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अस्पताल से क्यों रेफर होते हैं मरीज?
Udhampur
Updated Tue, 22 Oct 2013 05:42 AM IST
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उधमपुर। एक साल के अंदर जिला अस्पताल उधमपुर से 2079 मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया। आरटीआई के तहत एडवोकेट संजीत कुमार बवोरिया को मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल उधमपुर में सुविधाओं के बावजूद पहली जनवरी-2012 से लेकर 31 जनवरी -2013 तक विभिन्न प्रकार के रोगियों को यहां से विभिन्न अस्पतालों में रेफर किया गया।
एडवोकेट संजीत कुमार का कहना है कि सूचना अधिकार अधिनियम के तहत उनके द्वारा इस प्रकार की जानकारी मांगी गई थी, जिससे यह खुलासा हो सका है कि मेडिसिन स्पेशियलिटी से 955, सर्जरी से 418, आर्थो से 65, डेंटल से 3, आई से 01, गाइनी से 295 व पैडिएट्रिक्स स्पेशलिटी से 342 रोगियों को करीब एक साल के अंदर रेफर किया गया है। जबकि, ये सब सुविधाएं जिला अस्पताल में मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि आरटीआई के तहत यह भी पूछा गया था कि इस अस्पताल से रेफर के बाद रास्ते में कितने मरीजों की मौत हुई है, लेकिन इसकी संबंध में जानकारी नहीं उपलब्ध करवाई गई।
एडवोकेट बताते हैं कि आरटीआई एक्ट की धारा 6(3) के मुताबिक यदि अस्पताल प्रशासन के पास रेफर होने के बाद मरने वाले मरीजों की जानकारी नहीं भी है, तो भी यह विभिन्न अस्पतालों से इस प्रकार की जानकारी एकत्र कर दिए जाने के नियम पाबंद हैं। लीवर प्राब्लम, कि डनी आदि के मरीजों के साथ ही हेड इंजरी, रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट इंजरी, गाइनी में प्री म्योचर डिलीवरी केस आदि तथा पैडिएट्रिक्स में सांस लेने में तकलीफ, स्नैक बाइट व बुखार आदि के मरीजों के बारे में जानकारी मिली है। एडवोकेट का कहना है कि जिला अस्पताल द्वारा पूरी जानकारी न देना या छिपाना नाकामी को जाहिर करता है।
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एडवोकेट संजीत कुमार का कहना है कि सूचना अधिकार अधिनियम के तहत उनके द्वारा इस प्रकार की जानकारी मांगी गई थी, जिससे यह खुलासा हो सका है कि मेडिसिन स्पेशियलिटी से 955, सर्जरी से 418, आर्थो से 65, डेंटल से 3, आई से 01, गाइनी से 295 व पैडिएट्रिक्स स्पेशलिटी से 342 रोगियों को करीब एक साल के अंदर रेफर किया गया है। जबकि, ये सब सुविधाएं जिला अस्पताल में मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि आरटीआई के तहत यह भी पूछा गया था कि इस अस्पताल से रेफर के बाद रास्ते में कितने मरीजों की मौत हुई है, लेकिन इसकी संबंध में जानकारी नहीं उपलब्ध करवाई गई।
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एडवोकेट बताते हैं कि आरटीआई एक्ट की धारा 6(3) के मुताबिक यदि अस्पताल प्रशासन के पास रेफर होने के बाद मरने वाले मरीजों की जानकारी नहीं भी है, तो भी यह विभिन्न अस्पतालों से इस प्रकार की जानकारी एकत्र कर दिए जाने के नियम पाबंद हैं। लीवर प्राब्लम, कि डनी आदि के मरीजों के साथ ही हेड इंजरी, रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट इंजरी, गाइनी में प्री म्योचर डिलीवरी केस आदि तथा पैडिएट्रिक्स में सांस लेने में तकलीफ, स्नैक बाइट व बुखार आदि के मरीजों के बारे में जानकारी मिली है। एडवोकेट का कहना है कि जिला अस्पताल द्वारा पूरी जानकारी न देना या छिपाना नाकामी को जाहिर करता है।
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