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मिड-डे-मील बनाने वाले कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
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उधमपुर। स्थायी कर्मचारी बनाने, मानदेय बढ़ाने व अन्य लंबित मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर मिड-डे-मील बनाने वाले कर्मचारियों ने रविवार को शहीद भगत सिंह पार्क में एकजुट होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो मजबूरन मीड-डे-मील बनाना बंद करना पड़ेगा।
दोपहर करीब 12 बजे मिड-डे-मील यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान नीलम देवी व अन्य ने बताया कि सरकार की तरफ से उनको मिड-डे-मील बनाने के लिए एक दिन के हिसाब से 30 रुपये दिए जाते हैं। महीने में उनको करीब 900 रुपये मिलते हैं। उनको स्कूलों में काम करते हुए 15 वर्ष से अधिक हो गए हैं और अभी तक उनको न तो स्थायी कर्मचारी बनाने को कोई योजना तैयार की गई है और न ही मानदेय बढ़ाने को लेकर कुछ किया जा रहा है। उनको शिक्षा विभाग की तरफ से कम से कम मनरेगा की दिहाड़ी जितनी राशि तो दे देनी चाहिए। उनके लिए अब 900 रुपये मानदेय में काम करना संभव नहीं हो पा रहा है। इस राशि से तो यात्री वाहन का किराया भी पूरा नहीं हो सकता, इसलिए उनकी मांग है कि जल्द से जल्द उनको स्थायी कर्मचारी बनाने के लिए कोई नीति तैयार की जाए और अगर स्थायी नहीं बनाना है तो मानदेय में बढ़ोतरी कर राहत प्रदान की जाए।
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दोपहर करीब 12 बजे मिड-डे-मील यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान नीलम देवी व अन्य ने बताया कि सरकार की तरफ से उनको मिड-डे-मील बनाने के लिए एक दिन के हिसाब से 30 रुपये दिए जाते हैं। महीने में उनको करीब 900 रुपये मिलते हैं। उनको स्कूलों में काम करते हुए 15 वर्ष से अधिक हो गए हैं और अभी तक उनको न तो स्थायी कर्मचारी बनाने को कोई योजना तैयार की गई है और न ही मानदेय बढ़ाने को लेकर कुछ किया जा रहा है। उनको शिक्षा विभाग की तरफ से कम से कम मनरेगा की दिहाड़ी जितनी राशि तो दे देनी चाहिए। उनके लिए अब 900 रुपये मानदेय में काम करना संभव नहीं हो पा रहा है। इस राशि से तो यात्री वाहन का किराया भी पूरा नहीं हो सकता, इसलिए उनकी मांग है कि जल्द से जल्द उनको स्थायी कर्मचारी बनाने के लिए कोई नीति तैयार की जाए और अगर स्थायी नहीं बनाना है तो मानदेय में बढ़ोतरी कर राहत प्रदान की जाए।
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