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Udhampur News: सलमेह पुल के निर्माण के लिए डीपीआर मंजूर, 24 करोड़ खर्च होंगे
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उधमपुर। तवी नदी पर जर्जर हो चुका पुराना सलमेह पुल।
- फोटो : udhampur news
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उधमपुर। जिला मुख्यालय के समीप तवी नदी पर नया सलमेह पुल बनाने का काम जल्द शुरू हो जाएगा। इसके लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से तैयार की गई करीब 24 करोड़ की डीपीआर को मंजूरी मिल गई है। अब बस नाबार्ड के पास फंड की उपलब्धता का इंतजार है।
जुलाई 2024 में नाबार्ड के तहत इस पुल को बनाने की मंजूरी मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग की तरफ से इसकी डीपीआर तैयार कर मंजूरी के लिए भेजी गई थी। इस पुल के बनने से सलमेह इलाके में बहती तवी नदी के पार दर्जनों पंचायतों की करीब 80 हजार आबादी की बड़ी समस्या हल हो जाएगी, जो बीते लगभग दो साल से पुराने सलमेह पुल के असुरक्षित घोषित होने के बाद से जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
सलमेह में तवी नदी के पार जिला उधमपुर की करीब 80 हजार आबादी रहती है। इसमें ब्लाॅक घोरडी की 20 पंचायतों के अलावा शहर से सटे लड्डन, पावर हाउस, औसू, कैरा, पखलाई और चढ़त आदि के कई इलाके भी शामिल हैं। जिला की यह बड़ी आबादी उधमपुर-घोरडी रोड से होते हुए आगे तवी नदी पर बने हाइड्रो प्रोजेक्ट के जर्जर हो चुके कैनाल पुल से होकर ही जिला मुख्यालय तक पहुंचती है। करीब दो साल पहले प्रशासन की सड़क सुरक्षा समिति ने जांच के बाद सलमेह पुल को बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया था।
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इसके बाद से प्रशासन की तरफ से इस पुल से यात्री वाहनों की आवाजाही पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके बाद से ब्लाॅक घोरड़ी की लाइफ लाइन मानी जाने वाली उधमपुर-घोरडी रोड पर वाहनों की जिला मुख्यालय तक राह मुश्किल हो गई है। लोग पैदल अथवा दूर दराज के इलाकों के विकल्प मार्गों से होकर जिला मुख्यालय तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इनमें स्कूली बच्चों से लेकर काॅलेज विद्यार्थी और वे तमाम लोग मुख्य रूप से शामिल हैं जो या तो सरकारी कर्मचारी हैं अथवा मेहनत मजदूरी करने के लिए उधमपुर शहर का रुख करते हैं। इसी तरह शहर से भी काफी संख्या में घोरडी और इसके आसपास के इलाकों में तैनात सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी देने यहां के लिए आवागमन करते हैं।
क्षेत्र के विकास पर भी पड़ रहा है असर
सलमेह पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद हाेने से इससे संबंधित क्षेत्रों का विकास कार्य भी काफी ज्यादा प्रभावित हो रहा है। इसमें विकास कार्याें सहित घर आदि के निर्माण कार्य के लिए सरिया, सीमेंट और ईंट आदि सामान भी इन इलाकों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। शादी जैसे समारोहों के लिए भी लोगाें का अपने इलाकों तक जरूरी रसद और सामान तक पहुंचाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
कई बार धरना प्रदर्शन कर चुके लोग
सलमेह पुल असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद भी लोगों को नए पुल के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा है, लोग पिछले दो साल से विभिन्न मंचों के माध्यम से पुल बनाने की मांग को उठाते आए हैं और धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। ज्ञापन भी अधिकारियों को इस संबंध में सौंपे गए हैं। वहीं अब डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद पुल की समस्या के जल्द समाधान की उम्मीद जगी है। नया पुल बनने से जिला की कुल आबादी के एक बड़े हिस्से की आवाजाही लेकर बनी बड़ी समस्या हल हो जाएगी।
