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Udhampur News: दच्छन गांव में हुए अग्निकांड में 15 घर जले, 18 परिवार हुए बेघर
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आग में जला घर।
- फोटो : kishatwar news
किश्तवाड़। दच्छन क्षेत्र के ठचना गांव में वीरवार को हुए अग्निकांड में चार बहुमंजिला मकानों समेत 11 अन्य आवासीय घर पूरी तरह जल गए। इसके अलावा एक गौशाला, एक दुकान और एक आंगनबाड़ी केंद्र भी आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए। घटना में करीब 18 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जो अब खुले आसमान तले रहने को मजबूर हैं और गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
वीरवार को जब आग लगी तो लोगों ने अपने प्रयासों से बुझाने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड को भी सूचित किया, लेकिन घटना स्थल जिला मुख्यालय से कई किलोमीटर दूर होने के कारण जब तक दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच पातीं, तब तक मकान जल चुके थे। ग्रामीणों के अनुसार, आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बचाव का कोई अवसर नहीं मिल पाया।
ग्रामीणों ने बताया कि गैस सिलिंडर में अचानक आग लगने और उसके बाद हुए जोरदार धमाके से आग लगी, जिसने अन्य घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। घटना के दूसरे दिन शुक्रवार को भी मलबे से लगातार धुआं निकलता रहा।
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घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय नागरिकों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया। साथ ही पुलिस, जिला प्रशासन और भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की टुकड़ियां तत्काल मौके पर पहुंचीं। सेना के जवानों ने साहस और तत्परता दिखाते हुए आग को और फैलने से रोका। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और सुरक्षित क्षेत्र (सेफ जोन) बनाया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद सेना, पुलिस और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयासों से बड़े नुकसान को और बढ़ने से रोका जा सका।
भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी ने भी राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। जिला किश्तवाड़ से रेड क्रॉस से जुड़े सदस्य प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत और आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं प्रशासन द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा, अस्थायी आवास और पुनर्वास सहायता प्रदान की जा सके।
इस भीषण अग्निकांड पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन, प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार से मांग की गई है कि प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल राहत दी जाए।
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वीरवार को जब आग लगी तो लोगों ने अपने प्रयासों से बुझाने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड को भी सूचित किया, लेकिन घटना स्थल जिला मुख्यालय से कई किलोमीटर दूर होने के कारण जब तक दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच पातीं, तब तक मकान जल चुके थे। ग्रामीणों के अनुसार, आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बचाव का कोई अवसर नहीं मिल पाया।
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ग्रामीणों ने बताया कि गैस सिलिंडर में अचानक आग लगने और उसके बाद हुए जोरदार धमाके से आग लगी, जिसने अन्य घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। घटना के दूसरे दिन शुक्रवार को भी मलबे से लगातार धुआं निकलता रहा।
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घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय नागरिकों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया। साथ ही पुलिस, जिला प्रशासन और भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की टुकड़ियां तत्काल मौके पर पहुंचीं। सेना के जवानों ने साहस और तत्परता दिखाते हुए आग को और फैलने से रोका। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और सुरक्षित क्षेत्र (सेफ जोन) बनाया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद सेना, पुलिस और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयासों से बड़े नुकसान को और बढ़ने से रोका जा सका।
भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी ने भी राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। जिला किश्तवाड़ से रेड क्रॉस से जुड़े सदस्य प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत और आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं प्रशासन द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा, अस्थायी आवास और पुनर्वास सहायता प्रदान की जा सके।
इस भीषण अग्निकांड पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन, प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार से मांग की गई है कि प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल राहत दी जाए।

आग में जला घर।- फोटो : kishatwar news

आग में जला घर।- फोटो : kishatwar news

आग में जला घर।- फोटो : kishatwar news

आग में जला घर।- फोटो : kishatwar news