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उधमपुर: शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बने आवारा घोड़े

Wed, 16 Nov 2022 01:05 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, उधमपुर
अमर उजाला नेटवर्क, उधमपुर Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Wed, 16 Nov 2022 01:05 PM IST
सार

शहरवासी पिछले कई वर्षों से लावारिस मवेशियों से परेशान हैं, लेकिन अब लावारिस घोड़ों की बढ़ती संख्या ने परेशानी बढ़ा दी है। अस्पताल रोड, कोर्ट रोड, सलाथिया चौक, धार रोड, एमएच चौक, पुराने राजमार्ग पर लावारिस घोड़ों की भरमार है।

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Udhampur: Stray horses become a problem for the residents of the city
उधमपुर के जिला अस्पताल के बाहर घूमते घोड़े - फोटो : UDHAMPUR

विस्तार

उधमपुर शहर में बढ़ती लावारिस घोड़ों की संख्या शहवासियों के लिए परेशानी बन गई है। घोड़ों के मालिक अपने काम निपटाने के बाद घोड़ों को खुले में छोड़ देते हैं। इससे सड़कों पर यातायात बाधित हो रहा है। कई बार चारे की तलाश में घोड़ों का झुंड जिला अस्पताल में पहुंच जाता है। शहरवासियों ने इन पर लगाम कसने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई गई है। उधर, पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घोड़ों की संख्या का रिकॉर्ड रखा गया है, लेकिन इनके मालिकों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है।

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शहरवासी पिछले कई वर्षों से लावारिस मवेशियों से परेशान हैं, लेकिन अब लावारिस घोड़ों की बढ़ती संख्या ने परेशानी बढ़ा दी है। अस्पताल रोड, कोर्ट रोड, सलाथिया चौक, धार रोड, एमएच चौक, पुराने राजमार्ग पर लावारिस घोड़ों की भरमार है। इनसे यातायात बाधित होने के साथ हादसों का डर बना रहता है। शहर के अंदर कई ऐसी गलियां हैं, जहां पर वाहन के जरिये निर्माण सामग्री नहीं पहुंचाई जा सकती है। इन स्थानों पर निर्माण सामग्री ढोने के लिए इन घोड़ों को इस्तेमाल में लाया जाता है, लेकिन इनके मालिक काम लेने के बाद शाम को इन घोड़ों को खुले में छोड़ देते हैं। कई बार ये राहगीरों पर भी हमला कर चुके हैं। जिला अस्पताल में घास होने पर अक्सर घोड़ों के झुंड यहां पहुंच जाते हैं। इनके कारण मरीजों को भी परेशानी होती है और अस्पताल प्रशासन भी परेशान है।
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जिले में मौजूद हैं 2718 घोड़े
पशुपालन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में घोड़ों की कुल संख्या 2718 है और सैकड़ों की संख्या में शहर में भी घोड़े लावारिस घूमते हैं। इन घोड़ों को दुधारू पशुओं की तरह टैग नहीं लगाए गए हैं। इसी कारण इनके मालिकों की पहचान नहीं हो पाती है। नगर परिषद ने पशुपालन विभाग से मांग की है कि शहर के अंदर मौजूद घोड़ों को टैग लगाए जाएं, ताकि इनके मालिकों की पहचान की जा सके।
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घोड़ों के मरने के बाद नप के लिए बढ़ जाती है परेशानी
पिछले कुछ महीनों में शहर के अंदर करीब छह घोड़ों की मौत हुई है और एक भी घोड़े का मालिक शव लेने के लिए सामने नहीं आया है। मजबूरन नगर परिषद को ही शव को शहर से बाहर ले जाने की व्यवस्था करनी पड़ती है।

घोड़ों को इस्तेमाल के बाद खुले में छोड़ा जा रहा है। नगर परिषद इसे लेकर कोई कार्रवाई नहीं करता है और इसी कारण लोग भी बेखौफ होकर अपने घोड़ों को खुले में छोड़ देते हैं। जब कार्रवाई की जाएगी तो शहर में लावारिस घोड़े कम हो जाएंगे।

-डॉ. राकेश गुप्ता, चीफ एनिमल हसबैंडरी अफसर, उधमपुर।

नगर परिषद के कैटल पौंड का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। काम पूरा होने के बाद इसका टेंडर जारी कर दिया जाएगा और फिर शहर के अंदर लावारिस पशुओं और घोड़ों को कैटल पौंड में डाला जाएगा और इनके मालिकों पर कार्रवाई भी शुरू कर दी जाएगी। -डॉ. जोगेश्वर गुप्ता, चेयरमैन, नगर परिषद।

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