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Udhampur News: गुज्जर बकरवाल समुदाय का प्रदर्शन, कहा-वन अधिकार अधिनियम लागू किया जाए
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उधमपुर। ऑल जम्मू एंड कश्मीर गुज्जर बकरवाल कांफ्रेंस के बैनर तले शुक्रवार को उधमपुर के जखैनी चौक में गुज्जर-बकरवाल समुदाय के लोगों ने वन अधिकार अधिनियम को जमीनी स्तर पर लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने कागजों में तो वन अधिकार अधिनियम को लागू कर दिया है, लेकिन वास्तविकता में इसका लाभ आज तक समुदाय को नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन क्षेत्रों में वर्षों से रह रहे गुज्जर-बकरवाल परिवारों को आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। भूमि, आवास, चरागाह और आजीविका से जुड़े अधिकारों को लेकर लगातार अनदेखी हो रही है।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ऑल जम्मू एंड कश्मीर गुज्जर बकरवाल कांफ्रेंस के जिला अध्यक्ष मोहम्मद रियाज अहमद ने कहा कि फॉरेस्ट राइट एक्ट का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले गुज्जर बकरवालों को उनके वैध अधिकार दिलाना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कई परिवारों को आज भी बेदखली का डर सताता रहता है, वहीं पशुपालन और रोजमर्रा की गतिविधियों में भी लगातार बाधाएं आ रही हैं। इसका सीधा असर उनके गुजर-बसर पर पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने जम्मू कश्मीर में वन अधिकार अधिनियम को लागू करने की घोषणा की थी लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लागू नहीं किया गया है। इसके कारण हमारे समुदाय के लोगों को हमेशा बेदखली का डर लगा रहता है। वनों में गुजर बसर करने में परेशानी पेश आती है, कभी भी कहीं से हटा दिए जाते हैं। वनों में गुजर बसर करना हमारी पंरपरा रही है और इन्हीं में रहकर हम अपने मवेशियों का पालन पोषण कर अपनी अजीविका चलाते हैं और वनों की सुरक्षा भी करते हैं। इसलिए अगर यह कानून सही तरीके से लागू किया जाए तो समुदाय को स्थायित्व, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन मिल सकता है। उन्होंने जेके यूटी सरकार से अपील करते हुए कहा कि जल्द से जल्द वन अधिकार अधिनियम को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए। उम्मीद जताई कि सरकार उनकी आवाज सुनेगी और उन्हें वर्षों से लंबित अधिकार शीघ्र प्रदान किए जाएंगे।
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प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने कागजों में तो वन अधिकार अधिनियम को लागू कर दिया है, लेकिन वास्तविकता में इसका लाभ आज तक समुदाय को नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन क्षेत्रों में वर्षों से रह रहे गुज्जर-बकरवाल परिवारों को आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। भूमि, आवास, चरागाह और आजीविका से जुड़े अधिकारों को लेकर लगातार अनदेखी हो रही है।
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प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ऑल जम्मू एंड कश्मीर गुज्जर बकरवाल कांफ्रेंस के जिला अध्यक्ष मोहम्मद रियाज अहमद ने कहा कि फॉरेस्ट राइट एक्ट का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले गुज्जर बकरवालों को उनके वैध अधिकार दिलाना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कई परिवारों को आज भी बेदखली का डर सताता रहता है, वहीं पशुपालन और रोजमर्रा की गतिविधियों में भी लगातार बाधाएं आ रही हैं। इसका सीधा असर उनके गुजर-बसर पर पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने जम्मू कश्मीर में वन अधिकार अधिनियम को लागू करने की घोषणा की थी लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लागू नहीं किया गया है। इसके कारण हमारे समुदाय के लोगों को हमेशा बेदखली का डर लगा रहता है। वनों में गुजर बसर करने में परेशानी पेश आती है, कभी भी कहीं से हटा दिए जाते हैं। वनों में गुजर बसर करना हमारी पंरपरा रही है और इन्हीं में रहकर हम अपने मवेशियों का पालन पोषण कर अपनी अजीविका चलाते हैं और वनों की सुरक्षा भी करते हैं। इसलिए अगर यह कानून सही तरीके से लागू किया जाए तो समुदाय को स्थायित्व, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन मिल सकता है। उन्होंने जेके यूटी सरकार से अपील करते हुए कहा कि जल्द से जल्द वन अधिकार अधिनियम को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए। उम्मीद जताई कि सरकार उनकी आवाज सुनेगी और उन्हें वर्षों से लंबित अधिकार शीघ्र प्रदान किए जाएंगे।