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Udhampur News: मकर संक्रांति को बंद होंगे मंदिर के कपाट
Mon, 13 Jan 2025 01:03 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Mon, 13 Jan 2025 01:03 AM IST
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माता मचैल का भवन मकर संक्राति को तीन माह के लिए बंद होगा। संवाद
- फोटो : kishatwad
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माता की प्रतिमा को मुख्य मंदिर से उठाकर गांव के मंदिर में किया जाएगा स्थापित
किश्तवाड़। जिला किश्तवाड़ के चंडी माता मचैल भवन के कपाट ठीक दो दिन के बाद मकर संक्रांति पर तीन माह के लिए यानि बैसाखी पर्व तक बंद हो जाएगा। प्राचीन समय से यह रीति चली आ रही है कि मकर संक्रांति की सुबह माता की प्रतिमा को मुख्य मंदिर से उठाकर गांव के ही
एक छोटे काली माता मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
इस दौरान भारी संख्या में लोग उपस्थित होते हैं। ढोल नगाड़ों के साथ मूर्ति को मंदिर के पुजारी उठाकर स्थापित करते हैं। लगातार मंदिर में यात्री दर्शन करने आ रहे हैं। मात्र इतना है कि अब मुख्य मंदिर में पूजा नहीं होगी परंतु गांव के छोटे मंदिर में पूजा होती रहेगी। तब से लगातार हालांकि इन दिनों उतनी बर्फ नहीं होती है फिर भी मूर्ति को उठाकर गांव में पहलवान नामक स्थानीय निवासी की छत पर बने माता काली के छोटे मंदिर में रखा जाता है। हर वर्ष बेसाखी के पर्व पर दोबारा मुख्य मंदिर में मूर्ति को रखा जाता है।
माता स्थानीय निवासियों पर मेहरबान हैं। हर वर्ष लाखों यात्री माता चंडी के दर्शन करने आते हैं। मंदिर के बहाने ही सही परंतु सड़क तो बन रही है। इस साल चिशोती गांव तक वाहन गए थे। अब मां की कृपा रही तो हमूरी गांव तक वाहन जाएंगे, जहां से मात्र एक घंटा या आधा घंटे का सफर यात्रियों के लिए रहेगा।
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इसके लिए चिशोती गांव में पुल बनना है जानकारी मिली है कि ठेकेदार ने काम नहीं किया। क्या कारण है अभी पता नहीं चला है। स्थानीय निवासियों सहित डीडीसी सदस्य हरीकृष्ण ने कहा कि जिला प्रशासन को चाहिए कि ठेकेदार से काम करवाएं या फिर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। संवाद
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किश्तवाड़। जिला किश्तवाड़ के चंडी माता मचैल भवन के कपाट ठीक दो दिन के बाद मकर संक्रांति पर तीन माह के लिए यानि बैसाखी पर्व तक बंद हो जाएगा। प्राचीन समय से यह रीति चली आ रही है कि मकर संक्रांति की सुबह माता की प्रतिमा को मुख्य मंदिर से उठाकर गांव के ही
एक छोटे काली माता मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
इस दौरान भारी संख्या में लोग उपस्थित होते हैं। ढोल नगाड़ों के साथ मूर्ति को मंदिर के पुजारी उठाकर स्थापित करते हैं। लगातार मंदिर में यात्री दर्शन करने आ रहे हैं। मात्र इतना है कि अब मुख्य मंदिर में पूजा नहीं होगी परंतु गांव के छोटे मंदिर में पूजा होती रहेगी। तब से लगातार हालांकि इन दिनों उतनी बर्फ नहीं होती है फिर भी मूर्ति को उठाकर गांव में पहलवान नामक स्थानीय निवासी की छत पर बने माता काली के छोटे मंदिर में रखा जाता है। हर वर्ष बेसाखी के पर्व पर दोबारा मुख्य मंदिर में मूर्ति को रखा जाता है।
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माता स्थानीय निवासियों पर मेहरबान हैं। हर वर्ष लाखों यात्री माता चंडी के दर्शन करने आते हैं। मंदिर के बहाने ही सही परंतु सड़क तो बन रही है। इस साल चिशोती गांव तक वाहन गए थे। अब मां की कृपा रही तो हमूरी गांव तक वाहन जाएंगे, जहां से मात्र एक घंटा या आधा घंटे का सफर यात्रियों के लिए रहेगा।
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इसके लिए चिशोती गांव में पुल बनना है जानकारी मिली है कि ठेकेदार ने काम नहीं किया। क्या कारण है अभी पता नहीं चला है। स्थानीय निवासियों सहित डीडीसी सदस्य हरीकृष्ण ने कहा कि जिला प्रशासन को चाहिए कि ठेकेदार से काम करवाएं या फिर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। संवाद