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लाल देद जैसे संतों के आशीर्वाद ने राष्ट्र की कला व साहित्य को संरक्षित किया : एलजी

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Srinagar, Lal Ded, National Awards, Gave Womens, LG Manoj Sinha
श्रीनगर के एसकेआईसीसी में आयोजित लाल डेड राष्ट्रीय पुरस्कार देते उपराज्यपाल मनोज सिन्हा। संवाद - फोटो : Archive
मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में एक समारोह में लाल देद राष्ट्रीय पुरस्कार से नारी शक्ति को सम्मानित किया
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को श्रीनगर में लाल देद राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में भाग लिया। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह का आयोजन पुणे स्थित संस्था ''''सरहद'''' की ओर से किया गया था। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने कहा कि लाल देद राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित नारी शक्ति ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने कहा कि लाल देद जैसी संतों के आशीर्वाद ने राष्ट्र के दृष्टिकोण, उसकी कला, साहित्य, संगीत, लोक परंपराओं और गहरी आध्यात्मिक ज्ञान को पोषित और संरक्षित किया है। अपने-अपने क्षेत्रों में नए मानक स्थापित करके, असाधारण महिला उपलब्धिकर्ताओं ने समाज की आत्मा को आकार देने में मदद की है। महिला सशक्तीकरण समाज और सरकार दोनों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। हमें नवाचार और उद्यमिता में भी महिलाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि उनके नेतृत्व वाले उद्यम और अधिक सशक्त बन सकें।
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उपराज्यपाल ने कहा कि आज के विश्व में, लाल देद का संदेश मानवता के लिए एक जीवन-रेखा बन सकता है, और उनकी करुणा, सत्य तथा नैतिकता की विचारधारा उस वैश्विक समाज की नींव है जो शांति, समावेश और भाईचारे की कामना करता है। लाल देद का जीवन समाज को यह सिखाता है कि चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो, किसी भी व्यक्ति की आंतरिक शक्ति, आस्था और साहस, सबसे कठिन परीक्षाओं को भी विकास और सीखने के अवसरों में बदल सकता है।
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लाल देद उन सभी साधकों के लिए आशा की किरण बनीं, जिन्होंने यह विश्वास करने का साहस किया कि मानवता वास्तव में बेहतर बन सकती है; और उनके आदर्शों ने लोगों को एक अधिक सौहार्दपूर्ण विश्व की ओर निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति’ त्याग, करुणा और समानता का प्रतीक है और महिलाओं के लिए पूर्ण अधिकार सुनिश्चित करना समाज और राष्ट्र दोनों का ही एक पवित्र कर्तव्य है।
मेरा मानना है कि लैंगिक समानता पुरुषों के लिए एक आह्वान है कि वे महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों, उनके भागीदार और सहयोगी बनें, और अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए संयुक्त रूप से एक न्यायसंगत समाज तथा एक विकसित भारत का निर्माण करें। मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब महिलाएं प्रगति करती हैं तो परिवार प्रगति करते हैं और जब परिवार प्रगति करते हैं तो राष्ट्र प्रगति करता है। राष्ट्र-निर्माण में महिलाएं अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और इसका प्रमाण जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार समकालीन कश्मीरी कवयित्री बिमला रैना, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कवयित्री प्रो. नसीम शफाई, विदुषी, लेखिका और राजभाषा विशेषज्ञ डॉ. सकीना अख्तर और जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्षा डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी को प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ (जीवन-पर्यंत उपलब्धि पुरस्कार) प्रख्यात लेखिका, शिक्षाविद् और अनुवादक प्रो. नीरजा मट्टू को प्रदान किया गया।

इस पुरस्कार वितरण समारोह में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा विजया के राहटकर, शिक्षाविद् विजय धर, सरहद के संस्थापक अध्यक्ष संजय नाहर, सरहद की संस्थापक सचिव सुषमा नाहर, वरिष्ठ अधिकारीगण, सरहद फाउंडेशन के सदस्य तथा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे।
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