{"_id":"686ad2c1c15e86f9820b3011","slug":"himkoti-route-closed-in-katra-katra-news-c-10-agr1006-653853-2025-07-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udhampur News: पत्थरों के गिरने से हिमकोटी मार्ग रहा बंद, सफाई के बाद खोला गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udhampur News: पत्थरों के गिरने से हिमकोटी मार्ग रहा बंद, सफाई के बाद खोला गया
विज्ञापन
हिमकोटी मार्ग से भवन की ओर आते जाते श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा । शनिवार रात हिमकोटी मार्ग पर पहाड़ी से गिरते कंकर-पत्थरों के कारण यात्रा रोकी गई लेकिन सफाई व निरीक्षण के बाद रविवार सुबह सात बजे इसे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। घनी धुंध और बारिश के चलते यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जून में प्रतिदिन 35,000-40,000 श्रद्धालु आते थे, जो अब घटकर 16,000-18,000 रह गए हैं।
शनिवार रात दो बजे बारिश से उत्पन्न भूस्खलन खतरे के कारण हिमकोटी मार्ग बंद किया गया था। रविवार सुबह सफाई के बाद ही इसे पुनः शुरू किया गया। श्रद्धालु परिवारों के साथ भवन पहुंचते रहे। कई पैदल चले तो कुछ ने घोड़े, पिट्ठू (कंडी) या पालकी का सहारा लिया। भवन से भैरव घाटी के लिए रोपवे केवल कार व बैटरी कार सेवाएं सुचारु रहीं जिनका श्रद्धालुओं ने भरपूर लाभ उठाया।
श्राइन बोर्ड आपदा प्रबंधन टीमों, पुलिस व सीआरपीएफ जवानों ने मार्गों पर कड़ी निगरानी रखी। सफाई कर्मचारी लगातार मलबा हटाते रहे ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित रहे। शाम करीब चार बजे मौसम में सुधार हुआ और धूप निकली लेकिन यात्रा संख्या में कमी का कारण बारिश के मौसम में शैक्षणिक संस्थानों का पुनः खुलना भी रहा। श्रद्धालु मां के दिव्य दर्शन कर परिवार की सुख-शांति की कामना करते हुए भैरवनाथ के दर्शन के लिए आगे बढ़ते रहे।
विज्ञापन
हेलिकॉप्टर सेवा बहाल; कुछ ही घंटों में फिर धुंध छाई
मां वैष्णो देवी धाम में रविवार सुबह घने कोहरे से कुछ राहत मिलते ही हेलिकाप्टर सेवा आंशिक रूप से बहाल हो गई जिससे स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली। हालांकि,यह खुशनुमा मौसम ज्यादा देर नहीं टिका। कुछ ही घंटों बाद कटड़ा और भवन क्षेत्र में फिर से गहरी धुंध छा गई, जिससे दृश्यता घटकर शून्य के करीब पहुंच गई। बावजूद इसके, श्रद्धालुओं का जोश ठंडी हवाओं और धुंध को चीरता रहा। जय माता दी के जयकारों की गूंज कटड़ा से लेकर त्रिकुटा पर्वत तक सुनाई दी। उनके चेहरों पर आस्था की चमक और दरबार पहुंचने की बेचैनी साफ झलक रही थी।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में हालात सुधरने की उम्मीद है। वहीं, श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं और मौसम अनुकूल न होने पर दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। आखिरी पंक्तियों तक धुंध के बीच बुलंद होते भक्ति के स्वरों ने साबित कर दिया, मां के आगे प्रकृति की बाधाएं भी फीकी पड़ जाती हैं।
विज्ञापन
कटड़ा । शनिवार रात हिमकोटी मार्ग पर पहाड़ी से गिरते कंकर-पत्थरों के कारण यात्रा रोकी गई लेकिन सफाई व निरीक्षण के बाद रविवार सुबह सात बजे इसे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। घनी धुंध और बारिश के चलते यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जून में प्रतिदिन 35,000-40,000 श्रद्धालु आते थे, जो अब घटकर 16,000-18,000 रह गए हैं।
शनिवार रात दो बजे बारिश से उत्पन्न भूस्खलन खतरे के कारण हिमकोटी मार्ग बंद किया गया था। रविवार सुबह सफाई के बाद ही इसे पुनः शुरू किया गया। श्रद्धालु परिवारों के साथ भवन पहुंचते रहे। कई पैदल चले तो कुछ ने घोड़े, पिट्ठू (कंडी) या पालकी का सहारा लिया। भवन से भैरव घाटी के लिए रोपवे केवल कार व बैटरी कार सेवाएं सुचारु रहीं जिनका श्रद्धालुओं ने भरपूर लाभ उठाया।
विज्ञापन
श्राइन बोर्ड आपदा प्रबंधन टीमों, पुलिस व सीआरपीएफ जवानों ने मार्गों पर कड़ी निगरानी रखी। सफाई कर्मचारी लगातार मलबा हटाते रहे ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित रहे। शाम करीब चार बजे मौसम में सुधार हुआ और धूप निकली लेकिन यात्रा संख्या में कमी का कारण बारिश के मौसम में शैक्षणिक संस्थानों का पुनः खुलना भी रहा। श्रद्धालु मां के दिव्य दर्शन कर परिवार की सुख-शांति की कामना करते हुए भैरवनाथ के दर्शन के लिए आगे बढ़ते रहे।
विज्ञापन
हेलिकॉप्टर सेवा बहाल
मां वैष्णो देवी धाम में रविवार सुबह घने कोहरे से कुछ राहत मिलते ही हेलिकाप्टर सेवा आंशिक रूप से बहाल हो गई जिससे स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली। हालांकि,यह खुशनुमा मौसम ज्यादा देर नहीं टिका। कुछ ही घंटों बाद कटड़ा और भवन क्षेत्र में फिर से गहरी धुंध छा गई, जिससे दृश्यता घटकर शून्य के करीब पहुंच गई। बावजूद इसके, श्रद्धालुओं का जोश ठंडी हवाओं और धुंध को चीरता रहा। जय माता दी के जयकारों की गूंज कटड़ा से लेकर त्रिकुटा पर्वत तक सुनाई दी। उनके चेहरों पर आस्था की चमक और दरबार पहुंचने की बेचैनी साफ झलक रही थी।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में हालात सुधरने की उम्मीद है। वहीं, श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं और मौसम अनुकूल न होने पर दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। आखिरी पंक्तियों तक धुंध के बीच बुलंद होते भक्ति के स्वरों ने साबित कर दिया, मां के आगे प्रकृति की बाधाएं भी फीकी पड़ जाती हैं।