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पुल को बनाने की लिए भेजी गई डीपीआर को मंजूरी मिल गई है, अब नाबार्ड के पास फंड की उपलब्धता का इंतजार है। फंड उपलब्ध होते ही सलमेह पुल को बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। प्रशासन की यह प्राथमिकता है कि इस पुल को बनाने का काम प्राथमिकता पर पूरा किया जाए।
-सलोनी राय, डीसी
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जुलाई 2024 में नाबार्ड के तहत इस पुल को बनाने की मंजूरी मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग की तरफ से इसकी डीपीआर तैयार कर मंजूरी के लिए भेजी गई थी। इस पुल के बनने से सलमेह इलाके में बहती तवी नदी के पार दर्जनों पंचायतों की करीब 80 हजार आबादी की बड़ी समस्या हल हो जाएगी, जो बीते लगभग दो साल से पुराने सलमेह पुल के असुरक्षित घोषित होने के बाद से जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
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सलमेह में तवी नदी के पार जिला उधमपुर की करीब 80 हजार आबादी रहती है। इसमें ब्लाॅक घोरडी की 20 पंचायतों के अलावा शहर से सटे लड्डन, पावर हाउस, औसू, कैरा, पखलाई और चढ़त आदि के कई इलाके भी शामिल हैं। जिला की यह बड़ी आबादी उधमपुर-घोरडी रोड से होते हुए आगे तवी नदी पर बने हाइड्रो प्रोजेक्ट के जर्जर हो चुके कैनाल पुल से होकर ही जिला मुख्यालय तक पहुंचती है। करीब दो साल पहले प्रशासन की सड़क सुरक्षा समिति ने जांच के बाद सलमेह पुल को बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया था।
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इसके बाद से प्रशासन की तरफ से इस पुल से यात्री वाहनों की आवाजाही पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके बाद से ब्लाॅक घोरड़ी की लाइफ लाइन मानी जाने वाली उधमपुर-घोरडी रोड पर वाहनों की जिला मुख्यालय तक राह मुश्किल हो गई है। लोग पैदल अथवा दूर दराज के इलाकों के विकल्प मार्गों से होकर जिला मुख्यालय तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इनमें स्कूली बच्चों से लेकर काॅलेज विद्यार्थी और वे तमाम लोग मुख्य रूप से शामिल हैं जो या तो सरकारी कर्मचारी हैं अथवा मेहनत मजदूरी करने के लिए उधमपुर शहर का रुख करते हैं। इसी तरह शहर से भी काफी संख्या में घोरडी और इसके आसपास के इलाकों में तैनात सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी देने यहां के लिए आवागमन करते हैं।
क्षेत्र के विकास पर भी पड़ रहा है असर
सलमेह पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद हाेने से इससे संबंधित क्षेत्रों का विकास कार्य भी काफी ज्यादा प्रभावित हो रहा है। इसमें विकास कार्याें सहित घर आदि के निर्माण कार्य के लिए सरिया, सीमेंट और ईंट आदि सामान भी इन इलाकों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। शादी जैसे समारोहों के लिए भी लोगाें का अपने इलाकों तक जरूरी रसद और सामान तक पहुंचाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
कई बार धरना प्रदर्शन कर चुके लोग
सलमेह पुल असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद भी लोगों को नए पुल के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा है, लोग पिछले दो साल से विभिन्न मंचों के माध्यम से पुल बनाने की मांग को उठाते आए हैं और धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। ज्ञापन भी अधिकारियों को इस संबंध में सौंपे गए हैं। वहीं अब डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद पुल की समस्या के जल्द समाधान की उम्मीद जगी है। नया पुल बनने से जिला की कुल आबादी के एक बड़े हिस्से की आवाजाही लेकर बनी बड़ी समस्या हल हो जाएगी।
पुल को बनाने की लिए भेजी गई डीपीआर को मंजूरी मिल गई है, अब नाबार्ड के पास फंड की उपलब्धता का इंतजार है। फंड उपलब्ध होते ही सलमेह पुल को बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। प्रशासन की यह प्राथमिकता है कि इस पुल को बनाने का काम प्राथमिकता पर पूरा किया जाए।
-सलोनी राय, डीसी