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कश्मीर की खामोशी और घुटन को अमन समझने की भूल न करे केंद्र : महबूबा मुफ़्ती
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महबूबा मुफ्ती फिर से चुनी गईं अध्यक्ष। स्रोत पार्टी
श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को केंद्र सरकार को आगाह किया कि वह कश्मीर में पसरी खामोशी और घुटनको अमन समझने की गलती न करे।
उन्होंने दो टूक कहा कि राष्ट्रीय हित किसी भी सरकार से कहीं बड़ा होता है। पार्टी अध्यक्ष पद पर दोबारा सर्वसम्मति से चुने जाने के तुरंत बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र से जम्मू-कश्मीर की जनता पर भरोसा जताने की अपील की।
जम्मू-कश्मीर की मौजूदा नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार पर निशाना साधते हुए महबूबा ने कहा, इसमें कोई शक नहीं कि आज यहां 50 सीटों वाली एक ऐसी पार्टी सत्ता में है जो दिल्ली के हर हुक्म को मानती है। जो काम आप उपराज्यपाल के जरिए कराना चाहते थे, वह अब इनके जरिए करा रहे हैं और ये उफ तक नहीं करते।'''' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक दल को रबर स्टैंप बनाकर या जबरन सामान्य स्थिति दिखाने की कोशिश से जम्मू-कश्मीर के मसले का हल नहीं निकल सकता; इसके लिए केंद्र को यहां के लोगों का विश्वास जीतना होगा।
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महबूबा ने घाटी में जारी छापों और परिवारों को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के सिलसिले को तुरंत बंद करने की मांग की। जेलों में बरसों से बिना सुनवाई बंद विचाराधीन कैदियों, बीमार लोगों और जमानत मिलने के बावजूद सलाख़ों के पीछे रखे गए लोगों को रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने त्राल की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि केवल शक के आधार पर पूरे परिवार को निशाना बनाया जा रहा है, यहां तक कि विवाहित बेटियों और उनके पतियों को भी गिरफ्तार किया जा रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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उन्होंने दो टूक कहा कि राष्ट्रीय हित किसी भी सरकार से कहीं बड़ा होता है। पार्टी अध्यक्ष पद पर दोबारा सर्वसम्मति से चुने जाने के तुरंत बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र से जम्मू-कश्मीर की जनता पर भरोसा जताने की अपील की।
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जम्मू-कश्मीर की मौजूदा नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार पर निशाना साधते हुए महबूबा ने कहा, इसमें कोई शक नहीं कि आज यहां 50 सीटों वाली एक ऐसी पार्टी सत्ता में है जो दिल्ली के हर हुक्म को मानती है। जो काम आप उपराज्यपाल के जरिए कराना चाहते थे, वह अब इनके जरिए करा रहे हैं और ये उफ तक नहीं करते।'''' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक दल को रबर स्टैंप बनाकर या जबरन सामान्य स्थिति दिखाने की कोशिश से जम्मू-कश्मीर के मसले का हल नहीं निकल सकता
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महबूबा ने घाटी में जारी छापों और परिवारों को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के सिलसिले को तुरंत बंद करने की मांग की। जेलों में बरसों से बिना सुनवाई बंद विचाराधीन कैदियों, बीमार लोगों और जमानत मिलने के बावजूद सलाख़ों के पीछे रखे गए लोगों को रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने त्राल की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि केवल शक के आधार पर पूरे परिवार को निशाना बनाया जा रहा है, यहां तक कि विवाहित बेटियों और उनके पतियों को भी गिरफ्तार किया जा रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।