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जंगल की आग के नियंत्रण उपायों पर हुई चर्चा
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कटड़ा। श्री माता वैष्णो देवी वन क्षेत्र में आसपास लगातार बढ़ रही आग के घटनाओं को देखते हुए श्राइन बोर्ड सीईओ अंशुल गर्ग ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ एक बैठक की। इस दौरान त्रिकुटा पहाड़ियों में जंगल की आग के नियंत्रण उपायों पर संक्षेप में चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि तापमान में जल्दी वृद्धि और त्रिकुटा पहाड़ियों पर अक्सर बारिश नहीं होने के कारण आग की घटनाएं होती हैं। यह निर्णय लिया गया कि वन विभाग और संबद्ध विंग सहित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को आग की रोकथाम में सहायता करेंगे। बैठक के बाद अधिकारियों ने वन क्षेत्र का भी दौरा किया।
पवित्र त्रिकुटा पहाड़ियों के जंगलों से चीड़ की सुखी पत्तियां जंगल की आग के प्रमुख कारणों में से एक हैं। गर्मी के मौसम में आग के लिए पत्तियां ईंधन की तरह काम करती हैं। इसके अलावा पीसीसीएफ ने कुशल ब्रिकेट बनाने में चीड़ की पत्तियाें का उपयोग करने पर जोर दिया। हस्तशिल्प ब्रिकेट बनाने के लिए यह सूखी पत्तियां बहुत ही अच्छी हैं। इसके साथ ही तत्काल उपाय के रूप में त्रिकुटा पहाड़ी क्षेत्र में मानसून की पहली बारिश होने तक 40 अग्निशमन कर्मियों को तत्काल लगाया जाएगा। वहीं इस मौके पर श्राइन बोर्ड के अतिरिक्त सीइओ, बीएम शर्मा आईएसएफ, टीएस अशोक कुमार आईएसएफ, जिला वन अधिकारी ज्योत्सना आईएसएफ, वरिष्ठ वन अधिकारी विवेक वर्मा, आईएफएस, सीएफ, जम्मू वेस्ट सर्कल, डा. अर्शदीप सिंह, आईएफएस, डीएफओ राजौरी और नीलिमा शाह, आईएफएस, डीएफओ नौशेरा भी उपलब्ध रहे।
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पवित्र त्रिकुटा पहाड़ियों के जंगलों से चीड़ की सुखी पत्तियां जंगल की आग के प्रमुख कारणों में से एक हैं। गर्मी के मौसम में आग के लिए पत्तियां ईंधन की तरह काम करती हैं। इसके अलावा पीसीसीएफ ने कुशल ब्रिकेट बनाने में चीड़ की पत्तियाें का उपयोग करने पर जोर दिया। हस्तशिल्प ब्रिकेट बनाने के लिए यह सूखी पत्तियां बहुत ही अच्छी हैं। इसके साथ ही तत्काल उपाय के रूप में त्रिकुटा पहाड़ी क्षेत्र में मानसून की पहली बारिश होने तक 40 अग्निशमन कर्मियों को तत्काल लगाया जाएगा। वहीं इस मौके पर श्राइन बोर्ड के अतिरिक्त सीइओ, बीएम शर्मा आईएसएफ, टीएस अशोक कुमार आईएसएफ, जिला वन अधिकारी ज्योत्सना आईएसएफ, वरिष्ठ वन अधिकारी विवेक वर्मा, आईएफएस, सीएफ, जम्मू वेस्ट सर्कल, डा. अर्शदीप सिंह, आईएफएस, डीएफओ राजौरी और नीलिमा शाह, आईएफएस, डीएफओ नौशेरा भी उपलब्ध रहे।
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