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युवाओं की नाराजगी पर खामोशी खतरनाक : महबूबा
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पीडीपी के कथबत कार्यक्रम में युवाओं, रोजगार और आरक्षण पर बोलीं पीडीपी अध्यक्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
अनंतनाग। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने रविवार को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में अपने जनसंपर्क कार्यक्रम कथबत का एक और सत्र आयोजित किया। इस दौरान अपने संबोधन में पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि युवाओं की नाराजगी पर खामोशी खतरनाक है।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, युवा कार्यकर्ता, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। इसमें बेरोजगारी, आरक्षण नीति, आर्थिक अनिश्चितता और बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। कई स्थानीय युवाओं और ट्रेड यूनियन नेताओं ने घटते रोजगार अवसरों और क्षेत्र में बढ़ती युवा निराशा पर चिंता जताई।
महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समग्र स्थिति खासकर युवाओं के लिए संतोषजनक नहीं है। बड़ी संख्या में युवा नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और शांतिपूर्ण ढंग से असहमति जताने के अवसर भी सीमित किए जा रहे हैं। आज हम आरक्षण नीति और उन तमाम मुद्दों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं जो सीधे तौर पर हमारे युवाओं के भविष्य को प्रभावित करते हैं। दुर्भाग्य से लोगों को खुलकर विरोध करने से हतोत्साहित किया जा रहा है। राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं ताकि सार्वजनिक लामबंदी को रोका जा सके। उनके मुताबिक ऐसे कदम प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की खाई को और गहरा करते हैं।
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उन्होंने कहा कि फल उद्योग जिससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है, दबाव में है। पर्यटन जो आजीविका का एक बड़ा स्रोत है आज अनिश्चितता से जूझ रहा है। व्यापक बेरोजगारी है। आर्थिक अस्थिरता ने लगभग हर घर को प्रभावित किया है। यहां तक कि जिन लोगों को सरकारी नौकरियां मिल भी जाती हैं वे भी समग्र आर्थिक विकास की कमी के कारण निराश महसूस करते हैं।
कथबत कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को लोकतांत्रिक मंच उपलब्ध कराना है ताकि वे अपनी समस्याएं और चिंताएं साझा कर सकें। उन्होंने प्रशासनिक बाधाओं, आजीविका के नुकसान और आम नागरिकों को बुनियादी सेवाएं हासिल करने में आने वाली दिक्कतों का भी उल्लेख किया।
खेल सुविधाओं में निवेश की जरूरत पर जोर दिया
महबूबा ने युवाओं के लिए बुनियादी ढांचे, विशेषकर खेल सुविधाओं में निवेश की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेल अकादमियों की भारी मांग है। युवा आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए पर्याप्त ढांचा मौजूद नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अनंतनाग। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने रविवार को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में अपने जनसंपर्क कार्यक्रम कथबत का एक और सत्र आयोजित किया। इस दौरान अपने संबोधन में पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि युवाओं की नाराजगी पर खामोशी खतरनाक है।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, युवा कार्यकर्ता, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। इसमें बेरोजगारी, आरक्षण नीति, आर्थिक अनिश्चितता और बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। कई स्थानीय युवाओं और ट्रेड यूनियन नेताओं ने घटते रोजगार अवसरों और क्षेत्र में बढ़ती युवा निराशा पर चिंता जताई।
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महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समग्र स्थिति खासकर युवाओं के लिए संतोषजनक नहीं है। बड़ी संख्या में युवा नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और शांतिपूर्ण ढंग से असहमति जताने के अवसर भी सीमित किए जा रहे हैं। आज हम आरक्षण नीति और उन तमाम मुद्दों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं जो सीधे तौर पर हमारे युवाओं के भविष्य को प्रभावित करते हैं। दुर्भाग्य से लोगों को खुलकर विरोध करने से हतोत्साहित किया जा रहा है। राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं ताकि सार्वजनिक लामबंदी को रोका जा सके। उनके मुताबिक ऐसे कदम प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की खाई को और गहरा करते हैं।
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उन्होंने कहा कि फल उद्योग जिससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है, दबाव में है। पर्यटन जो आजीविका का एक बड़ा स्रोत है आज अनिश्चितता से जूझ रहा है। व्यापक बेरोजगारी है। आर्थिक अस्थिरता ने लगभग हर घर को प्रभावित किया है। यहां तक कि जिन लोगों को सरकारी नौकरियां मिल भी जाती हैं वे भी समग्र आर्थिक विकास की कमी के कारण निराश महसूस करते हैं।
कथबत कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को लोकतांत्रिक मंच उपलब्ध कराना है ताकि वे अपनी समस्याएं और चिंताएं साझा कर सकें। उन्होंने प्रशासनिक बाधाओं, आजीविका के नुकसान और आम नागरिकों को बुनियादी सेवाएं हासिल करने में आने वाली दिक्कतों का भी उल्लेख किया।
खेल सुविधाओं में निवेश की जरूरत पर जोर दिया
महबूबा ने युवाओं के लिए बुनियादी ढांचे, विशेषकर खेल सुविधाओं में निवेश की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेल अकादमियों की भारी मांग है। युवा आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए पर्याप्त ढांचा मौजूद नहीं है।