Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Udhampur News ›   jammu kashmir news

Udhampur News: खामोशी से आंखों की रोशनी छीन रहा काला मोतिया

विज्ञापन
jammu kashmir news
उधमपुर। आंखों की रोशनी छीनने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल ग्लूकोमा यानी काला मोतिया धीरे-धीरे इंसान को अंधेपन की ओर धकेल सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि शुरुआत में इस बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते और मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है। जब तक नजर में कमी महसूस होती है, तब तक ऑप्टिक नर्व यानी दृष्टि तंत्रिका को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है। समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने पर यह नुकसान स्थायी हो सकता है।
विज्ञापन


ग्लूकोमा में आंख से मस्तिष्क तक दृश्य जानकारी पहुंचाने वाली ऑप्टिक नर्व प्रभावित होती है। आंख के अंदर मौजूद जलीय तरल पदार्थ (एक्वस ह्यूमर) की निकासी में रुकावट आने से दबाव बढ़ सकता है, जिससे इस नस को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि, सामान्य आंखों के दबाव में भी ग्लूकोमा हो सकता है। यह बीमारी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को प्रभावित कर सकती है। इसके प्रमुख प्रकारों में कंजेनिटल, जुवेनाइल और एडल्ट ग्लूकोमा शामिल हैं। आंख में चोट लगने के बाद भी कुछ लोगों में यह समस्या विकसित हो सकती है।
विज्ञापन

नजर के दायरे को धीरे-धीरे करता है प्रभावित

बीमारी के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। समय के साथ देखने का क्षेत्र कम होने लगता है और नजर धुंधली हो सकती है। कुछ मामलों में अचानक तेज आंख दर्द, सिरदर्द, आंखों में लालिमा और रोशनी के आसपास रंगीन घेरे दिखाई देना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

दवाइयों और लेजर से किया जाता है उपचार

ग्लूकोमा का उपचार बीमारी की स्थिति के अनुसार किया जाता है। आंखों का दबाव नियंत्रित रखने के लिए दवाइयां दी जाती हैं। जरूरत पड़ने पर लेजर उपचार या सर्जरी भी की जा सकती है। चूंकि ऑप्टिक नर्व को हो चुका नुकसान आमतौर पर वापस ठीक नहीं किया जा सकता, इसलिए उपचार का मुख्य उद्देश्य बीमारी को आगे बढ़ने से रोकना और बची हुई दृष्टि को सुरक्षित रखना होता है।

कोट

ग्लूकोमा को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। इस बीमारी में शुरुआत में मरीज को परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन दृष्टि तंत्रिका को नुकसान पहुंचता रहता है। इसलिए लोगों को समय-समय पर आंखों की विस्तृत जांच करवानी चाहिए। आंखों में दर्द, धुंधलापन या नजर में बदलाव होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। दवाइयों, लेजर और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन के माध्यम से आंखों का दबाव नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार ही बीमारी से होने वाले स्थायी नुकसान को कम करने का सबसे अहम तरीका है।
-
डॉ. अश्वनी कुमार, नेत्र रोग विशेषज्ञ, जीएमसी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed