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शहीद इंस्पेक्टर कमल सिंह पर बना वृत्तचित्र रिलीज
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उधमपुर। जोनल इंचार्ज कल्चरल सेल जोन जिब उधमपुर ने रविवार को मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल बॉयज उधमपुर का नाम बदलकर शहीद इंस्पेक्टर कमल सिंह मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल बॉयज उधमपुर रखने पर एक वृत्तचित्र रिलीज किया। इस वृत्तचित्र से शहीद की जीवनी पर विस्तार से रोशनी डाली गई।
वृत्तचित्र में दिखा गया कि देश की खातिर प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के नाम पर सरकारी संस्थानों और सड़कों का नाम बदलने के लिए सरकार की पहल शहीदों को एक वास्तविक श्रद्धांजलि है। इस संदर्भ में जम्मू कश्मीर के सबसे पुराने शैक्षणिक संस्थानों में से एक गवर्नमेंट मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल बॉयज उधमपुर का नाम बदलकर शहीद इंस्पेक्टर कमल सिंह मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल नाम पर रखा गया है। इंस्पेक्टर कमल सिंह ने 12 मार्च 2001 को कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए अपने जीवन का बलिदान दिया।
वह वार्ड 11 रघुनाथ पुरा उधमपुर के निवासी थे। पुलिस में वह एक कांस्टेबल के रूप में शामिल हुए, और उनकी शहादत के समय इंस्पेक्टर के रूप में पदोन्नत हुए। इसके अलावा वह इसी स्कूल के पूर्व छात्र थे। मुख्य शिक्षा अधिकारी उधमपुर अरविन कुमार कौल ने जोनल इंचार्ज के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों की शहादत को कभी नहीं भूलेगा। यह समाज और परिवार के लिए गर्व की बात है, और प्रेरणा का स्रोत है।
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वृत्तचित्र में दिखा गया कि देश की खातिर प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के नाम पर सरकारी संस्थानों और सड़कों का नाम बदलने के लिए सरकार की पहल शहीदों को एक वास्तविक श्रद्धांजलि है। इस संदर्भ में जम्मू कश्मीर के सबसे पुराने शैक्षणिक संस्थानों में से एक गवर्नमेंट मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल बॉयज उधमपुर का नाम बदलकर शहीद इंस्पेक्टर कमल सिंह मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल नाम पर रखा गया है। इंस्पेक्टर कमल सिंह ने 12 मार्च 2001 को कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए अपने जीवन का बलिदान दिया।
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वह वार्ड 11 रघुनाथ पुरा उधमपुर के निवासी थे। पुलिस में वह एक कांस्टेबल के रूप में शामिल हुए, और उनकी शहादत के समय इंस्पेक्टर के रूप में पदोन्नत हुए। इसके अलावा वह इसी स्कूल के पूर्व छात्र थे। मुख्य शिक्षा अधिकारी उधमपुर अरविन कुमार कौल ने जोनल इंचार्ज के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों की शहादत को कभी नहीं भूलेगा। यह समाज और परिवार के लिए गर्व की बात है, और प्रेरणा का स्रोत है।
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