपालिका अध्यक्ष विमल इंदु, श्यामलाल परोच, आदि ने बताया कि विश्व में सुख शांति व माता वैष्णो देवी यात्रा में बढ़ोतरी को लेकर बुजुर्गों ने यह विशाल शतचंडी महायज्ञ शुरू किया था। पहले यह यज्ञ मां वैष्णो देवी के भवन पर आयोजित किया जाता था। समय के साथ माता की यात्रा में बढ़ोतरी होने लगी तो 80 के दशक में इसे कटड़ा में आयोजित किया जाने लगा।
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बताया कि मकर संक्रांति पर इस दौरान प्रकांड पंडितों द्वारा लगातार यज्ञ और पूजा की जाती है। उधर, रविवार को पूर्ण आहुति के बाद यज्ञ का समापन हुआ। इसके बाद कन्या पूजन किया गया, और भंडारे का आयोजन हुआ। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। यज्ञ को सफल बनाने में नगरवासियों ने भी सहयोग किया।
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