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Udhampur News: आपात स्थिति के लिए सेना अलर्ट मोड पर
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रामबन। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में आपात स्थिति के लिए सेना अलर्ट मोड पर है। प्रमुख स्थानों पर टुकड़ियों को तैयार रखा गया है। वहीं, संबंधित एजेंसियों ने बाधित राजमार्ग पर मलबा हटाने के लिए सफाई अभियान शुरू कर दिया गया है।
सेना ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की सहायता के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (एनएच44) पर यातायात बहाल कराने में मदद कर रही है। जिला आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और यातायात अधीक्षक सेना के निरंतर संपर्क में है। उन्होंने कहा है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है। जिला प्रशासन के अफसर, कर्मचारी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के जवान प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य में जुटे हैं। अधिकारियों ने लोगों को आश्वस्त किया है कि आवश्यकता होने पर वे सेना की सहायता भी ली जाएगी। आपदा पीड़ित फंसे लोगों को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
सड़कों की सफाई में ही लग सकते हैं 48 घंटे
प्रशासन ने बनिहाल, करछाल, दिगडौल, मैत्रा और चंदरकोट में क्विक रिएक्शन टीमों (क्यूआरटी) को तैनात कर दिया है, ताकि फंसे हुए यात्रियों को राहत प्रदान की जा सके। सेना के जवानों ने चाय और गर्म भोजन वितरित किया। इसी के साथ रास्ते में फंसे लोगों को अस्थायी आश्रय भी प्रदान किया है। लोगों की आवश्यकता के अनुसार प्राथमिक चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। शुरुआती आकलन के अनुसार, सड़क की सफाई में ही 48 घंटे तक का समय लग सकता है।
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सेना ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की सहायता के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (एनएच44) पर यातायात बहाल कराने में मदद कर रही है। जिला आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और यातायात अधीक्षक सेना के निरंतर संपर्क में है। उन्होंने कहा है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है। जिला प्रशासन के अफसर, कर्मचारी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के जवान प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य में जुटे हैं। अधिकारियों ने लोगों को आश्वस्त किया है कि आवश्यकता होने पर वे सेना की सहायता भी ली जाएगी। आपदा पीड़ित फंसे लोगों को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
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सड़कों की सफाई में ही लग सकते हैं 48 घंटे
प्रशासन ने बनिहाल, करछाल, दिगडौल, मैत्रा और चंदरकोट में क्विक रिएक्शन टीमों (क्यूआरटी) को तैनात कर दिया है, ताकि फंसे हुए यात्रियों को राहत प्रदान की जा सके। सेना के जवानों ने चाय और गर्म भोजन वितरित किया। इसी के साथ रास्ते में फंसे लोगों को अस्थायी आश्रय भी प्रदान किया है। लोगों की आवश्यकता के अनुसार प्राथमिक चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। शुरुआती आकलन के अनुसार, सड़क की सफाई में ही 48 घंटे तक का समय लग सकता है।
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