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Udhampur News: कैलाश कुंड पहुंची छड़ी यात्रा, बाबा बासुकी नाग के दर्शन कर लौटे श्रद्धालु
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रामनगर। तीन दिवसीय ऐतिहासिक एवं धार्मिक कैलाश कुंड यात्रा वीरवार देर शाम डुडू स्थित बाबा बासुकी नाग मंदिर पहुंच कर समाप्त हुई। डुडू से कैलाश कुंड के लिए रवाना हुई पवित्र छड़ी यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दुर्गम पहाड़ी रास्तों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। यात्रा मार्ग बाबा बासुकी नाग के जयकारों से गूंजता रहा।
डुडू बासुकी नाग मंदिर कमेटी के प्रधान हंसराज ठाकुर ने बताया कि करीब 35 किलोमीटर लंबी यात्रा का शुभारंभ मंगलवार 8 सितंबर को डुडू से हुआ था। श्रद्धालु यात्री वाहनों से करीब पांच किलोमीटर का सफर तय कर घारघटयास पहुंचे। इसके बाद यहां से पैदल यात्रा शुरू हुई। पहले दिन श्रद्धालुओं ने करीब 23 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी सफर तय कर सियोजधार में रात्रि विश्राम किया। अगले दिन करीब सात किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पार कर श्रद्धालु कैलाश कुंड पहुंचे।
यात्रा के दौरान मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए लंगर और ठहरने की व्यवस्था की गई थी। वहीं, पटनीटॉप डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीडीए) की ओर से करीब 15 टेंट लगाए गए थे। बुधवार सुबह करीब पांच बजे श्रद्धालु सियोजधार से कैलाश कुंड के लिए रवाना हुए। ऊंची पहाड़ियों और कठिन रास्तों को पार करने के बाद श्रद्धालुओं ने कैलाश कुंड पहुंचकर बाबा बासुकी नाग के दर्शन किए। इसके बाद पवित्र कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना की और वापस सियोजधार लौटकर रात्रि विश्राम किया।
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वीरवार तड़के यात्रा सियोजधार से डुडू के लिए रवाना हुई और देर शाम डुडू बाबा बासुकी नाग मंदिर पहुंची। यात्रा मार्ग में एलोटॉप, हाथी मथा और सियोजधार समेत विभिन्न स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा सुविधाओं के प्रबंध किए गए थे। पुलिस प्रशासन और सेना की ओर से भी जगह-जगह सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
कमेटी सदस्यों ने डुडू-सियोजधार सड़क परियोजना का काम जल्द पूरा करने की मांग उठाते हुए कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से कैलाश कुंड जाने वाले श्रद्धालुओं की मुश्किलें काफी कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सड़क बनने के बाद धार्मिक यात्रा के साथ क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। यह मार्ग डुडू, बसंतगढ़, सियोजधार और भद्रवाह के धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थलों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित हो सकता है।
प्रधान हंस राज ठाकुर ने बताया कि कैलाश कुंड और सियोजधार का पूरा क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के साथ इको टूरिज्म, ट्रैकिंग और एडवेंचर टूरिज्म के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऊंचाई वाले हरे-भरे मैदान, घने जंगल, बर्फ से ढके पहाड़ और प्राकृतिक सुंदरता इस क्षेत्र को प्रमुख पर्यटन स्थल बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि कैलाश कुंड यात्रा को केवल वार्षिक धार्मिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे पर्यटन से जोड़ने की जरूरत है। इससे क्षेत्र के युवाओं, वाहन चालकों, दुकानदारों, गाइडों और अन्य स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
सदस्यों ने यात्रा मार्ग पर शौचालय, पेयजल, ईको हट, विश्राम स्थल, चिकित्सा एवं आपातकालीन सेवाएं, कचरा प्रबंधन, उचित संकेतक और निर्धारित कैंपिंग स्थल विकसित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास प्रकृति के अनुरूप होना चाहिए और कैलाश कुंड व सियोजधार के प्राकृतिक स्वरूप से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को केंद्र में रखकर योजनाएं तैयार की जाएं ताकि धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।
संवाद साहिल गुप्ता।
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डुडू बासुकी नाग मंदिर कमेटी के प्रधान हंसराज ठाकुर ने बताया कि करीब 35 किलोमीटर लंबी यात्रा का शुभारंभ मंगलवार 8 सितंबर को डुडू से हुआ था। श्रद्धालु यात्री वाहनों से करीब पांच किलोमीटर का सफर तय कर घारघटयास पहुंचे। इसके बाद यहां से पैदल यात्रा शुरू हुई। पहले दिन श्रद्धालुओं ने करीब 23 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी सफर तय कर सियोजधार में रात्रि विश्राम किया। अगले दिन करीब सात किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पार कर श्रद्धालु कैलाश कुंड पहुंचे।
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यात्रा के दौरान मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए लंगर और ठहरने की व्यवस्था की गई थी। वहीं, पटनीटॉप डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीडीए) की ओर से करीब 15 टेंट लगाए गए थे। बुधवार सुबह करीब पांच बजे श्रद्धालु सियोजधार से कैलाश कुंड के लिए रवाना हुए। ऊंची पहाड़ियों और कठिन रास्तों को पार करने के बाद श्रद्धालुओं ने कैलाश कुंड पहुंचकर बाबा बासुकी नाग के दर्शन किए। इसके बाद पवित्र कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना की और वापस सियोजधार लौटकर रात्रि विश्राम किया।
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वीरवार तड़के यात्रा सियोजधार से डुडू के लिए रवाना हुई और देर शाम डुडू बाबा बासुकी नाग मंदिर पहुंची। यात्रा मार्ग में एलोटॉप, हाथी मथा और सियोजधार समेत विभिन्न स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा सुविधाओं के प्रबंध किए गए थे। पुलिस प्रशासन और सेना की ओर से भी जगह-जगह सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
कमेटी सदस्यों ने डुडू-सियोजधार सड़क परियोजना का काम जल्द पूरा करने की मांग उठाते हुए कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से कैलाश कुंड जाने वाले श्रद्धालुओं की मुश्किलें काफी कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सड़क बनने के बाद धार्मिक यात्रा के साथ क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। यह मार्ग डुडू, बसंतगढ़, सियोजधार और भद्रवाह के धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थलों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित हो सकता है।
प्रधान हंस राज ठाकुर ने बताया कि कैलाश कुंड और सियोजधार का पूरा क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के साथ इको टूरिज्म, ट्रैकिंग और एडवेंचर टूरिज्म के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऊंचाई वाले हरे-भरे मैदान, घने जंगल, बर्फ से ढके पहाड़ और प्राकृतिक सुंदरता इस क्षेत्र को प्रमुख पर्यटन स्थल बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि कैलाश कुंड यात्रा को केवल वार्षिक धार्मिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे पर्यटन से जोड़ने की जरूरत है। इससे क्षेत्र के युवाओं, वाहन चालकों, दुकानदारों, गाइडों और अन्य स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
सदस्यों ने यात्रा मार्ग पर शौचालय, पेयजल, ईको हट, विश्राम स्थल, चिकित्सा एवं आपातकालीन सेवाएं, कचरा प्रबंधन, उचित संकेतक और निर्धारित कैंपिंग स्थल विकसित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास प्रकृति के अनुरूप होना चाहिए और कैलाश कुंड व सियोजधार के प्राकृतिक स्वरूप से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को केंद्र में रखकर योजनाएं तैयार की जाएं ताकि धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।
संवाद साहिल गुप्ता।