Jammu Kashmir: टूट रहा मिथक...धरती के स्वर्ग की हवा का हाल हो रहा दिल्ली जैसा, श्रीनगर में AQI 161 तक पहुंचा
श्रीनगर में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक हो गया है और एक्यूआई161 तक पहुंचकर अस्वास्थ्यकर श्रेणी में दर्ज किया गया। विशेषज्ञों ने हवा की स्थिति को स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में बताया और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता जताई।
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सदियों से कश्मीर की पहचान उसके निर्मल सौंदर्य, बर्फीले पहाड़ों और जीवनदायिनी ताजी हवा से रही है। तभी इसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है लेकिन अब यह रूमानी छवि टूट रही है। कश्मीर की हवा का हाल दिल्ली जैसा हो रहा है।
जहां एक ओर कश्मीर भीषण ठंड की मार झेल रहा है तो वहीं दूसरी ओर एक अदृश्य खतरा फिजाओं में घुल गया है। प्रदूषण की हालिया रिपोर्टों ने सबको चौंका दिया है।
प्रदूषण ने श्रीनगर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) उस स्तर पर पहुंचा दिया है जहां आमतौर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली खड़ी नजर आती है। यह आंकड़ा न सिर्फ हैरान करने वाला है बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के माथे पर भी बल ला दिया है।
श्रीनगर में पर्यावरण की स्थिति पर सामने आए हालिया आंकड़े (एक्यूआई डॉट इन के अनुसार) चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं।
शनिवार को श्रीनगर में एआईक्यू 161 दर्ज किया गया जिसे अस्वास्थ्यकर श्रेणी में रखा जाता है। तुलनात्मक रूप से इसी दिन दिल्ली का एआईक्यू 179 के आसपास था। इन आंकड़ों ने कश्मीर की स्वच्छ हवा की छवि को धूमिल कर दिया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उनके अनुसार यह स्थिति श्रीनगर नगर निगम सहित अन्य संबंधित एजेंसियों के लिए एक वेक-अप कॉल है जिन्हें तत्काल सतर्कता बरतने और कार्रवाई करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार इस प्रदूषण की वजह से लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। बच्चों व बुजुर्गों के लिए ये खतरनाक है।
यदि नागरिक सावधानी बरतें और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करें तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम किया जा सकता है। सर्दियाें में प्रदूषण बढ़ जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण है बुखारियों और अन्य गर्मी करने वाले उपकरणों से निकलने वाला धुआं जिसका सर्दियों में उपयोग बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। बुजुर्ग, बच्चे और सांस संबंधी मरीज घर में रहें, जरूरत पड़ने पर ही निकलें। बाहर निकलें तो मास्क का उपयोग करें। भारी व्यायाम से बचें।
-डॉ. नवीद, चेस्ट स्पेशलिस्ट
विशेषज्ञ बोले- बरतें सावधानी, वरना स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर :
विशेषज्ञों के अनुसार पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे कणों की अधिकता स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। आज (शनिवार) पीएम 2.5 का स्तर 69 दर्ज किया गया है जबकि पीएम 10 का स्तर 107 तक पहुंच गया जिसे स्वास्थ्य के लिए अस्वस्थ माना गया है। इन प्रदूषक कणों की अधिकता शहरवासियों के लिए सांस लेने में परेशानी और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा रही है। एक्यूआई 200 से 300 के बीच हानिकारक माना जाता है। ऐसे समय में लंबे समय तक बाहर रहने या शारीरिक गतिविधि करने से सांस लेने में दिक्कत, थकान और हृदय रोग से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।
सांस लेने में दिक्कत, जलन जैसे लक्षण दिखने लगे....लोग परेशान :
स्थानीय लोगों ने भी वायु प्रदूषण के चलते सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, आदि जैसे लक्षणों को लेकर शिकायत की है। मुदस्सिर अहमद के अनुसार आम दिनों में ऐसी कोई दिक्कत नहीं आती है लेकिन सर्दियां शुरू होते ही वायु प्रदूषण बढ़ जाता है जिससे आंखों में जलन होती है और पानी टपकने लगता है। बिलाल अहमद के अनुसार बुजुर्ग बाहर निकलते हैं तो सांस लेने में दिक्कत आती है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों पर रोक, धूल और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर जुर्माना, बुखारियों और अंगीठियों का नियमित उपयोग और वाहनों की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण कुछ उपाय है जिन्हें सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।