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सत्य का संग करने से मिलती है सही राह
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उधमपुर/जिब। कथावाचक सुभाष शास्त्री की तरफ से शुक्रवार को जिब इलाके में नरसिंह देव पब्लिक अकादमी में श्रीमद्भागवत कथा की शुरूआत की गई। कथा का आनंद उठाने के लिए बहुत ज्यादा संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा को आरंभ करने से पहले कलश यात्रा निकाल गई। इसमें काफी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया।
सुबह के समय स्कूल से कलश यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने कलश सर पर जिब के विभिन्न हिस्सों पर पहुंची। इसके बाद नरसिंह देव पब्लिक अकादमी में पहुंच कर कलश यात्रा संपन्न हुई। इसके बाद कथा की शुरूआत की गई। पहले दिन कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कथा सुनाते हुए कहा कि संतों का संग करने से जीवन के सही उद्देश्य का पता चलता है, जबकि कुसंग का संग करने से जीवन का सर्वनाश हो जाता है। इससे पूरा भविष्य खराब हो सकता है।
संतों का संग करने से जीवन के सत्य का पता चलता है और मानव सेवा, सुमिरण और सत्संग के साथ जड़ कर जीवन व्यतीत करता है। उन्होंने कहा कि जो भीतर से सजग हैं वह संसारी होते हुए भी सन्यासी होते हैं और जो भीतर से सजग नहीं है वह सन्यासी होते हुए भी माया में लिप्त संसारी है। जागरण का नाम सन्यास है। जैसे चुंबक लोहे को खींचता है। वैसे ही सन्यास सत्य को खींचता है।
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सन्यास का अर्थ यह नहीं है कि घर बार छोड़ने वाला ही सन्यासी होता है। असर में जो इस संसार में रहते हुए गृहस्थ जीवन का पालन करता है। सत्य के मार्ग पर चलता है। वही ही सही मायने में सन्यासी होता है। उन्होंने सभी से कहा कि हमेशा सत्य का संग करे और कुसंग लोगों से दूर रहे।
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सुबह के समय स्कूल से कलश यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने कलश सर पर जिब के विभिन्न हिस्सों पर पहुंची। इसके बाद नरसिंह देव पब्लिक अकादमी में पहुंच कर कलश यात्रा संपन्न हुई। इसके बाद कथा की शुरूआत की गई। पहले दिन कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कथा सुनाते हुए कहा कि संतों का संग करने से जीवन के सही उद्देश्य का पता चलता है, जबकि कुसंग का संग करने से जीवन का सर्वनाश हो जाता है। इससे पूरा भविष्य खराब हो सकता है।
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संतों का संग करने से जीवन के सत्य का पता चलता है और मानव सेवा, सुमिरण और सत्संग के साथ जड़ कर जीवन व्यतीत करता है। उन्होंने कहा कि जो भीतर से सजग हैं वह संसारी होते हुए भी सन्यासी होते हैं और जो भीतर से सजग नहीं है वह सन्यासी होते हुए भी माया में लिप्त संसारी है। जागरण का नाम सन्यास है। जैसे चुंबक लोहे को खींचता है। वैसे ही सन्यास सत्य को खींचता है।
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सन्यास का अर्थ यह नहीं है कि घर बार छोड़ने वाला ही सन्यासी होता है। असर में जो इस संसार में रहते हुए गृहस्थ जीवन का पालन करता है। सत्य के मार्ग पर चलता है। वही ही सही मायने में सन्यासी होता है। उन्होंने सभी से कहा कि हमेशा सत्य का संग करे और कुसंग लोगों से दूर रहे।