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Srinagar News: हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाने पर तीन भाइयों पर लगाया जुर्माना
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- सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे के विवाद में जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने बुधवार को कुपवाड़ा के सुरिगाम इलाके के तीन भाइयों की याचिका खारिज करते हुए उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि ये भाई सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे के विवाद में जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर कोर्ट आए थे।
न्यायमूर्ति वसीम सादिक नारगल की एकल पीठ ने कहा कि याचीगण फारूक अहमद शेख, शौकत अहमद शेख और गुलाम मोही-उद-दीन शेख अशुद्ध हाथों के साथ कोर्ट आए हैं। कोर्ट ने पाया कि विवादित रास्ता व लिंक रोड ग्रामीण विकास विभाग ने बनाया था। स्थानीय लोगों ने रास्ते में रुकावट डालने की शिकायत डिप्टी कमिश्नर कुपवाड़ा से की थी।
डिप्टी कमिश्नर ने रुकावट हटाने का आदेश दिया, जिसे रिवीजनल कोर्ट और अपीलीय कोर्ट ने भी सही ठहराया। इसके अलावा सोगाम की सिविल कोर्ट में निजी पक्षकारों (स्थानीय लोगों) ने मुकदमा दायर किया था। 12 जुलाई 2024 को सिविल जज ने तीनों भाइयों को रास्ते में दखल देने से रोकने का अंतरिम आदेश पारित किया था। कोर्ट ने कहा कि भाइयों को इस आदेश की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने न तो इसे चुनौती दी और न ही हाईकोर्ट में अपनी याचिका में इसका जिक्र किया। पीठ ने इसे जानबूझकर और इरादतन तथ्यों का दमन करार देते हुए कहा कि यह कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। एक ही विषय पर अलग-अलग मंचों पर समानांतर कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।
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कोर्ट ने कहा, रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि याचीगण अपीलीय और पुनरीक्षण प्राधिकारियों से असफल होने के बाद इस कोर्ट आए हैं, लेकिन उन्होंने यह तथ्य छिपाया कि उसी विषय पर सिविल कोर्ट में मुकदमा लंबित है और 12 जुलाई 2024 को उनके खिलाफ रोक का आदेश पारित हो चुका है। न्यायमूर्ति नारगल ने कहा कि भाई जो सीधे हासिल नहीं कर सके, उसे धोखे और तथ्यों को छिपाकर अप्रत्यक्ष रूप से हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे आचरण पर आंखें मूंदना इस कोर्ट के लिए संभव नहीं है।
हाईकोर्ट ने राजस्व आदेशों को सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि सिविल मुकदमा लंबित होने के बावजूद वे पारित हुए थे, और तीनों भाइयों को निर्देश दिया कि अब वे अपना दावा सिर्फ सिविल कोर्ट में ही लड़ें। तथ्यों को छिपाने की इस प्रवृत्ति की निंदा करते हुए कोर्ट ने तीनों भाइयों पर संयुक्त रूप से 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे दो हफ्तों के अंदर हाईकोर्ट के एडवोकेट्स वेलफेयर फंड में जमा करना होगा।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने बुधवार को कुपवाड़ा के सुरिगाम इलाके के तीन भाइयों की याचिका खारिज करते हुए उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि ये भाई सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे के विवाद में जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर कोर्ट आए थे।
न्यायमूर्ति वसीम सादिक नारगल की एकल पीठ ने कहा कि याचीगण फारूक अहमद शेख, शौकत अहमद शेख और गुलाम मोही-उद-दीन शेख अशुद्ध हाथों के साथ कोर्ट आए हैं। कोर्ट ने पाया कि विवादित रास्ता व लिंक रोड ग्रामीण विकास विभाग ने बनाया था। स्थानीय लोगों ने रास्ते में रुकावट डालने की शिकायत डिप्टी कमिश्नर कुपवाड़ा से की थी।
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डिप्टी कमिश्नर ने रुकावट हटाने का आदेश दिया, जिसे रिवीजनल कोर्ट और अपीलीय कोर्ट ने भी सही ठहराया। इसके अलावा सोगाम की सिविल कोर्ट में निजी पक्षकारों (स्थानीय लोगों) ने मुकदमा दायर किया था। 12 जुलाई 2024 को सिविल जज ने तीनों भाइयों को रास्ते में दखल देने से रोकने का अंतरिम आदेश पारित किया था। कोर्ट ने कहा कि भाइयों को इस आदेश की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने न तो इसे चुनौती दी और न ही हाईकोर्ट में अपनी याचिका में इसका जिक्र किया। पीठ ने इसे जानबूझकर और इरादतन तथ्यों का दमन करार देते हुए कहा कि यह कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। एक ही विषय पर अलग-अलग मंचों पर समानांतर कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।
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कोर्ट ने कहा, रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि याचीगण अपीलीय और पुनरीक्षण प्राधिकारियों से असफल होने के बाद इस कोर्ट आए हैं, लेकिन उन्होंने यह तथ्य छिपाया कि उसी विषय पर सिविल कोर्ट में मुकदमा लंबित है और 12 जुलाई 2024 को उनके खिलाफ रोक का आदेश पारित हो चुका है। न्यायमूर्ति नारगल ने कहा कि भाई जो सीधे हासिल नहीं कर सके, उसे धोखे और तथ्यों को छिपाकर अप्रत्यक्ष रूप से हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे आचरण पर आंखें मूंदना इस कोर्ट के लिए संभव नहीं है।
हाईकोर्ट ने राजस्व आदेशों को सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि सिविल मुकदमा लंबित होने के बावजूद वे पारित हुए थे, और तीनों भाइयों को निर्देश दिया कि अब वे अपना दावा सिर्फ सिविल कोर्ट में ही लड़ें। तथ्यों को छिपाने की इस प्रवृत्ति की निंदा करते हुए कोर्ट ने तीनों भाइयों पर संयुक्त रूप से 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे दो हफ्तों के अंदर हाईकोर्ट के एडवोकेट्स वेलफेयर फंड में जमा करना होगा।