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Udhampur News: कठुआ के 70 किसानों ने भद्रवाह में सीखी वैज्ञानिक तरीके से सेब बागवानी की तकनीक
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भद्रवाह। कठुआ जिले के समशीतोष्ण क्षेत्रों बनी, दुग्गन और लोहांग में बागवानी की अपार संभावनाओं को देखते हुए जिला बागवानी विभाग कठुआ की ओर से 70 किसानों के लिए भद्रवाह में एक्सपोजर-कम-ट्रेनिंग टूर का आयोजन किया गया। इस दौरान किसानों ने भद्रवाह के बागवानी अनुसंधान केंद्रों और फलों के बागानों का दौरा कर वैज्ञानिक तरीके से बागवानी करने की तकनीक सीखी।
किसानों ने सर्तिंगल स्थित स्काॅस्ट-जे के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान उपकेंद्र में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. नीरज कोतवाल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) डांडी का दौरा किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सेब और अखरोट सहित समशीतोष्ण फलों की वैज्ञानिक खेती तथा बाग स्थापित करने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। किसानों ने सेब और अखरोट के बागानों का भी निरीक्षण किया।
कठुआ के मुख्य बागवानी अधिकारी शकील अहमद ने बताया कि जिले के बनी, दुग्गन, लोहांग और चनान क्षेत्र के 70 किसानों को केंद्र सरकार की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर योजना के तहत भद्रवाह लाया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को ठंडे जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फलों सेब, अखरोट, खुबानी और नाशपाती की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि भद्रवाह घाटी के किसान इन फलों की बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं, जिससे कठुआ के समशीतोष्ण क्षेत्रों के किसानों को भी प्रेरणा मिल सकती है।
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मुख्य वैज्ञानिक एवं बागवानी अनुसंधान उपकेंद्र के प्रभारी डॉ. नीरज कोतवाल ने कहा कि बनी क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सेब और अखरोट उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को वैज्ञानिक तरीके से सेब की खेती, बाग स्थापित करने, पौधशाला तैयार करने और गुणवत्तापूर्ण फल उत्पादन के लिए आवश्यक उपायों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही किसानों की बागवानी से संबंधित शंकाओं का समाधान भी किया गया। डॉ. कोतवाल ने कहा कि किसानों ने वैज्ञानिक तरीके से सेब और अन्य समशीतोष्ण फलों की खेती सीखने में काफी रुचि दिखाई। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में बनी क्षेत्र सेब और अखरोट उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।
भ्रमण पर आए किसानों ने बागवानी विभाग कठुआ और भद्रवाह के वैज्ञानिकों का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल फलों की खेती की नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में उपयोगी जानकारी मिली है।
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किसानों ने सर्तिंगल स्थित स्काॅस्ट-जे के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान उपकेंद्र में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. नीरज कोतवाल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) डांडी का दौरा किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सेब और अखरोट सहित समशीतोष्ण फलों की वैज्ञानिक खेती तथा बाग स्थापित करने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। किसानों ने सेब और अखरोट के बागानों का भी निरीक्षण किया।
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कठुआ के मुख्य बागवानी अधिकारी शकील अहमद ने बताया कि जिले के बनी, दुग्गन, लोहांग और चनान क्षेत्र के 70 किसानों को केंद्र सरकार की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर योजना के तहत भद्रवाह लाया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को ठंडे जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फलों सेब, अखरोट, खुबानी और नाशपाती की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि भद्रवाह घाटी के किसान इन फलों की बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं, जिससे कठुआ के समशीतोष्ण क्षेत्रों के किसानों को भी प्रेरणा मिल सकती है।
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मुख्य वैज्ञानिक एवं बागवानी अनुसंधान उपकेंद्र के प्रभारी डॉ. नीरज कोतवाल ने कहा कि बनी क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सेब और अखरोट उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को वैज्ञानिक तरीके से सेब की खेती, बाग स्थापित करने, पौधशाला तैयार करने और गुणवत्तापूर्ण फल उत्पादन के लिए आवश्यक उपायों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही किसानों की बागवानी से संबंधित शंकाओं का समाधान भी किया गया। डॉ. कोतवाल ने कहा कि किसानों ने वैज्ञानिक तरीके से सेब और अन्य समशीतोष्ण फलों की खेती सीखने में काफी रुचि दिखाई। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में बनी क्षेत्र सेब और अखरोट उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।
भ्रमण पर आए किसानों ने बागवानी विभाग कठुआ और भद्रवाह के वैज्ञानिकों का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल फलों की खेती की नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में उपयोगी जानकारी मिली है।