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Udhampur News: ठगी गई 25000 की राशि पीड़ित महिला के पक्ष में जारी करने के दिए आदेश
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- अदालत से ... का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। साइबर धोखाधड़ी की शिकार हुई महिला से ठगी गई 25,000 की राशि को अदालत ने बैंक अधिकारियों को पीड़ित महिला के हित जारी करने के आदेश दिए हैं। महिला से एक हल्फनामा भी दाखिल करवाया गया है। इसके तहत अगर भविष्य में कोई उसका असली दावेदार सामने आता है तो उसे यह राशि वापस करनी होगी।
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकार हुई महिला नेहा राणा की ओर से शिकायत करने पर प्राथमिक जांच में धोखेबाज के खाते को फ्रीज कर दिया गया। यह राशि अब धोखेबाज के खाते में है। अदालत में दलील दी गई कि आवेदक महिला ही इसका वास्तविक दावेदार है। यदि इसे आवेदक के पक्ष में जारी नहीं किया जाता है, तो उसे अपूरणीय क्षति होगी जिसकी भरपाई बाद में किसी भी तरह से नहीं की जा सकेगी। अदालत से राशि उसके पक्ष में जारी करने के लिए प्रार्थना की गई।
साइबर सेल उधमपुर की रिपोर्ट में पता चला कि अज्ञात जालसाज ने धोखाधड़ी से शिकायतकर्ता के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 25,000 रुपये की राशि हस्तांतरित कर अपने खाते में जमा कर दी। इसके चलते आरोपी का खाता जांच के दौरान फ्रीज कर दिया गया है जिसमें राशि मौजूद थी। आवेदक नेहा राणा की 25,000 रुपये की राशि को संबंधित बैंक ने रोक लिया जिसे आरोपी धोखेबाज के कहने पर स्थानांतरित किया गया था।
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जांच में पाया गया कि धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति के खातों में पड़ी राशि आवेदक के खाते से स्थानांतरित की गई थी। जबकि आवेदक अपने पक्ष में राशि जारी करने के लिए किसी भी शर्त का पालन करने के लिए तैयार है, इसलिए अदालत ने संबंधित बैंक के प्रबंधक को निर्देश दिया कि पुलिस स्टेशन उधमपुर के साइबर जांच अधिकारी के माध्यम से आवेदक के पक्ष में 25,000 रुपये की उपरोक्त राशि जारी करें।
गौरतलब है कि जिला पुलिस के साइबर सेल की ओर से अब तक कुल 37,55,715 रुपये की वसूली की जा चुकी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। साइबर धोखाधड़ी की शिकार हुई महिला से ठगी गई 25,000 की राशि को अदालत ने बैंक अधिकारियों को पीड़ित महिला के हित जारी करने के आदेश दिए हैं। महिला से एक हल्फनामा भी दाखिल करवाया गया है। इसके तहत अगर भविष्य में कोई उसका असली दावेदार सामने आता है तो उसे यह राशि वापस करनी होगी।
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकार हुई महिला नेहा राणा की ओर से शिकायत करने पर प्राथमिक जांच में धोखेबाज के खाते को फ्रीज कर दिया गया। यह राशि अब धोखेबाज के खाते में है। अदालत में दलील दी गई कि आवेदक महिला ही इसका वास्तविक दावेदार है। यदि इसे आवेदक के पक्ष में जारी नहीं किया जाता है, तो उसे अपूरणीय क्षति होगी जिसकी भरपाई बाद में किसी भी तरह से नहीं की जा सकेगी। अदालत से राशि उसके पक्ष में जारी करने के लिए प्रार्थना की गई।
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साइबर सेल उधमपुर की रिपोर्ट में पता चला कि अज्ञात जालसाज ने धोखाधड़ी से शिकायतकर्ता के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 25,000 रुपये की राशि हस्तांतरित कर अपने खाते में जमा कर दी। इसके चलते आरोपी का खाता जांच के दौरान फ्रीज कर दिया गया है जिसमें राशि मौजूद थी। आवेदक नेहा राणा की 25,000 रुपये की राशि को संबंधित बैंक ने रोक लिया जिसे आरोपी धोखेबाज के कहने पर स्थानांतरित किया गया था।
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जांच में पाया गया कि धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति के खातों में पड़ी राशि आवेदक के खाते से स्थानांतरित की गई थी। जबकि आवेदक अपने पक्ष में राशि जारी करने के लिए किसी भी शर्त का पालन करने के लिए तैयार है, इसलिए अदालत ने संबंधित बैंक के प्रबंधक को निर्देश दिया कि पुलिस स्टेशन उधमपुर के साइबर जांच अधिकारी के माध्यम से आवेदक के पक्ष में 25,000 रुपये की उपरोक्त राशि जारी करें।
गौरतलब है कि जिला पुलिस के साइबर सेल की ओर से अब तक कुल 37,55,715 रुपये की वसूली की जा चुकी है।