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Srinagar News: पारंपरिक चरखों को 16 प्रशिक्षण केंद्रों में आधुनिक इकाइयों से बदला
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पैडल से चलने वाला चरखा। संवाद
श्रीनगर। विश्व प्रसिद्ध पश्मीना ऊन की देशी हाथ कताई प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कश्मीर के हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग ने अपने सभी 16 पश्मीना कताई प्रशिक्षण केंद्रों में पारंपरिक चरखों को पूरी तरह बदलकर 213 आधुनिक चरखे लगा दिए हैं।
प्रत्येक केंद्र में 20 प्रशिक्षुओं की क्षमता है। ये प्रशिक्षण केंद्र श्रीनगर, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, बारामुला, गांदरबल, अनंतनाग और बांदीपोरा जिलों में संचालित हो रहे हैं। विभाग की ओर से सोमवार को जारी बयान के अनुसार प्रवक्ता ने बताया कि स्कॉस्ट कश्मीर द्वारा डिजाइन किए गए ये आधुनिक कताई चरखे कातने वालों को स्वस्थ मुद्रा प्रदान करते हैं।
पहले कारीगरों को पश्मीना ऊन कातने के लिए एड़ियों के बल बैठना पड़ता था, जो अत्यंत थकाऊ और श्रमसाध्य कार्य था और यह कला केवल कश्मीर के प्रसिद्ध शिल्पकारों को ही आती थी। प्रवक्ता ने कहा, आधुनिक चरखा दैनिक उत्पादन को कम से कम तीन गुना बढ़ा देता है, जिससे कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए प्रवक्ता ने आगे बताया कि पैडल चालित ये चरखे पश्मीना धागे की मोटाई (यार्न काउंट) में एकरूपता लाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चरखा चलाने में आसान है और कारीगरों को आरामदायक कार्य वातावरण प्रदान करता है, जबकि पहले के पारंपरिक चरखों पर काम करना अत्यधिक थकान भरा होता था। संवाद
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प्रत्येक केंद्र में 20 प्रशिक्षुओं की क्षमता है। ये प्रशिक्षण केंद्र श्रीनगर, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, बारामुला, गांदरबल, अनंतनाग और बांदीपोरा जिलों में संचालित हो रहे हैं। विभाग की ओर से सोमवार को जारी बयान के अनुसार प्रवक्ता ने बताया कि स्कॉस्ट कश्मीर द्वारा डिजाइन किए गए ये आधुनिक कताई चरखे कातने वालों को स्वस्थ मुद्रा प्रदान करते हैं।
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पहले कारीगरों को पश्मीना ऊन कातने के लिए एड़ियों के बल बैठना पड़ता था, जो अत्यंत थकाऊ और श्रमसाध्य कार्य था और यह कला केवल कश्मीर के प्रसिद्ध शिल्पकारों को ही आती थी। प्रवक्ता ने कहा, आधुनिक चरखा दैनिक उत्पादन को कम से कम तीन गुना बढ़ा देता है, जिससे कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए प्रवक्ता ने आगे बताया कि पैडल चालित ये चरखे पश्मीना धागे की मोटाई (यार्न काउंट) में एकरूपता लाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चरखा चलाने में आसान है और कारीगरों को आरामदायक कार्य वातावरण प्रदान करता है, जबकि पहले के पारंपरिक चरखों पर काम करना अत्यधिक थकान भरा होता था। संवाद