{"_id":"69ab37bce9de4bc2290b077e","slug":"court-order-divorce-udhampur-news-c-202-1-sjam1011-133312-2026-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुलह की गुंजाइश खत्म : नहीं दूर हो सका मतभेद, पांच साल बाद तलाक मंजूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुलह की गुंजाइश खत्म : नहीं दूर हो सका मतभेद, पांच साल बाद तलाक मंजूर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अदालत का फैसला : मां के साथ रहेगा छह साल का बेटा, गुजारे भत्ते का दावा नहीं करेंगे दोनों पक्ष
उधमपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से दायर तलाक की याचिका मंजूर कर ली है। अदालत ने माना कि दंपति के बीच मतभेद के कारण रिश्ता इस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से वापसी संभव नहीं है।
फैसले के अनुसार अब दोनों पक्ष एक-दूसरे से भरण-पोषण या स्थायी गुजारे भत्ते का दावा नहीं करेंगे और अपना खर्च खुद वहन करेंगे। अंजू और उसके पति रिंकू की शादी 7 दिसंबर 2018 को हुई थी। कुछ समय बाद विवाद शुरू हो गया और दोनों पांच साल से अधिक समय से अलग रह रहे थे। परिवार और मित्रों द्वारा रिश्ते को बचाने के प्रयास किए गए लेकिन सुलह की कोई संभावना नहीं बची। दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया।
बेटे की कस्टडी और भरण-पोषण पर सहमति
संयुक्त याचिका में दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि उनका बेटा मां के साथ रहेगा। पत्नी ने अदालत में दोहराया कि वह अपने या बेटे के लिए पति से भरण-पोषण या गुजारे भत्ते का दावा नहीं करेगी। दोनों पक्षों के बीच सभी वित्तीय हिसाब-किताब पहले ही निपटाए जा चुके हैं।
विज्ञापन
अदालत ने माफ की वेटिंग पीरियड की अवधि
धारा 13-बी (2) के तहत निर्धारित छह महीने की कूलिंग-ऑफ पीरियड (शीतघ्र विराम अवधि) को माफ करने के लिए 8 दिसंबर 2025 को आवेदन दिया गया था। अदालत ने मामले की गंभीरता और रिश्ते के पूरी तरह टूट जाने की स्थिति को देखते हुए इसे स्वीकार कर लिया।
विज्ञापन
उधमपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से दायर तलाक की याचिका मंजूर कर ली है। अदालत ने माना कि दंपति के बीच मतभेद के कारण रिश्ता इस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से वापसी संभव नहीं है।
फैसले के अनुसार अब दोनों पक्ष एक-दूसरे से भरण-पोषण या स्थायी गुजारे भत्ते का दावा नहीं करेंगे और अपना खर्च खुद वहन करेंगे। अंजू और उसके पति रिंकू की शादी 7 दिसंबर 2018 को हुई थी। कुछ समय बाद विवाद शुरू हो गया और दोनों पांच साल से अधिक समय से अलग रह रहे थे। परिवार और मित्रों द्वारा रिश्ते को बचाने के प्रयास किए गए लेकिन सुलह की कोई संभावना नहीं बची। दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
बेटे की कस्टडी और भरण-पोषण पर सहमति
संयुक्त याचिका में दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि उनका बेटा मां के साथ रहेगा। पत्नी ने अदालत में दोहराया कि वह अपने या बेटे के लिए पति से भरण-पोषण या गुजारे भत्ते का दावा नहीं करेगी। दोनों पक्षों के बीच सभी वित्तीय हिसाब-किताब पहले ही निपटाए जा चुके हैं।
विज्ञापन
अदालत ने माफ की वेटिंग पीरियड की अवधि
धारा 13-बी (2) के तहत निर्धारित छह महीने की कूलिंग-ऑफ पीरियड (शीतघ्र विराम अवधि) को माफ करने के लिए 8 दिसंबर 2025 को आवेदन दिया गया था। अदालत ने मामले की गंभीरता और रिश्ते के पूरी तरह टूट जाने की स्थिति को देखते हुए इसे स्वीकार कर लिया।