{"_id":"614f7b618ebc3e09d672603d","slug":"cultural-udhampur-news-jmu2444366193","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमद्भागवत कथा में दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमद्भागवत कथा में दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उधमपुर/जिब। कथावाचक सुभाष शास्त्री की तरफ से जिब में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद उठाया। सुभाष शास्त्री ने श्रद्धालुओं को कथा में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और सभी को प्रभु की भक्ति कर जीवन व्यतीत करने को प्रेरित किया।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए एक प्रसंग सुनाया। बताया कि संत कबीर का बेटा कमाल घास काटने जंगल की तरफ गया और शाम तक घर नहीं लौटा। कबीर चिंतित हो गए और वह उसको खोजते हुए जंगल की तरफ चले गए। जंगल पहुंच कर उन्होंने देखा कि बेटा घास के पास चुपचाप खड़ा है और घास को देखे जा रहा है।
कबीर ने उसे हिलाया और पूछा कि क्या कर रह हो। कमाल बोला कि किसे काटू, क्या अपने आप को काटू। जैसी प्राणधारा मेरे अंदर प्रवाहित हो रही है, वैसी ही इस घास के अंदर भी हो रही है। अब कमाल घास नहीं काट सकता है। हमें इस प्रसंग से यह समझ लेना चाहिए कि मानव जीवन की तरह पेड़ पौधों में भी प्राणधारा प्रवाहित होती है।
विज्ञापन
प्रकृति को नुकसान पहुंचा कर हम संपूर्ण मानव जाति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रकृति को बचाने के लिए हम सभी को मिल कर प्रयास करने होंगे। इसी से मानव जाति की रक्षा की जा सकती है। यह हमारा नैतिक दायित्व है। अंत में शास्त्री ने कहा कि अभी भी समय है कि हमें चेत जाना चाहिए और पर्यावरण की रक्षा हेतु पेड़ पौधों को अपनी संतान या अपने पूर्वजों की तरह सम्मान देकर रक्षा करनी चाहिए। हर मानव को अपने जीवन काल में कम से कम दस पौधे जरूर लगाने चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए एक प्रसंग सुनाया। बताया कि संत कबीर का बेटा कमाल घास काटने जंगल की तरफ गया और शाम तक घर नहीं लौटा। कबीर चिंतित हो गए और वह उसको खोजते हुए जंगल की तरफ चले गए। जंगल पहुंच कर उन्होंने देखा कि बेटा घास के पास चुपचाप खड़ा है और घास को देखे जा रहा है।
विज्ञापन
कबीर ने उसे हिलाया और पूछा कि क्या कर रह हो। कमाल बोला कि किसे काटू, क्या अपने आप को काटू। जैसी प्राणधारा मेरे अंदर प्रवाहित हो रही है, वैसी ही इस घास के अंदर भी हो रही है। अब कमाल घास नहीं काट सकता है। हमें इस प्रसंग से यह समझ लेना चाहिए कि मानव जीवन की तरह पेड़ पौधों में भी प्राणधारा प्रवाहित होती है।
विज्ञापन
प्रकृति को नुकसान पहुंचा कर हम संपूर्ण मानव जाति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रकृति को बचाने के लिए हम सभी को मिल कर प्रयास करने होंगे। इसी से मानव जाति की रक्षा की जा सकती है। यह हमारा नैतिक दायित्व है। अंत में शास्त्री ने कहा कि अभी भी समय है कि हमें चेत जाना चाहिए और पर्यावरण की रक्षा हेतु पेड़ पौधों को अपनी संतान या अपने पूर्वजों की तरह सम्मान देकर रक्षा करनी चाहिए। हर मानव को अपने जीवन काल में कम से कम दस पौधे जरूर लगाने चाहिए।