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Srinagar News: कश्मीरी सेब की थोक बाजार में लाली, उत्पादकों में आई खुशहाली
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पुलवामा के शीतगृह में सेब। संवाद
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- महीनों की अनिश्चितता के बाद बाग मालिकों के चेहरे खिले, तुलनात्मक रूप से मिल रहा बेहतर रिटर्न
- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहर की मंडियों में बढ़ी मांग
मुजम्मिल याकूब
शोपियां। महीनों की अनिश्चितता, कम मांग और कटाई के मौसम में कम कीमतों के बाद कश्मीर में सेब उत्पादकों के चेहरे खिल उठे हैं। कश्मीरी सेब की लाली थोक बाजार में छा गई है। कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स में रखे फलों की मांग बढ़ी है। इससे कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। बाग मालिकों को तुलनात्मक रूप से बेहतर रिटर्न मिल रहा है।
उत्पादकों ने बताया कि हाल के वर्षों में सबसे मुश्किल सेब सीजन रहा। एक लागत ज्यादा थी, मौसम खराब था और पीक सीजन के दौरान बाजार में सुस्ती थी। अब सीजन के आखिर में यह सुधार राहत लेकर आया है। उत्पादकों और व्यापारियों के अनुसार स्टोर किए गए सेबों खासकर ए-ग्रेड डिलीशियस, कुल्लू डिलीशियस और प्रीमियम किस्मों की मांग दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों की मंडियों में बढ़ी है। नतीजतन पिछले कुछ हफ्तों में कीमतें ऊपर गई हैं।
शोपियां के सेब उत्पादक जाकिर ने कहा कि मुख्य सीजन के दौरान हम बहुत कम कीमत पर सेब बेच रहे थे। जिन डिब्बों (90 दाना) को बनाने में 500-800 रुपये लगते थे वे मुश्किल से 600-700 रुपये में बिक रहे थे। अब कीमतें 1200-1400 रुपये तक पहुंच गई हैं। कम से कम हम अपनी लागत निकाल पा रहे हैं और कुछ कमा पा रहे हैं।
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एक कोल्ड स्टोर के मालिक मोहम्मद अशरफ ने कहा कि इस सीजन में ट्रक हाईवे और मंडियों में फंसे रहे। अन्य दुश्वारियों के चलते कई किसानों को मजबूरी में कम कीमतों पर फल बेचना पड़ा क्योंकि उनके पास स्टोरेज की सुविधा नहीं थी। अब कुछ दिनों से फिर मांग बढ़ी है। जिनका माल कोल्ड स्टोर में है वो अब माल बाजारों में भेज रहे हैं और उन्हें पहले से अच्छे दाम मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोल्ड स्टोर की संख्या बढ़ जाए तो उत्पादकों को मजबूरी में माल नहीं बेचना पड़ेगा। वह माल को कोल्ड स्टोर में रख सकते हैं। बाद में अच्छे रेट मिलने पर उसे बाजारों में भेज सकेंगे। गौरतलब है कि सेब की खेती कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगभग सात लाख परिवारों को सहारा देती है। संवाद
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- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहर की मंडियों में बढ़ी मांग
मुजम्मिल याकूब
शोपियां। महीनों की अनिश्चितता, कम मांग और कटाई के मौसम में कम कीमतों के बाद कश्मीर में सेब उत्पादकों के चेहरे खिल उठे हैं। कश्मीरी सेब की लाली थोक बाजार में छा गई है। कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स में रखे फलों की मांग बढ़ी है। इससे कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। बाग मालिकों को तुलनात्मक रूप से बेहतर रिटर्न मिल रहा है।
उत्पादकों ने बताया कि हाल के वर्षों में सबसे मुश्किल सेब सीजन रहा। एक लागत ज्यादा थी, मौसम खराब था और पीक सीजन के दौरान बाजार में सुस्ती थी। अब सीजन के आखिर में यह सुधार राहत लेकर आया है। उत्पादकों और व्यापारियों के अनुसार स्टोर किए गए सेबों खासकर ए-ग्रेड डिलीशियस, कुल्लू डिलीशियस और प्रीमियम किस्मों की मांग दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों की मंडियों में बढ़ी है। नतीजतन पिछले कुछ हफ्तों में कीमतें ऊपर गई हैं।
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शोपियां के सेब उत्पादक जाकिर ने कहा कि मुख्य सीजन के दौरान हम बहुत कम कीमत पर सेब बेच रहे थे। जिन डिब्बों (90 दाना) को बनाने में 500-800 रुपये लगते थे वे मुश्किल से 600-700 रुपये में बिक रहे थे। अब कीमतें 1200-1400 रुपये तक पहुंच गई हैं। कम से कम हम अपनी लागत निकाल पा रहे हैं और कुछ कमा पा रहे हैं।
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एक कोल्ड स्टोर के मालिक मोहम्मद अशरफ ने कहा कि इस सीजन में ट्रक हाईवे और मंडियों में फंसे रहे। अन्य दुश्वारियों के चलते कई किसानों को मजबूरी में कम कीमतों पर फल बेचना पड़ा क्योंकि उनके पास स्टोरेज की सुविधा नहीं थी। अब कुछ दिनों से फिर मांग बढ़ी है। जिनका माल कोल्ड स्टोर में है वो अब माल बाजारों में भेज रहे हैं और उन्हें पहले से अच्छे दाम मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोल्ड स्टोर की संख्या बढ़ जाए तो उत्पादकों को मजबूरी में माल नहीं बेचना पड़ेगा। वह माल को कोल्ड स्टोर में रख सकते हैं। बाद में अच्छे रेट मिलने पर उसे बाजारों में भेज सकेंगे। गौरतलब है कि सेब की खेती कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगभग सात लाख परिवारों को सहारा देती है। संवाद