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एनआईए का बड़ा एक्शन: श्रीनगर में पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने वाली संपत्ति कुर्क, लश्कर नेटवर्क पर शिकंजा
Mon, 12 Oct 2026 05:11 PM IST
Nikita Gupta
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: Nikita Gupta
Updated Mon, 12 Oct 2026 05:11 PM IST
सार
एनआईए ने श्रीनगर के दनिहामा इलाके में आरोपी गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा गैस की आवासीय संपत्ति कुर्क की है। आरोप है कि इस संपत्ति का इस्तेमाल लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने और आपत्तिजनक सामग्री छिपाने के लिए किया गया था।
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NIA
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने श्रीनगर के हजरतबल क्षेत्र के दानिहामा गांव में एक आवासीय संपत्ति को कुर्क किया है। इस संपत्ति का इस्तेमाल पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने और आतंकी नेटवर्क से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री छिपाने के लिए किया जाता था।
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एनआईए के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्ति खसरा नंबर 315 पर स्थित है और आरोपी गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा गैस की है। यह मामला प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) से जुड़ी सीमा पार आतंकी साजिश की जांच से संबंधित है। एजेंसी ने आवश्यक पूर्व अनुमति मिलने के बाद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धारा 25 के तहत संपत्ति कुर्क की है।
मामले की शुरुआत 31 मार्च को जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी। बाद में एनआईए ने जांच अपने हाथ में लेकर मामला दोबारा दर्ज किया।
एनआईए ने बताया कि 6 अप्रैल को आरोपी के घर पर तलाशी के दौरान दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी का पता चला था। उनकी पहचान अबू हुरैरा और खुबैब के रूप में हुई है। दोनों के लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े होने का संदेह है। तलाशी के दौरान विस्फोटक जैसी सामग्री, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामान भी बरामद किया गया था।
जांच में सामने आया कि स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) पाकिस्तान में बैठे लश्कर के संचालकों के संपर्क में रहकर आतंकियों की घुसपैठ, आवाजाही, ठहरने और अन्य रसद संबंधी मदद की व्यवस्था कर रहे थे। इस नेटवर्क का मकसद सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले हमलों में सहायता करना बताया गया है।
आरोपी ने जानबूझकर अपनी आवासीय संपत्ति आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने के रूप में उपलब्ध कराई थी। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य ओवरग्राउंड वर्करों, मददगारों और पाकिस्तान स्थित संचालकों से जुड़े लोगों की पहचान करने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।
मामले की शुरुआत 31 मार्च को जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी। बाद में एनआईए ने जांच अपने हाथ में लेकर मामला दोबारा दर्ज किया।
एनआईए ने बताया कि 6 अप्रैल को आरोपी के घर पर तलाशी के दौरान दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी का पता चला था। उनकी पहचान अबू हुरैरा और खुबैब के रूप में हुई है। दोनों के लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े होने का संदेह है। तलाशी के दौरान विस्फोटक जैसी सामग्री, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामान भी बरामद किया गया था।
जांच में सामने आया कि स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) पाकिस्तान में बैठे लश्कर के संचालकों के संपर्क में रहकर आतंकियों की घुसपैठ, आवाजाही, ठहरने और अन्य रसद संबंधी मदद की व्यवस्था कर रहे थे। इस नेटवर्क का मकसद सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले हमलों में सहायता करना बताया गया है।
आरोपी ने जानबूझकर अपनी आवासीय संपत्ति आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने के रूप में उपलब्ध कराई थी। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य ओवरग्राउंड वर्करों, मददगारों और पाकिस्तान स्थित संचालकों से जुड़े लोगों की पहचान करने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।