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Udhampur News: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जयंती पर भेंट की श्रद्धांजलि
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उधमपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जयंती पर श्रद्धांजलि भेंट करते भाजपा कार्यकर्ता: संवाद
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- भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं देश की एकता और अखंडता बनाए रखने का लिया संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। भाजपा कार्यालय में रविवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि भेंट की गई। उनकी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं ने भाग लिया। दिवंगत नेता के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए।
वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी की जीवनी पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में चिनैनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया और ब्लाॅक नरसू के जिला विकास परिषद (डीडीसी) के सदस्य सुभाष चंद्र मुख्य रूप से उपस्थित थे। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम के बिना जम्मूश्रकश्मीर का इतिहास अधूरा है क्योंकि देश की अखंडता और जम्मू कश्मीर का भारत के साथ पूर्ण विलय के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने एक निशान-एक विधान और दो विधान- दो निशान नहीं चलेंगे का नारा दिया और जम्मू-कश्मीर के भारत में संपूर्ण विलय की राह में बाधा बने अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। हर साल छह जुलाई को उनकी जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है। सभी कार्यकर्ता इस दिन यह प्रण दोहराते हैं कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए किसी भी बलिदान से पीछे नहीं हटेंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। भाजपा कार्यालय में रविवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि भेंट की गई। उनकी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं ने भाग लिया। दिवंगत नेता के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए।
वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी की जीवनी पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में चिनैनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया और ब्लाॅक नरसू के जिला विकास परिषद (डीडीसी) के सदस्य सुभाष चंद्र मुख्य रूप से उपस्थित थे। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम के बिना जम्मूश्रकश्मीर का इतिहास अधूरा है क्योंकि देश की अखंडता और जम्मू कश्मीर का भारत के साथ पूर्ण विलय के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
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उन्होंने एक निशान-एक विधान और दो विधान- दो निशान नहीं चलेंगे का नारा दिया और जम्मू-कश्मीर के भारत में संपूर्ण विलय की राह में बाधा बने अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। हर साल छह जुलाई को उनकी जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है। सभी कार्यकर्ता इस दिन यह प्रण दोहराते हैं कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए किसी भी बलिदान से पीछे नहीं हटेंगे।
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