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Udhampur News: माता तुलसी के विवाह पर मंदिरों में उमड़ी भीड़
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उधमपुर। माता तुलसी के विवाह पर्व के चलते विभिन्न स्थानों में पूजा अर्चना की गई। इसमें माता तुलसी की पूजा करने सहित महिलाओं ने व्रत भी रखा। घरों में स्थापित तुलसी माता के साथ ही विभिन्न मंदिरों में भी तुलसी विवाह पूजा के साथ व्रत पूरा किया गया।
शहर के बीचों बीच स्थित पांडव मंदिर में तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। इसके चलते महिलाएं मंदिर परिसर में पहुंच कर माता तुलसी पर चुनरी चढ़ा कर उसकी पूजा अर्चना की। वहीं मंदिर में आई महिलाओं ने तुलसी के पौधे पर मूली, गन्ना, बैंगन, बेर सहित अन्य कई तरह के प्रसाद चढ़ाने के बाद हाथों में दीपक लेकर चक्कर काटे। वहीं इस मौके पर लोग अपने घरों में मीठे पकवान बनाए जाते है। इस बारे में सत नारायण मंदिर लंबी गली के पुजारी पंडित सुदर्शन कुमार शर्मा ने बताया कि सुकंद पुराण, शिव पुराण व पदम पुराण में इतिहास कहा गया है कि तुलसी का नाम वृंदा था और यह विष्णु भगवान की भगत थी। इसका जन्म कालनेवी राक्षसों के घर में इसका जन्म हुआ था और कॉलनेवी इसके पिता थे इसका विवाह जलंधर के साथ शादी हुई। जलंधर का वद हो गया और यह भस्म हो गई। जहां पर इसकी भस्म थी वहीं पर तुलसी माता का पौधा हुआ। और शाप दिया की भगवान विष्णु जी ने शाली ग्राम का रूप धारण इनके साथ हर साल विवाह करते है। उन्होंने बताया कि इनकी परदखना करने से मानव को शांति मिलती है। तुलसी माता का विवाह कार्तिक माह में किया जाता है और इसके साथ आमली का पूजन भी किया जाता है। इसके चलते महिलाएं अपने घरों में लगाए गए तुलसी माता के पौधे का श्रंगृार करती है। उन्होंने बताया कि हर घर में तुलसी माता का पौधा लगाया जाता है। वहीं मंदिर परिसर में तुलसी विवाह के चलते लोगों की काफी भीड़ देखने को मिली।
फोटो सहित
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शहर के बीचों बीच स्थित पांडव मंदिर में तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। इसके चलते महिलाएं मंदिर परिसर में पहुंच कर माता तुलसी पर चुनरी चढ़ा कर उसकी पूजा अर्चना की। वहीं मंदिर में आई महिलाओं ने तुलसी के पौधे पर मूली, गन्ना, बैंगन, बेर सहित अन्य कई तरह के प्रसाद चढ़ाने के बाद हाथों में दीपक लेकर चक्कर काटे। वहीं इस मौके पर लोग अपने घरों में मीठे पकवान बनाए जाते है। इस बारे में सत नारायण मंदिर लंबी गली के पुजारी पंडित सुदर्शन कुमार शर्मा ने बताया कि सुकंद पुराण, शिव पुराण व पदम पुराण में इतिहास कहा गया है कि तुलसी का नाम वृंदा था और यह विष्णु भगवान की भगत थी। इसका जन्म कालनेवी राक्षसों के घर में इसका जन्म हुआ था और कॉलनेवी इसके पिता थे इसका विवाह जलंधर के साथ शादी हुई। जलंधर का वद हो गया और यह भस्म हो गई। जहां पर इसकी भस्म थी वहीं पर तुलसी माता का पौधा हुआ। और शाप दिया की भगवान विष्णु जी ने शाली ग्राम का रूप धारण इनके साथ हर साल विवाह करते है। उन्होंने बताया कि इनकी परदखना करने से मानव को शांति मिलती है। तुलसी माता का विवाह कार्तिक माह में किया जाता है और इसके साथ आमली का पूजन भी किया जाता है। इसके चलते महिलाएं अपने घरों में लगाए गए तुलसी माता के पौधे का श्रंगृार करती है। उन्होंने बताया कि हर घर में तुलसी माता का पौधा लगाया जाता है। वहीं मंदिर परिसर में तुलसी विवाह के चलते लोगों की काफी भीड़ देखने को मिली।
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