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Srinagar News: पर्यटकों को भा रही तीन दशक बाद शुरू हुई तांगे की सवारी

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Srinagar, Tourist, Enjoy Tanga Riding
श्रीनगर की सड़कों पर पारंपरिक तांगे की सवारी के दौरान पर्यटक। संवाद - फोटो : jyodian news
- घाटी के बुरे दौर में 90 के दशक में बंद हो गए थे श्रीनगर में तांगे
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- 70 साल के युवा ने पारंपरिक परिवहन को किया फिर किया जिंदा
अजीम यूसुफ
श्रीनगर। शहर में चल रहा इकलौता तांगा पर्यटकों को भा रहा है। तीन दशक से भी अधिक समय से श्रीनगर में बंद इस पारंपरिक परिवहन के स्वरूप को 70 साल के युवा गुलाम रसूल कुमार ने फिर से जिंदा कर दिया है। करीब एक महीने पहले ही उन्होंने इसे शुरू किया है जो इस समय काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
जब सार्वजनिक परिवहन के साधन चुनिंदा थे, दमदार घोड़े के साथ सजीला तांगा लोगों को खूब भाया करता था। श्रीनगर के वयोवृद्ध नागरिक रफीक अहमद गनई ने बताया कि देशभर के साथ कश्मीर में भी यह राजाओं के समय से लोगों को उनकी मंजिलों तक पहुंचा रहा था। फिर कश्मीर घाटी का वह सबसे बुरा दौर आया जब यहां आतंकवाद चरम पर था।
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90 के दशक में पर्यटक आने बंद हुए, साथ ही अन्य कारणों से भी लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ। इससे सबसे ज्यादा असर पड़ा सार्वजनिक परिवहन के सबसे सुलभ साधन तांगे पर। धीरे-धीरे कुछ ही समय में यह बंद हो गए। हां घाटी के कुछ ग्रामीण इलाकों में चलन जारी रहा लेकिन श्रीनगर से ये पूरी तरह गायब हो गए।
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तीन दशक से अधिक समय बाद मंगलवार को श्रीनगर की सड़क पर जब अपने तांगे के साथ पर्यटकों को ले जाते गुलाम रसूल दिखाई दिए तो यह एक खास लम्हा था। पर्यटकों को घुमाने के दौरान कुछ फोटो लिए और उनसे बात की।
बातचीत के दौरान 70 साल के गुलाम रसूल में युवाओं सा जोश दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता तांगा चलाया करते थे, उनसे ही तब तांगा चलाना सीखा। 1965 से इस काम के साथ जुड़े थे, 1985 में स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्होंने काम छोड़ दिया। बाद में श्रीनगर में यात्रियों की कमी के कारण यह बंद होते चले गए।इसके बाद परिवार को चलाने के लिए मजदूरी व अन्य छोटे-मोटे काम किए।

एक महीने पहले की शुरुआत
गुलाम रसूल ने बताया कि करीब एक महीने पहले अचानक इस काम को करने का ख्याल आया। मेरा कोई सहारा नहीं है, काफी कर्ज भी है। तांगा चलाने का ख्याल आर्थिक तो है ही, यह परंपरा से भी जुड़ा है। मैं अब इसे कर रहा हूं और पर्यटकों व स्थानीय लोगों को यह काफी पसंद भी आ रहा है। अब जब पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर लोग आशंकित हैं, ऐसे में अन्य लोग भी यातायात के इस साधन का लाभ उठा सकते हैं। मैं सरकार से भी अनुरोध करता हूं कि इसको पुनर्जीवित करने के लिए कोई योजना लाएं और हम जैसे लोगों की मदद करें।


खूबसूरत नजारों के बीच तांगे की सवारी ने जीता दिल
तांगे से डल गेट तक आए पर्यटकों में से एक महाराष्ट्र के रमेश ने बताया कि श्रीनगर में खूबसूरत नजारों के बीच तांगे की सवारी ने दिल जीत लिया। इसकी सवारी काफी खास रही, हमने खूब फोटो भी खिंचाए, वहीं ममता कुमारी ने बताया कि ऑटो से डल गेट आना था, लेकिन तांगा देख इसकी सवारी के लिए दिल मचल उठा। इसकी सवारी ने पुरानी फिल्मों के दृश्यों की याद दिला दी।
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