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ब्लैक स्पॉट की पहचान कर साइन बोर्ड, और क्रैश बैरियर लगाएं : डीसी
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उधमपुर। उपायुक्त उधमपुर मिंगा शेरपा ने जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जिले भर में सड़क सुरक्षा उपायों को मजबूत करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी संजीव गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल मनहास, एआरटीओ मुदस्सिर इकबाल सहित विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान जिले की सड़कों का सेफ्टी ऑडिट, सड़कों के किनारे पड़े मलबे को हटाने, मोटर वाहन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने, जब्त वाहनों के लिए पार्किंग स्थल चिन्हित करने, सड़क सुरक्षा निधि के उपयोग और पीएम राहत योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को सहायता देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट की पहचान, सड़कों के नियमित रखरखाव, ओवरलोडिंग और ओवरस्पीडिंग की जांच, लापरवाही से वाहन चलाने पर अंकुश, जागरूकता कार्यक्रम और व्यस्त मार्गों पर जाम की समस्या को कम करने और उचित सड़क संकेतक लगाने पर भी मंथन किया गया।
उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल से काम करने और सड़क सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सुरक्षा संबंधी कार्यों में तेजी लाने और संवेदनशील सड़कों की नियमित निगरानी करने को कहा। उन्होंने कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में लगातार सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया ताकि लोगों में जिम्मेदार यातायात व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सके।
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पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई के कार्यकारी अभियंताओं को सड़क हादसों को रोकने के लिए सड़कों के नियमित रखरखाव को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डीसी ने ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां साइन बोर्ड, रोड मार्किंग और क्रैश बैरियर लगाने जैसे सुधारात्मक उपाय करने को कहा। उन्होंने कहा कि सड़क को यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए समय पर सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी है।
मोटर वाहन विभाग और यातायात पुलिस को यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों, विशेषकर ओवरलोडिंग, बिना हेलमेट के वाहन चलाने और तेज गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। डीसी ने संबंधित विभागों को संवेदनशील स्थलों का संयुक्त निरीक्षण कर सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए त्वरित सुधारात्मक उपाय करने के भी निर्देश दिए।
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बैठक के दौरान जिले की सड़कों का सेफ्टी ऑडिट, सड़कों के किनारे पड़े मलबे को हटाने, मोटर वाहन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने, जब्त वाहनों के लिए पार्किंग स्थल चिन्हित करने, सड़क सुरक्षा निधि के उपयोग और पीएम राहत योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को सहायता देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट की पहचान, सड़कों के नियमित रखरखाव, ओवरलोडिंग और ओवरस्पीडिंग की जांच, लापरवाही से वाहन चलाने पर अंकुश, जागरूकता कार्यक्रम और व्यस्त मार्गों पर जाम की समस्या को कम करने और उचित सड़क संकेतक लगाने पर भी मंथन किया गया।
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उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल से काम करने और सड़क सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सुरक्षा संबंधी कार्यों में तेजी लाने और संवेदनशील सड़कों की नियमित निगरानी करने को कहा। उन्होंने कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में लगातार सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया ताकि लोगों में जिम्मेदार यातायात व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सके।
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पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई के कार्यकारी अभियंताओं को सड़क हादसों को रोकने के लिए सड़कों के नियमित रखरखाव को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डीसी ने ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां साइन बोर्ड, रोड मार्किंग और क्रैश बैरियर लगाने जैसे सुधारात्मक उपाय करने को कहा। उन्होंने कहा कि सड़क को यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए समय पर सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी है।
मोटर वाहन विभाग और यातायात पुलिस को यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों, विशेषकर ओवरलोडिंग, बिना हेलमेट के वाहन चलाने और तेज गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। डीसी ने संबंधित विभागों को संवेदनशील स्थलों का संयुक्त निरीक्षण कर सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए त्वरित सुधारात्मक उपाय करने के भी निर्देश दिए।