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Srinagar News: झेलम में अगले साल चलेगा क्रूज, पंथा चौक से बांदीपोरा होगा पहला चरण

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Srinagar, Water Transport, Cruise Facility, Will Start Next Year, jhelum
- सरकार ने जल परिवहन प्रोजेक्ट को तेज किया, तीन जिलों में बनाए जाएंगे आठ टर्मिनल
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। सरकार ने कश्मीर में अपने महत्वाकांक्षी जल परिवहन प्रोजेक्ट को तेज कर दिया है। इसके पहले चरण में झेलम नदी क्रूज को शामिल किया गया है जिसे 2027 तक पायलट आधार पर शुरू किए जाने की संभावना है।

इस परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये के दो समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अधिकारी झेलम नदी क्रूज प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं जिसमें अनंतनाग, श्रीनगर और बांदीपोरा में आठ टर्मिनल बनाए जाएंगे। आरटीओ कश्मीर काजी इरफान रसूल जरगर ने बताया कि इन एमओयू में झेलम नदी क्रूज के लिए 100 करोड़ रुपये और झेलम व डल झील, दोनों को कवर करने वाले एक व्यापक शहरी जल परिवहन सिस्टम के लिए 900 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसका उद्देश्य कश्मीर में एक पर्यावरण-अनुकूल वैकल्पिक परिवहन नेटवर्क स्थापित करना है।
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उन्होंने कहा कि सरकार अभी पहले एमओयू पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो झेलम नदी क्रूज प्रोजेक्ट से संबंधित है। यह प्रोजेक्ट तीन जिलों अनंतनाग, श्रीनगर और बांदीपोरा तक फैला होगा और इसमें कुल आठ टर्मिनल शामिल होंगे।
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जरगर ने कहा, पहला चरण पंथा चौक से शुरू होगा और श्रीनगर के मुख्य स्थानों, जैसे पंथा चौक और जीरो ब्रिज से गुजरेगा। इसके बाद कई और टर्मिनल आएंगे और अंत में यह बांदीपोरा में समाप्त होगा। टर्मिनलों के लिए जमीन की पहचान कर ली गई है और उसे आवंटित भी कर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए एक स्पेशल पर्पस व्हीकल का गठन किया गया है। इसके तहत, ''''भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण इन सेवाओं का संचालन करेगा। कई जगहों पर प्लेटफॉर्म बनाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है।


बोट्स में बैठ सकेंगे 20 यात्री
जरगर ने कहा कि जारी किए गए प्रस्ताव के लिए अनुरोध के तहत, विभाग ने इलेक्ट्रिक क्रूज़ बोट्स शुरू करने की योजना बनाई है। इन बोट्स में लगभग 20 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। हमने टिकाऊ गतिशीलता की अवधारणा के अनुरूप इलेक्ट्रिक क्रूज बोट्स पर ध्यान केंद्रित किया है जिसे दुनिया भर में अपनाया जा रहा है। शुरुआती तौर पर ऐसी दो बोट्स खरीदी जाएंगी। नदी के तल की खोदाई और हाउस बोट्स तथा मौजूदा इकोसिस्टम पर इसके संभावित असर को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि ये प्रोजेक्ट्स विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी के बाद ही शुरू किए गए हैं। कोच्चि मेट्रो की टीमों सहित विशेषज्ञों ने जमीन पर जाकर सर्वे किए हैं। खुदाई की जरूरतों और पानी की गहराई को वैज्ञानिक तरीके से मैनेज किया जाएगा, ताकि मौजूदा ढांचों या लोगों की आजीविका पर कोई असर पड़े बिना जहाजों का संचालन सुचारु रूप से चलता रहे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हाउस बोट्स और अन्य पारंपरिक प्रणालियों पर इस काम का कोई बुरा असर न पड़े।


सड़कों से दबाव होगा कम
आरटीओ ने कहा कि दूसरा चरण पूरी तरह से विकसित शहरी जल परिवहन प्रणाली बनाने पर केंद्रित है, जो डल झील और झेलम नदी को आपस में जोड़ेगी। इससे श्रीनगर और आस-पास के इलाकों में कनेक्टिविटी में काफी सुधार होगा। इस पहल का मकसद पानी पर आधारित एक वैकल्पिक परिवहन प्रणाली बनाना है जिससे न केवल सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा, बल्कि जलमार्गों का भी आधुनिक उपयोग के लिए पुनरुद्धार होगा। प्रोजेक्ट के पूरा होने की समय-सीमा के बारे में जरगर ने कहा कि हालांकि काम अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन विभाग को इसमें जल्द प्रगति होने की पूरी उम्मीद है। हमें उम्मीद है कि 2027 तक, झेलम प्रोजेक्ट का कम से कम पहला चरण पायलट आधार पर चालू हो जाएगा। जल परिवहन की यह प्रस्तावित पहल जम्मू-कश्मीर, खासकर श्रीनगर में वैकल्पिक और टिकाऊ परिवहन समाधानों की खोज पर बढ़ते ज़ोर के बीच सामने आई है। श्रीनगर में पिछले कुछ सालों में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी बढ़ गई है। झेलम नदी, जो ऐतिहासिक रूप से परिवहन का एक प्रमुख मार्ग रही है, सड़कों के नेटवर्क के विस्तार के कारण अब नियमित उपयोग से बाहर हो गई थी।
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