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Udhampur News: प्रशिक्षण लेकर बुटीक खोला, आज कमा रहीं सालाना डेढ़ लाख रुपये
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उधमपुर। शहर की आर्य समाज गली की रहने वाली बिंदु देवी अपने हौसले और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना रही है। घर के साथ-साथ वे अपने बूटीक को भी सफलतापूर्वक संभाल रही है। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने बुटीक की शुरूआत की। आज वह सालाना डेढ़ लाख रुपये कमा रही हैं। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
बिंदु देवी ने 43 वर्ष की उम्र में यह साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ करने की चाह हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती है। बिंदु देवी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बूटीक के काम का शौक था। वह अक्सर नए डिजाइन देखने और कपड़ों की सिलाई का काम करने की इच्छा रखती थी, लेकिन उस समय वे इसे सीख नहीं पाई। पारिवारिक जिम्मेदारियों और परिस्थितियों के कारण उनका सपना अधूरा रह गया।
शादी के बाद घर की जिम्मेदारियों में समय निकलता गया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और सही अवसर का इंतजार करती रहीं। हाल ही में उन्होंने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इससे उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई मिली। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपना बूटीक खोला। शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन उनके परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया। बिंदु देवी के तीन बेटे हैं, परिवार के समर्थन और अपनी मेहनत के दम वे आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और सालाना लगभग डेढ़ लाख रुपये की आय कमा रही हैं।
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उनका कहना है कि यह कमाई सिर्फ आर्थिक सहारा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक है। बिंदु देवी का मानना है कि महिलाओं को अपना हुनर पहचान कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए ताकि वे हर परिस्थिति का सामना मजबूती से कर सकती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि परिवार के सहयोग और दृढ़ संकल्प से हर सपना साकार किया जा सकता है।
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बिंदु देवी ने 43 वर्ष की उम्र में यह साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ करने की चाह हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती है। बिंदु देवी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बूटीक के काम का शौक था। वह अक्सर नए डिजाइन देखने और कपड़ों की सिलाई का काम करने की इच्छा रखती थी, लेकिन उस समय वे इसे सीख नहीं पाई। पारिवारिक जिम्मेदारियों और परिस्थितियों के कारण उनका सपना अधूरा रह गया।
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शादी के बाद घर की जिम्मेदारियों में समय निकलता गया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और सही अवसर का इंतजार करती रहीं। हाल ही में उन्होंने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इससे उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई मिली। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपना बूटीक खोला। शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन उनके परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया। बिंदु देवी के तीन बेटे हैं, परिवार के समर्थन और अपनी मेहनत के दम वे आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और सालाना लगभग डेढ़ लाख रुपये की आय कमा रही हैं।
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उनका कहना है कि यह कमाई सिर्फ आर्थिक सहारा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक है। बिंदु देवी का मानना है कि महिलाओं को अपना हुनर पहचान कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए ताकि वे हर परिस्थिति का सामना मजबूती से कर सकती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि परिवार के सहयोग और दृढ़ संकल्प से हर सपना साकार किया जा सकता है।