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Udhampur News: बदलती जीवनशैली के गंभीर परिणाम... अब उम्रदराज ही नहीं, युवा भी हो रहे गठिया के शिकार
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उधमपुर। गठिया (आर्थराइटिस) आज गंभीर बीमारी बनती जा रही है। बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण युवा भी चपेट में आ रहे हैं। गठिया से जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न हो जाती है। विशेषज्ञ का कहना है कि पहले 50-60 साल से अधिक उम्र के लोगों में समस्या आती थी। अब नौजवान पीढ़ी भी बीमार हो रही है।
यह दो प्रकार की है। ऑस्टियो आर्थराइटिस उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों के घिसने के कारण होता है। जोड़ों की नरम परत धीरे-धीरे खत्म होने लगती है जिससे हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं। यह समस्या खासकर घुटनों, कूल्हों, हाथों और अंगुलियों में ज्यादा देखी जाती है। इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस यानी सूजन संबंधी गठिया में शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र खराब होकर जोड़ों पर हमला करता है। यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से रूमेटॉइड आर्थराइटिस रोग होता है जो जोड़ों की परत पर हमला करता है। इसके अलावा संक्रामक के कारण भी गठिया हो सकता है जिसमें बैक्टीरिया जोड़ों को प्रभावित करते हैं।
लक्षण और इलाज
जोड़ों में दर्द खासकर घुटनों में सूजन और अकड़न, चलने-फिरने में दिक्कत, सीढ़ियां चढ़ने या बैठने-उठने में परेशानी, जोड़ों का विकृत होना, सुबह ज्यादा अकड़न महसूस होना आदि लक्षण है। इसका इलाज प्रकार और चरण पर निर्भर करता है। शुरुआती चरण में वजन घटाना, फिजियोथेरेपी और व्यायाम, मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले आसन की सलाह दी जाती है। कम दर्द या संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दवा दी जाती है। यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए आहार और औषधि दी जाती है। गंभीर स्थिति में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी करनी पड़ती है।
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वजन नियंत्रित रखें, रोजाना कसरत करें, कैल्शियम और विटामिन डी युक्त आहार लें। लंबे समय तक एक जगह पर न बैठें। ज्यादा भारी वजन उठाने से बचें। सही आसन बनाए रखें। समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं ।
- डॉ. सयार अहमद, असिस्टेंट प्रोफेसर, जीएमसी।
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यह दो प्रकार की है। ऑस्टियो आर्थराइटिस उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों के घिसने के कारण होता है। जोड़ों की नरम परत धीरे-धीरे खत्म होने लगती है जिससे हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं। यह समस्या खासकर घुटनों, कूल्हों, हाथों और अंगुलियों में ज्यादा देखी जाती है। इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस यानी सूजन संबंधी गठिया में शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र खराब होकर जोड़ों पर हमला करता है। यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से रूमेटॉइड आर्थराइटिस रोग होता है जो जोड़ों की परत पर हमला करता है। इसके अलावा संक्रामक के कारण भी गठिया हो सकता है जिसमें बैक्टीरिया जोड़ों को प्रभावित करते हैं।
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लक्षण और इलाज
जोड़ों में दर्द खासकर घुटनों में सूजन और अकड़न, चलने-फिरने में दिक्कत, सीढ़ियां चढ़ने या बैठने-उठने में परेशानी, जोड़ों का विकृत होना, सुबह ज्यादा अकड़न महसूस होना आदि लक्षण है। इसका इलाज प्रकार और चरण पर निर्भर करता है। शुरुआती चरण में वजन घटाना, फिजियोथेरेपी और व्यायाम, मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले आसन की सलाह दी जाती है। कम दर्द या संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दवा दी जाती है। यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए आहार और औषधि दी जाती है। गंभीर स्थिति में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी करनी पड़ती है।
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वजन नियंत्रित रखें, रोजाना कसरत करें, कैल्शियम और विटामिन डी युक्त आहार लें। लंबे समय तक एक जगह पर न बैठें। ज्यादा भारी वजन उठाने से बचें। सही आसन बनाए रखें। समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं ।
- डॉ. सयार अहमद, असिस्टेंट प्रोफेसर, जीएमसी।