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Udhampur News: जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग बहाल होने में लग सकते हैं छह दिन
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उधमपुर/रामबन। भूस्खलन से प्रभावित जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सोमवार को दूसरे दिन भी बंद रहा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक अधिकारी ने बताया कि 20 जगह मलबा गिरा है। इसे हटाने के लिए करीब एक सप्ताह और लग सकता है। रामबन जिले में भारी बारिश, भूस्खलन और मिट्टी धंसने के बाद रविवार को कश्मीर को अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले हाईवे का संपर्क टूट गया। राजमार्ग पर उधमपुर, बटोत और रामबन में सैकड़ों वाहन फंसे रहे। प्राकृतिक आपदा ने सड़कों और घरों सहित बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। मलबे के नीचे कई वाहन अब भी दबे हुए हैं।
एनएचएआई के मुताबिक 12 से ज्यादा जगहों पर राजमार्ग पर भारी मात्रा में जमा मलबे को हटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। खासकर सेरी और मरोग के बीच चार किलोमीटर के पर कुछ जगहों पर 20 फुट से भी ऊंचे मलबे के ढेर हैं। निर्माण एजेंसियों की मशीनरी भी मलबे में दब गई है। राजमार्ग बहाल करने के लिए 20 प्रभावित स्थानों पर मशीनों के साथ राहत कर्मियों की तैनात किया गया है। पंथ्याल और केला मोड़ के पास राजमार्ग को काफी नुकसान हुआ है।
सोमवार दोपहर करीब तीन बजे मरोग और केला मोड़ में फंसे कई वाहनों को श्रीनगर की ओर रवाना किया गया। इससे यात्रियों ने राहत की सांस ली। हालांकि, मरोग से सेरी-रामबन के रास्ते उधमपुर-जम्बू आने वाले यात्रियों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
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मलबा हटने के बाद पता चलेगा कितना हुआ नुकसान
राहत कार्य में जुटीं विशेष टीमें राजमार्ग बहाल करने का प्रयास कर रही हैं। मलबा हटने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या भूस्खलन से प्रभावित राजमार्ग यातायात के लिए सुरक्षित है या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वैकल्पिक सड़क बनानी पड़ सकती है, जिससे यातायात को बहाल होने से छह से सात दिन लग सकते हैं।
- जतिंद्र सिंह, डीएसपी ट्रैफिक, उधमपुर-रामबन
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एनएचएआई के मुताबिक 12 से ज्यादा जगहों पर राजमार्ग पर भारी मात्रा में जमा मलबे को हटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। खासकर सेरी और मरोग के बीच चार किलोमीटर के पर कुछ जगहों पर 20 फुट से भी ऊंचे मलबे के ढेर हैं। निर्माण एजेंसियों की मशीनरी भी मलबे में दब गई है। राजमार्ग बहाल करने के लिए 20 प्रभावित स्थानों पर मशीनों के साथ राहत कर्मियों की तैनात किया गया है। पंथ्याल और केला मोड़ के पास राजमार्ग को काफी नुकसान हुआ है।
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सोमवार दोपहर करीब तीन बजे मरोग और केला मोड़ में फंसे कई वाहनों को श्रीनगर की ओर रवाना किया गया। इससे यात्रियों ने राहत की सांस ली। हालांकि, मरोग से सेरी-रामबन के रास्ते उधमपुर-जम्बू आने वाले यात्रियों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
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मलबा हटने के बाद पता चलेगा कितना हुआ नुकसान
राहत कार्य में जुटीं विशेष टीमें राजमार्ग बहाल करने का प्रयास कर रही हैं। मलबा हटने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या भूस्खलन से प्रभावित राजमार्ग यातायात के लिए सुरक्षित है या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वैकल्पिक सड़क बनानी पड़ सकती है, जिससे यातायात को बहाल होने से छह से सात दिन लग सकते हैं।
- जतिंद्र सिंह, डीएसपी ट्रैफिक, उधमपुर-रामबन