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महिलाओं ने धूमधाम से मनाया बच्छ दुआ पर्व
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उधमपुर/चिनैनी/कटड़ा। विभिन्न स्थानों पर शुक्रवार को महिलाओं ने बच्छ दुआ पर्व मनाय। इस दौरान महिलाओं ने गाय व बछड़े के स्वरूप को बनाया और उसकी पूजा की। इसके बाद परिवार की सुख-शांति, समृद्धि के साथ बच्चों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की।
बछ दुआ पर्व को लेकर सुबह छह बजे से ही देविका तट पर महिलाओं का पहुंचना शुरू हो गया था। दिन बढ़ने के साथ ही महिलाओं की संख्या में भी इजाफा होता गया। दोपहर को तो इतनी ज्यादा भीड़ थी कि महिलाओं को तट पर खड़े रहने का भी स्थान नहीं मिल रहा था। देविका तट पर पहुंची ममता देवी, कौशल्या देवी व अन्य महिलाओं ने बताया कि डोगरों के लिए बच्छ दुआ का पर्व बहुत ही ज्यादा महत्व रखता है।
पूजन में विशेष तौर पर 13 प्रकार के फलों को इस्तेमाल किया जाता है, इसके साथ 13 छोटे पत्थर और द्रव रखे जाते हैं। इसके साथ ही कथा सुना कर आज के दिन के बारे में महिलाओं को विस्तार से बताया जाता है। कई महिलाएं देविका तट पर बैंड बाजे के साथ पहुंची थी। महिलाओं ने बैंड बाजा साथ बच्छ दुआ पर्व का ही एक हिस्सा है।
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इस व्रत के जरिए बच्चे की लंबी उम्र के साथ सुनहरे भविष्य की प्रार्थना की जाती है और विशेष तौर पर भगवान कृष्ण के मंदिर में पूजन किया जाता है। इस अवसर पर महिलाओं ने दानपुण्य भी किया। वहीं ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने पवित्र बावलियों पर जाकर गाय व बछड़े की आटे के साथ प्रतिमा बनाकर पूजन किया व लोक आस्था के साथ मीठे मीठे रोट चढ़ाए। साथ हीं बच्चों सहित परिवार की सुख शांति की कामना की।
चिनैनी क्षेत्र में भी बच्छ दुआ का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। सुबह से दोपहर तक महिलाओं ने बाबली पर पहुंचकर पूजा अर्चना की। चिनैनी के मुक्तेश्वर महादेव मंदिर की बाबली, कुसमुसी बाबली, सुद्धमहादेव, गौरीकुंड व अन्य स्थानों पर पूजा-अर्चना कर माथा टेका। पंडित मदन लाल शर्मा ने बताया कि इस दिन गाय की पूजा की जाती है तथा बावली पर पूजा कर संतान की लंबी आयु मांगी जाती है। कटड़ा में भी बच्छ दुआ धूमधाम से मनाया गया। पवित्र भूमिका मंदिर के साथ ही बाणगंगा नदी पहुंचकर पूजा अर्चना की।
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बछ दुआ पर्व को लेकर सुबह छह बजे से ही देविका तट पर महिलाओं का पहुंचना शुरू हो गया था। दिन बढ़ने के साथ ही महिलाओं की संख्या में भी इजाफा होता गया। दोपहर को तो इतनी ज्यादा भीड़ थी कि महिलाओं को तट पर खड़े रहने का भी स्थान नहीं मिल रहा था। देविका तट पर पहुंची ममता देवी, कौशल्या देवी व अन्य महिलाओं ने बताया कि डोगरों के लिए बच्छ दुआ का पर्व बहुत ही ज्यादा महत्व रखता है।
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पूजन में विशेष तौर पर 13 प्रकार के फलों को इस्तेमाल किया जाता है, इसके साथ 13 छोटे पत्थर और द्रव रखे जाते हैं। इसके साथ ही कथा सुना कर आज के दिन के बारे में महिलाओं को विस्तार से बताया जाता है। कई महिलाएं देविका तट पर बैंड बाजे के साथ पहुंची थी। महिलाओं ने बैंड बाजा साथ बच्छ दुआ पर्व का ही एक हिस्सा है।
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इस व्रत के जरिए बच्चे की लंबी उम्र के साथ सुनहरे भविष्य की प्रार्थना की जाती है और विशेष तौर पर भगवान कृष्ण के मंदिर में पूजन किया जाता है। इस अवसर पर महिलाओं ने दानपुण्य भी किया। वहीं ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने पवित्र बावलियों पर जाकर गाय व बछड़े की आटे के साथ प्रतिमा बनाकर पूजन किया व लोक आस्था के साथ मीठे मीठे रोट चढ़ाए। साथ हीं बच्चों सहित परिवार की सुख शांति की कामना की।
चिनैनी क्षेत्र में भी बच्छ दुआ का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। सुबह से दोपहर तक महिलाओं ने बाबली पर पहुंचकर पूजा अर्चना की। चिनैनी के मुक्तेश्वर महादेव मंदिर की बाबली, कुसमुसी बाबली, सुद्धमहादेव, गौरीकुंड व अन्य स्थानों पर पूजा-अर्चना कर माथा टेका। पंडित मदन लाल शर्मा ने बताया कि इस दिन गाय की पूजा की जाती है तथा बावली पर पूजा कर संतान की लंबी आयु मांगी जाती है। कटड़ा में भी बच्छ दुआ धूमधाम से मनाया गया। पवित्र भूमिका मंदिर के साथ ही बाणगंगा नदी पहुंचकर पूजा अर्चना की।