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Srinagar News: हाईकोर्ट ने सीआईसी अपीलों के लिए 45 दिन की समय-सीमा तय करने से किया इन्कार
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- उच्च न्यायालय ने कहा, देरी हमेशा के लिए नहीं हो सकती
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (सीआईसी) को दूसरी अपीलों का निपटारा 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश देने से इन्कार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि वे ऐसी समय-सीमा तय नहीं कर सकते जो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में नहीं दी गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की डिवीजन बेंच ने यह आदेश बारामुला के उड़ी निवासी जुनैद जावेद की ओर से दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता ने सीआईसी को निर्देश देने की मांग की थी कि वह सभी लंबित अपीलों, खासकर जम्मू-कश्मीर के निवासियों की ओर से दायर अपीलों का निपटारा 45 दिनों के भीतर करे। याचिकाकर्ता ने दूसरी अपीलों के समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए एक सिस्टम बनाने और कमीशन के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए थे।
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कोर्ट ने गौर किया कि सीआईसी ने अपने जवाब में बुनियादी ढांचे की कमियों और दूसरी अपीलों व शिकायतों की भारी संख्या का हवाला देते हुए कहा कि वह निपटारे के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं कर सकता।
यह देखते हुए कि आरटीआई एक्ट में दूसरी अपीलों और शिकायतों के निपटारे के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है, बेंच ने कहा कि वह न्यायिक निर्देश के जरिए याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई 45 दिन की निपटारा अवधि अनिवार्य नहीं कर सकती।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कमीशन अपीलों को सालों तक लंबित नहीं रख सकता। बेंच ने कहा, यह नहीं कहा जा सकता कि सीआईसी अपीलों पर बहुत लंबे समय तक कोई कार्रवाई न करे और उन्हें सालों तक बिना फैसले के लटकाए रखे। कमीशन को अपने कामकाज में सुधार करने और पेंडिंग मामलों को कम करने के लिए एक सिस्टम बनाने की जरूरत है, साथ ही नई अपीलों और शिकायतों को भी प्रभावी ढंग से निपटाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने सीआईसी को निर्देश दिया कि वह बुनियादी ढांचे की सीमाओं और अपीलों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अपने कामकाज को बेहतर बनाने के लिए उचित कदम उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता के सुझाव सही और व्यावहारिक लगते हैं तो कमीशन उन पर विचार कर सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (सीआईसी) को दूसरी अपीलों का निपटारा 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश देने से इन्कार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि वे ऐसी समय-सीमा तय नहीं कर सकते जो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में नहीं दी गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की डिवीजन बेंच ने यह आदेश बारामुला के उड़ी निवासी जुनैद जावेद की ओर से दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया।
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याचिकाकर्ता ने सीआईसी को निर्देश देने की मांग की थी कि वह सभी लंबित अपीलों, खासकर जम्मू-कश्मीर के निवासियों की ओर से दायर अपीलों का निपटारा 45 दिनों के भीतर करे। याचिकाकर्ता ने दूसरी अपीलों के समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए एक सिस्टम बनाने और कमीशन के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए थे।
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कोर्ट ने गौर किया कि सीआईसी ने अपने जवाब में बुनियादी ढांचे की कमियों और दूसरी अपीलों व शिकायतों की भारी संख्या का हवाला देते हुए कहा कि वह निपटारे के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं कर सकता।
यह देखते हुए कि आरटीआई एक्ट में दूसरी अपीलों और शिकायतों के निपटारे के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है, बेंच ने कहा कि वह न्यायिक निर्देश के जरिए याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई 45 दिन की निपटारा अवधि अनिवार्य नहीं कर सकती।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कमीशन अपीलों को सालों तक लंबित नहीं रख सकता। बेंच ने कहा, यह नहीं कहा जा सकता कि सीआईसी अपीलों पर बहुत लंबे समय तक कोई कार्रवाई न करे और उन्हें सालों तक बिना फैसले के लटकाए रखे। कमीशन को अपने कामकाज में सुधार करने और पेंडिंग मामलों को कम करने के लिए एक सिस्टम बनाने की जरूरत है, साथ ही नई अपीलों और शिकायतों को भी प्रभावी ढंग से निपटाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने सीआईसी को निर्देश दिया कि वह बुनियादी ढांचे की सीमाओं और अपीलों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अपने कामकाज को बेहतर बनाने के लिए उचित कदम उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता के सुझाव सही और व्यावहारिक लगते हैं तो कमीशन उन पर विचार कर सकता है।