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ईश्वर मन, बुद्धि व वाणी से परे का विषय : गौतम सेनसन
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। श्री लक्ष्मी नारायण ट्रस्ट की ओर से वार्ड नंबर आठ में स्थित पांडव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। यह कथा सात मई तक रोजाना शाम चार बजे से लेकर साढ़े छह बजे तक जारी रहेगी।
कथा वाचक गौतम सेनसन ने अपने प्रवचन में बताया कि जब ईश्वर इस धरती पर अवतार धारण करते हैं तो उनकी क्रियाओं को लीला शब्द से संबोधित किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने अवतरण काल में अनेकों ही दिव्य लीलाएं कीं। ब्रज की कुंज गलियां, कंस के अत्याचारों से पीड़ित मथुरा भूमि, कुरुक्षेत्र का महास्मरांगण, हर क्षेत्र में इनकी अलौकिक लीलाओं का प्रकाश जगमगाया। ये दिव्य क्रीड़ाएं तत्समय तो सप्रयोजन थी ही, आज युगों उपरांत भी हमारे लिए प्रेरणा दीप है।
नंद नंदन माखन चोर की यह लीला अत्यंत सांकेतिक है। यह इशारा कर रही हैै कि संसार द्वैतात्मक है। इसमें माखन रूपी साथ एवं छाछ रूपी अंसार दोनों ही विद्यमान हैं। माखन चुराकर प्रभु यही समझा रहे हैं कि इस संसार में परम साथ तत्व अर्थात ईश्वर का वरण करो सार हीन माया का नहीं। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार कंकर मारकर मटकी फोड़ना, मनमोहनी बांसुरी की तान छेड़ना आदि सभी लीलाएं अत्यंत प्रेरणात्मक हैं। भगवान की लीलाओं को कभी भी अपनी बुद्धि द्वारा समझने का प्रयास न करें। क्योंकि वह ईश्वर मन, बुद्धि व वाणी से परे का विषय है। उसे केवल ज्ञान के द्वारा समझा जा सकता है।
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उधमपुर। श्री लक्ष्मी नारायण ट्रस्ट की ओर से वार्ड नंबर आठ में स्थित पांडव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। यह कथा सात मई तक रोजाना शाम चार बजे से लेकर साढ़े छह बजे तक जारी रहेगी।
कथा वाचक गौतम सेनसन ने अपने प्रवचन में बताया कि जब ईश्वर इस धरती पर अवतार धारण करते हैं तो उनकी क्रियाओं को लीला शब्द से संबोधित किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने अवतरण काल में अनेकों ही दिव्य लीलाएं कीं। ब्रज की कुंज गलियां, कंस के अत्याचारों से पीड़ित मथुरा भूमि, कुरुक्षेत्र का महास्मरांगण, हर क्षेत्र में इनकी अलौकिक लीलाओं का प्रकाश जगमगाया। ये दिव्य क्रीड़ाएं तत्समय तो सप्रयोजन थी ही, आज युगों उपरांत भी हमारे लिए प्रेरणा दीप है।
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नंद नंदन माखन चोर की यह लीला अत्यंत सांकेतिक है। यह इशारा कर रही हैै कि संसार द्वैतात्मक है। इसमें माखन रूपी साथ एवं छाछ रूपी अंसार दोनों ही विद्यमान हैं। माखन चुराकर प्रभु यही समझा रहे हैं कि इस संसार में परम साथ तत्व अर्थात ईश्वर का वरण करो सार हीन माया का नहीं। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार कंकर मारकर मटकी फोड़ना, मनमोहनी बांसुरी की तान छेड़ना आदि सभी लीलाएं अत्यंत प्रेरणात्मक हैं। भगवान की लीलाओं को कभी भी अपनी बुद्धि द्वारा समझने का प्रयास न करें। क्योंकि वह ईश्वर मन, बुद्धि व वाणी से परे का विषय है। उसे केवल ज्ञान के द्वारा समझा जा सकता है।
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